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Delhi NCR News: आप की मान्यता रद्द करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज
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अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया व अन्य नेताओं को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की भी की गई थी मांग
हाईकोर्ट ने कहा- याचिका कल्पनाशील और आधारहीन, नेताओं की अयोग्यता का सवाल फिलहाल नहीं उठता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) की मान्यता रद्द करने और उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया तथा अन्य नेताओं को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) खारिज कर दी। अदालत ने याचिका को तथ्यों और कानूनी आधार से रहित बताते हुए इसे स्वीकार करने से इन्कार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल की याचिका को बिना दम की, अत्यंत कल्पनाशील और गलत धारणा पर आधारित करार दिया। याचिकाकर्ता ने शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई के कथित बहिष्कार के आधार पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29ए(5) के तहत आम आदमी पार्टी का पंजीकरण रद्द करने की मांग की थी। याचिका में दावा किया गया था कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक जैसे नेताओं ने संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा नहीं दिखाई।
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि पार्टी ने संविधान, धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद या लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों में विश्वास खो दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने की अयोग्यता का सवाल तभी उठेगा, जब संबंधित नेता चुनाव में भाग लेने का निर्णय लें। अदालत ने कहा कि याचिका में ऐसे कोई ठोस आधार नहीं दिए गए, जिनसे पार्टी का पंजीकरण रद्द करने की मांग उचित ठहराई जा सके।
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हाईकोर्ट ने कहा- याचिका कल्पनाशील और आधारहीन, नेताओं की अयोग्यता का सवाल फिलहाल नहीं उठता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) की मान्यता रद्द करने और उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया तथा अन्य नेताओं को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) खारिज कर दी। अदालत ने याचिका को तथ्यों और कानूनी आधार से रहित बताते हुए इसे स्वीकार करने से इन्कार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल की याचिका को बिना दम की, अत्यंत कल्पनाशील और गलत धारणा पर आधारित करार दिया। याचिकाकर्ता ने शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई के कथित बहिष्कार के आधार पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29ए(5) के तहत आम आदमी पार्टी का पंजीकरण रद्द करने की मांग की थी। याचिका में दावा किया गया था कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक जैसे नेताओं ने संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा नहीं दिखाई।
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अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि पार्टी ने संविधान, धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद या लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों में विश्वास खो दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने की अयोग्यता का सवाल तभी उठेगा, जब संबंधित नेता चुनाव में भाग लेने का निर्णय लें। अदालत ने कहा कि याचिका में ऐसे कोई ठोस आधार नहीं दिए गए, जिनसे पार्टी का पंजीकरण रद्द करने की मांग उचित ठहराई जा सके।