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दिल्ली हाईकोर्ट से डाबर को बड़ी राहत: FSSAI के उत्पाद बिक्री रोकने वाले आदेश पर लगाई रोक, ये था पूरा मामला

Fri, 07 Aug 2026 04:21 PM IST
विकास कुमार एएनआई, दिल्ली
एएनआई, दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Fri, 07 Aug 2026 04:21 PM IST
सार

न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एफएसएसएआई के आदेश पर प्रथम दृष्टया आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि कंपनी का पक्ष सुने बिना इस तरह का आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए था।

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relief for Dabur from Delhi High Court Stay granted on FSSAI order halting product sales
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एफएमसीजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड को बड़ी राहत देते हुए, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के 3 अगस्त के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। एफएसएसएआई ने अपने आदेश में डाबर को "100% प्योर", "100% नेचुरल", "100% प्योरिटी गारंटीड" और "100% ऑर्गेनिक" जैसे दावों वाले कई खाद्य उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने का निर्देश दिया था।

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अदालत की अहम टिप्पणियां
न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एफएसएसएआई के आदेश पर प्रथम दृष्टया आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि कंपनी का पक्ष सुने बिना इस तरह का आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए था। कंपनी कई दशकों से उन्हीं लेबलों के तहत अपने उत्पाद बेच रही है, ऐसे में आपातकालीन स्थिति न होने के बावजूद बिना कोई 'कारण बताओ नोटिस' दिए बिक्री पर तुरंत रोक लगाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। अदालत ने डाबर की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक एफएसएसएआई के आदेश पर रोक लगा दी है और प्रतिवादियों (सरकार और एफएसएसएआई) से जवाब तलब किया है।

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डाबर का पक्ष 
डाबर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील संदीप सेठी ने दलील दी कि नियामक ने बिना कोई सुनवाई का मौका दिए या नोटिस जारी किए बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया, केवल इसलिए क्योंकि उत्पादों पर "100%" का दावा किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि उत्पादों में मिलावट, असुरक्षित होने या खराब गुणवत्ता का कोई आरोप नहीं है, फिर भी कंपनी को बाजार से उत्पाद वापस मंगाने या उनकी दोबारा पैकेजिंग करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो कि अधिकार क्षेत्र से बाहर का कदम है।

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केंद्र सरकार का पक्ष 
केंद्र की ओर से पेश वकील आशीष दीक्षित ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि डाबर को पहले ही एक सुधार नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि डाबर के 'रियल फ्रूट जूस' उत्पादों में "100%" दावों के उपयोग से संबंधित एक अन्य याचिका हाईकोर्ट में पहले से ही लंबित है, जिसमें कोई अंतरिम रोक नहीं मिली है। इसके जवाब में डाबर के वकील ने स्पष्ट किया कि पिछला नोटिस केवल फ्रूट जूस से संबंधित था, न कि उन उत्पादों से जिन पर 3 अगस्त को रोक लगाई गई है।

किन उत्पादों पर एफएसएसएआई ने लगाई थी रोक?
एफएसएसएआई के 3 अगस्त, 2026 के आदेश में भ्रामक दावों का हवाला देते हुए डाबर को 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपने और बिक्री जारी रखने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। जिन उत्पादों की बिक्री रोकने का निर्देश दिया गया था, उनमें शामिल हैं- 
डाबर हनी 
डाबर हनी स्क्वीजी
डाबर सुंदरबन हनी 
डाबर हिमालयन एप्पल साइडर विनेगर 
डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर 
डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल 
डाबर कोल्ड प्रेस्ड सेसम ऑयल 
डाबर काऊ घी 
रियल एक्टिव 100% टेंडर कोकोनट वाटर 
डाबर होममेड कोकोनट मिल्क
डाबर ऑर्गेनिक हनी

फिलहाल हाईकोर्ट के इस स्टे से डाबर को बड़ी फौरी राहत मिली है और अगली सुनवाई तक इन सभी उत्पादों की बिक्री बाजार में जारी रह सकेगी।

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