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'इस्तीफा सिर्फ शुरुआत': धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक का बयान, बोले- अब अच्छे दिन आने की उम्मीद

Mon, 27 Jul 2026 04:55 PM IST
विकास कुमार एएनआई, दिल्ली
एएनआई, दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Mon, 27 Jul 2026 04:55 PM IST
सार

सोनम वांगचुक ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। 

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On Dharmendra Pradhan resignation sonam Wangchuk says resignation is just beginning
सोनम वांगचुक - फोटो : जी पाल

विस्तार

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और हालिया शिक्षा एवं परीक्षा विवादों पर शिक्षाविद एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे सकारात्मक बदलाव की शुरुआत बताया है। उन्होंने कहा कि इस्तीफा अपने आप में अंतिम समाधान नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में पहला कदम है।

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'इस्तीफा तो बस शुरुआत है'
वांगचुक ने कहा कि इस्तीफा तो बस एक शुरुआत है। यदि इस बिंदु से समस्या को स्वीकार कर उसका समाधान किया जाए, तो हमारा देश बेहतर बन सकता है। मुझे लगता है कि यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार और संबंधित पक्षों के बीच सकारात्मक संवाद के जरिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे देश की परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बन सके।

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सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर दिया जोर
सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए वांगचुक ने कहा कि इस विषय पर व्यापक चर्चा और गंभीर विचार-विमर्श होना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी बड़े सुधार से पहले सभी पक्षों की राय लेकर उचित निर्णय लिया जाना आवश्यक है।

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शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार
वांगचुक ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। यदि कोई शरारती तत्व दुर्भावना से कानून तोड़ते हैं, तो उनके खिलाफ कानून अपना काम करेगा। लेकिन शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।

केवल कानून बनाने से नहीं आएगा सुधार
वांगचुक ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल कानून बनाने से नहीं, बल्कि संवाद, पारदर्शिता और जनभागीदारी से संभव होगा। उनके अनुसार, मौजूदा घटनाक्रम देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।

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