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'75 लोग 75 हजार भी हो सकते हैं': आप जंतर मंतर को बंद क्यों नहीं कर देते? दिल्ली HC ने केंद्र से पूछा सवाल

Fri, 07 Aug 2026 04:55 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Fri, 07 Aug 2026 04:55 PM IST
सार

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग मामले में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को मान्यता दी है। न्यायमूर्ति महाजन ने जवाब दिया कि लोकतांत्रिक अधिकारों की बात अलग है, लेकिन शहर को बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। 

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Delhi High Court asks Centre Why not close Jantar Mantar as a protest site
दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर मंतर पर केंद्र से पूछा सवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से पूछा कि जंतर मंतर क्षेत्र को प्रदर्शन स्थल के रूप में बंद क्यों नहीं किया जा रहा है। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शहर को अनावश्यक रूप से प्रदर्शनों से बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। 

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क्या थी याचिका?
अदालत अखिल भारतीय दलित ईसाई अधिकार संरक्षण समिति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में दिल्ली पुलिस को जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने का निर्देश मांगा गया था। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने बताया कि अधिकतम 75 लोग प्रदर्शन में शामिल होंगे और पुलिस जुलाई से आवेदन पर कोई फैसला नहीं कर रही है।

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कोर्ट ने क्यों कहा बंद क्यों नहीं कर देते जंतर मंतर?
न्यायमूर्ति महाजन ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से पूछा, आप इसे बंद क्यों नहीं कर देते? मेरे अनुसार शहर के बीच में इस तरह की गतिविधियां नहीं होनी चाहिए। शहर को अनावश्यक रूप से क्यों बंधक बनाया जाए? उन्होंने कहा कि यह सरकार का फैसला है, लेकिन शहर को इस तरह परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

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15 अगस्त नजदीक, 75 लोग 75 हजार भी हो सकते हैं
एएसजी शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में पहले से ही सुनवाई कर रहा है कि जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल घोषित किया जाए या नहीं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में धारा 144 लागू है और 15 अगस्त नजदीक होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था सख्त है। उन्होंने आशंका जताई कि 75 लोग बाद में 75 हजार भी हो सकते हैं। 

लोकतांत्रिक अधिकारों की बात अलग
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग मामले में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को मान्यता दी है। न्यायमूर्ति महाजन ने जवाब दिया कि लोकतांत्रिक अधिकारों की बात अलग है, लेकिन शहर को बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। अदालत ने दिल्ली पुलिस को याचिकाकर्ता के आवेदन पर 8 अगस्त तक फैसला करने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।

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