{"_id":"6a524e12d3271786b90b72bc","slug":"public-charging-stations-made-mandatory-at-every-ev-dealership-in-delhi-within-six-months-delhi-ncr-news-c-340-1-del1004-145288-2026-07-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: दिल्ली में हर ईवी डीलरशिप पर छह माह में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: दिल्ली में हर ईवी डीलरशिप पर छह माह में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नियम नहीं मानने वाले डीलरों को पोर्टल से डी-एक्टिवेट करेगा परिवहन विभाग, सब्सिडी प्रक्रिया भी होगी प्रभावित
खरीदारों के लिए 30 दिन में आवेदन, 60 दिन में सब्सिडी और पुरानी गाड़ी स्क्रैप कराने पर मिलेगा अतिरिक्त प्रोत्साहन
धनंजय मिश्रा
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति के तहत राजधानी में चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब हर अधिकृत ईवी डीलरशिप को अधिसूचना जारी होने के छह महीने के भीतर सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना अनिवार्य होगा। तय समय में यह व्यवस्था नहीं करने वाले डीलरों के खिलाफ परिवहन विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। ऐसे डीलरों को विभाग के निर्धारित पोर्टल से डी-एक्टिवेट किया जा सकता है, जिससे उनके माध्यम से सब्सिडी संबंधी प्रक्रिया प्रभावित होगी।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य ईवी उपयोगकर्ताओं की 'रेंज एंग्जायटी' यानी बैटरी खत्म होने की चिंता को कम करना और राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ाना है। विभाग ने सभी अधिकृत डीलरों को चार्जिंग ढांचा विकसित करने के लिए छह महीने की समयसीमा दी है। दिशानिर्देशों के अनुसार यदि कोई डीलर तय अवधि में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित नहीं करता है तो उसे विभाग के पोर्टल से हटा दिया जाएगा। इसका सीधा असर नई ईवी की बिक्री और सब्सिडी से जुड़ी प्रक्रियाओं पर पड़ेगा। जब तक डीलर नियमों का पालन नहीं करेगा, तब तक वह सब्सिडी के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे डीलरों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
शोरूम के बाहर या परिसर में होगा चार्जिंग स्टेशन
नई नीति के तहत हर अधिकृत ईवी शोरूम के बाहर या परिसर में ऐसा चार्जिंग स्टेशन विकसित करना होगा, जहां आम लोग भी अपने वाहन चार्ज कर सकें। दोपहिया और तिपहिया वाहनों की डीलरशिप पर कम से कम तीन सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट तथा चारपहिया वाहनों की डीलरशिप पर कम से कम दो चार्जिंग पॉइंट स्थापित करना अनिवार्य होगा। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये स्टेशन किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं होंगे। किसी भी ब्रांड का इलेक्ट्रिक वाहन चालक यहां चार्जिंग सुविधा का उपयोग कर सकेगा। इस पूरे नेटवर्क के विकास के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) को राज्य की नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो बिजली वितरण कंपनियों के साथ मिलकर कार्ययोजना तैयार करेगी।
विज्ञापन
इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों को मिलेगी नो-एंट्री से राहत
सरकार ने व्यापारियों को इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहन अपनाने के लिए विशेष राहत देने का भी फैसला किया है। 3.5 टन से अधिक और 12 टन तक सकल भार वाले इलेक्ट्रिक एन-2 श्रेणी के मालवाहक वाहनों को नो-एंट्री प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी। शुरुआती चरण में ऐसे एक हजार वाहनों को यह सुविधा मिलेगी। इनकी पहचान विशेष रजिस्ट्रेशन सीरीज के माध्यम से की जाएगी।
ईवी खरीदारों के लिए जानने योग्य चार अहम नियम
- वाहन का रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र (आरसी) जारी होने के 30 दिनों के भीतर सब्सिडी के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
-आवेदन का सत्यापन होने के बाद 60 दिनों के भीतर सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
-अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर पुराना वाहन कबाड़ कर छह महीने के भीतर नई ईवी खरीदने पर अतिरिक्त स्क्रैपिंग इंसेंटिव मिलेगा।
-सब्सिडी पाने वाले वाहन को तीन वर्ष तक दिल्ली से बाहर ट्रांसफर या दोबारा रजिस्ट्रेशन (एनओसी) नहीं कराया जा सकेगा।
-- -- -
एक्सपर्ट कमेंट
नई ईवी नीति लागू करने से पहले सरकार को चार्जिंग नेटवर्क से जुड़ी व्यवस्थाएं करनी चाहिए थी
दिल्ली के पूर्व परिवहन उपायुक्त डॉ. अनिल छिकारा का कहना है कि नई ईवी नीति लागू करने से पहले सरकार को चार्जिंग नेटवर्क से जुड़ी स्पष्ट व्यवस्था तैयार करनी चाहिए थी। डीलरों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन कई शोरूम के पास इसके लिए पर्याप्त जगह ही उपलब्ध नहीं है। मेरी राय में परिवहन विभाग को पहले बिजली वितरण कंपनियों के साथ मिलकर निजी चार्जिंग स्टेशनों के नियम, ग्रीन मीटर की व्यवस्था, सुरक्षा मानक, बिजली दरों की श्रेणी, एकीकृत सॉफ्टवेयर और सभी वाहनों के लिए समान चार्जिंग कनेक्टर जैसी व्यवस्थाएं तय करनी चाहिए थीं। यदि चार्जिंग स्टेशनों पर जगह की कमी, लंबी प्रतीक्षा या सुरक्षा संबंधी समस्याएं सामने आती हैं तो इसका नकारात्मक असर केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी ईवी अपनाने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
विज्ञापन
खरीदारों के लिए 30 दिन में आवेदन, 60 दिन में सब्सिडी और पुरानी गाड़ी स्क्रैप कराने पर मिलेगा अतिरिक्त प्रोत्साहन
धनंजय मिश्रा
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति के तहत राजधानी में चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब हर अधिकृत ईवी डीलरशिप को अधिसूचना जारी होने के छह महीने के भीतर सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना अनिवार्य होगा। तय समय में यह व्यवस्था नहीं करने वाले डीलरों के खिलाफ परिवहन विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। ऐसे डीलरों को विभाग के निर्धारित पोर्टल से डी-एक्टिवेट किया जा सकता है, जिससे उनके माध्यम से सब्सिडी संबंधी प्रक्रिया प्रभावित होगी।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य ईवी उपयोगकर्ताओं की 'रेंज एंग्जायटी' यानी बैटरी खत्म होने की चिंता को कम करना और राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ाना है। विभाग ने सभी अधिकृत डीलरों को चार्जिंग ढांचा विकसित करने के लिए छह महीने की समयसीमा दी है। दिशानिर्देशों के अनुसार यदि कोई डीलर तय अवधि में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित नहीं करता है तो उसे विभाग के पोर्टल से हटा दिया जाएगा। इसका सीधा असर नई ईवी की बिक्री और सब्सिडी से जुड़ी प्रक्रियाओं पर पड़ेगा। जब तक डीलर नियमों का पालन नहीं करेगा, तब तक वह सब्सिडी के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे डीलरों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
विज्ञापन
शोरूम के बाहर या परिसर में होगा चार्जिंग स्टेशन
नई नीति के तहत हर अधिकृत ईवी शोरूम के बाहर या परिसर में ऐसा चार्जिंग स्टेशन विकसित करना होगा, जहां आम लोग भी अपने वाहन चार्ज कर सकें। दोपहिया और तिपहिया वाहनों की डीलरशिप पर कम से कम तीन सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट तथा चारपहिया वाहनों की डीलरशिप पर कम से कम दो चार्जिंग पॉइंट स्थापित करना अनिवार्य होगा। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये स्टेशन किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं होंगे। किसी भी ब्रांड का इलेक्ट्रिक वाहन चालक यहां चार्जिंग सुविधा का उपयोग कर सकेगा। इस पूरे नेटवर्क के विकास के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) को राज्य की नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो बिजली वितरण कंपनियों के साथ मिलकर कार्ययोजना तैयार करेगी।
विज्ञापन
इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों को मिलेगी नो-एंट्री से राहत
सरकार ने व्यापारियों को इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहन अपनाने के लिए विशेष राहत देने का भी फैसला किया है। 3.5 टन से अधिक और 12 टन तक सकल भार वाले इलेक्ट्रिक एन-2 श्रेणी के मालवाहक वाहनों को नो-एंट्री प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी। शुरुआती चरण में ऐसे एक हजार वाहनों को यह सुविधा मिलेगी। इनकी पहचान विशेष रजिस्ट्रेशन सीरीज के माध्यम से की जाएगी।
ईवी खरीदारों के लिए जानने योग्य चार अहम नियम
- वाहन का रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र (आरसी) जारी होने के 30 दिनों के भीतर सब्सिडी के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
-आवेदन का सत्यापन होने के बाद 60 दिनों के भीतर सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
-अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर पुराना वाहन कबाड़ कर छह महीने के भीतर नई ईवी खरीदने पर अतिरिक्त स्क्रैपिंग इंसेंटिव मिलेगा।
-सब्सिडी पाने वाले वाहन को तीन वर्ष तक दिल्ली से बाहर ट्रांसफर या दोबारा रजिस्ट्रेशन (एनओसी) नहीं कराया जा सकेगा।
एक्सपर्ट कमेंट
नई ईवी नीति लागू करने से पहले सरकार को चार्जिंग नेटवर्क से जुड़ी व्यवस्थाएं करनी चाहिए थी
दिल्ली के पूर्व परिवहन उपायुक्त डॉ. अनिल छिकारा का कहना है कि नई ईवी नीति लागू करने से पहले सरकार को चार्जिंग नेटवर्क से जुड़ी स्पष्ट व्यवस्था तैयार करनी चाहिए थी। डीलरों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन कई शोरूम के पास इसके लिए पर्याप्त जगह ही उपलब्ध नहीं है। मेरी राय में परिवहन विभाग को पहले बिजली वितरण कंपनियों के साथ मिलकर निजी चार्जिंग स्टेशनों के नियम, ग्रीन मीटर की व्यवस्था, सुरक्षा मानक, बिजली दरों की श्रेणी, एकीकृत सॉफ्टवेयर और सभी वाहनों के लिए समान चार्जिंग कनेक्टर जैसी व्यवस्थाएं तय करनी चाहिए थीं। यदि चार्जिंग स्टेशनों पर जगह की कमी, लंबी प्रतीक्षा या सुरक्षा संबंधी समस्याएं सामने आती हैं तो इसका नकारात्मक असर केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी ईवी अपनाने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।