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Delhi: निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए अध्यादेश लाने की तैयारी, दिल्ली के छात्रों के लिए होंगी 25 फीसदी सीटें

Fri, 14 Aug 2026 11:43 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Fri, 14 Aug 2026 11:43 AM IST
सार

प्रस्तावित कानून के तहत प्रत्येक पाठ्यक्रम में 25 फीसदी सीटें दिल्ली के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है। यह आरक्षण लागू नियमों और नीति के अनुसार होगा। सरकार का उद्देश्य दिल्ली के छात्रों को राजधानी में ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

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Preparations underway to introduce an ordinance for opening private universities in Delhi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Freepik

विस्तार

दिल्ली में निजी विश्वविद्यालय खोलने का रास्ता अब अध्यादेश के जरिए साफ करने की तैयारी है। विधानसभा के मानसून सत्र में निजी विश्वविद्यालय विधेयक कानूनी और तकनीकी अड़चनों के कारण पेश नहीं हो सका। दिल्ली सरकार अब अध्यादेश लाकर निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में हर पाठ्यक्रम की 25 फीसदी सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षित होंगी।

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दिल्ली मंत्रिमंडल पहले ही निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन से जुड़े मसौदा विधेयक को मंजूरी दे चुका है। सरकार का कहना है कि इससे दिल्ली के छात्रों को उच्च शिक्षा के ज्यादा विकल्प मिलेंगे। शोध, नवाचार, उद्यमिता और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को भी बढ़ावा देने की योजना है।
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दिल्ली के छात्रों को 25 फीसदी सीट
प्रस्तावित कानून के तहत प्रत्येक पाठ्यक्रम में 25 फीसदी सीटें दिल्ली के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है। यह आरक्षण लागू नियमों और नीति के अनुसार होगा। सरकार का उद्देश्य दिल्ली के छात्रों को राजधानी में ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

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नियामक प्राधिकरण करेगा निगरानी
निजी विश्वविद्यालयों के लिए दिल्ली निजी विश्वविद्यालय नियामक प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव है। यह शिक्षण की गुणवत्ता, शोध, संस्थागत संचालन, दाखिले, परीक्षाओं, छात्र रिकॉर्ड और विश्वविद्यालय के समग्र प्रदर्शन पर नजर रखेगा। विश्वविद्यालय खोलने के प्रस्तावों की जांच के लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, यूजीसी प्रतिनिधियों और वित्त विशेषज्ञों की समिति भी बनाई जाएगी।

जमीन की कमी के चलते बहुमंजिला परिसर
दिल्ली में जमीन की सीमित उपलब्धता को देखते हुए निजी विश्वविद्यालयों को आधुनिक बहुमंजिला शहरी परिसर बनाने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इसके लिए पारंपरिक बड़े और जमीन आधारित परिसर की अनिवार्यता नहीं होगी।

सरकार से नियमित अनुदान नहीं
प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित होंगे और उन्हें दिल्ली सरकार से नियमित वित्तीय अनुदान नहीं मिलेगा। हालांकि नियमों के अनुसार शोध परियोजनाओं और संबंधित वित्तीय सहायता के लिए वे पात्र होंगे। सरकार का लक्ष्य दिल्ली में उच्च शिक्षा का मजबूत तंत्र तैयार करना और छात्रों के पड़ोसी राज्यों या विदेश जाने की जरूरत कम करना है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • निजी विश्वविद्यालय नियामक प्राधिकरण बनेगा, जिसके जरिए दाखिले, परीक्षा, शिक्षण गुणवत्ता, शोध और संस्थागत कामकाज की निगरानी होगी।
  • दिल्ली में जमीन की कमी के चलते बहुमंजिला परिसर की अनुमति, पारंपरिक बड़े परिसरों के बजाय नया शहरी मॉडल।
  • निजी विश्वविद्यालयों को सरकार से नियमित अनुदान नहीं मिलेगा, ये संस्थान स्ववित्तपोषित होंगे।
  • दिल्ली के छात्रों को मिलेंगे उच्च शिक्षा के ज्यादा विकल्प, पड़ोसी राज्यों और विदेश जाने की जरूरत कम करने का लक्ष्य।
  • विश्वविद्यालय खोलने के प्रस्तावों की विशेषज्ञ समिति जांच करेगी, इसमें सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद, यूजीसी और वित्त विशेषज्ञ शामिल होंगे।
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