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Delhi NCR News: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वर्ण मंदिर से गुरबानी प्रसारित करने पर निजी चैनल को रोकने से इनकार किया
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की उस याचिका पर अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया, जिसमें एक निजी टेलीविजन चैनल को स्वर्ण मंदिर (श्री हरमंदिर साहिब) से गुरबानी के प्रसारण या पुनर्प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की गई थी। एसजीपीसी और पीटीसी चैनल ने गैलेक्टिक टेलीविजन एंड कम्युनिकेशंस के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अदालत का रुख किया था। एसजीपीसी का तर्क था कि स्वर्ण मंदिर से गुरबानी के प्रसारण का कॉपीराइट उसके पास है और गैलेक्टिक टेलीविजन द्वारा 10 सेकंड की देरी के साथ इसे प्रसारित करना उसके अधिकारों का उल्लंघन है। वर्तमान में यह गुरबानी एसजीपीसी के यूट्यूब चैनल और पीटीसी पर प्रसारित होती है। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने प्राथमिक दृष्टि से कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब एक साहित्यिक रचना है। यदि एसजीपीसी द्वारा इसका प्रसारण वास्तविक धार्मिक समारोह के लिए किया जाता है और व्यावसायिक उपयोग नहीं होता, तो यह कॉपीराइट उल्लंघन नहीं माना जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की, “यह साहित्यिक और संगीत रचना है। आप गुरबानी का पाठ संगीत प्रदर्शन के रूप में करते हैं। गुरु ग्रंथ साहिब नामक साहित्यिक रचना को संगीत के रूप में गाया जाता है। यदि इसका उपयोग सद्भावनापूर्ण धार्मिक समारोह के लिए होता है, तो यह उल्लंघन नहीं है।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की उस याचिका पर अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया, जिसमें एक निजी टेलीविजन चैनल को स्वर्ण मंदिर (श्री हरमंदिर साहिब) से गुरबानी के प्रसारण या पुनर्प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की गई थी। एसजीपीसी और पीटीसी चैनल ने गैलेक्टिक टेलीविजन एंड कम्युनिकेशंस के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अदालत का रुख किया था। एसजीपीसी का तर्क था कि स्वर्ण मंदिर से गुरबानी के प्रसारण का कॉपीराइट उसके पास है और गैलेक्टिक टेलीविजन द्वारा 10 सेकंड की देरी के साथ इसे प्रसारित करना उसके अधिकारों का उल्लंघन है। वर्तमान में यह गुरबानी एसजीपीसी के यूट्यूब चैनल और पीटीसी पर प्रसारित होती है। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने प्राथमिक दृष्टि से कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब एक साहित्यिक रचना है। यदि एसजीपीसी द्वारा इसका प्रसारण वास्तविक धार्मिक समारोह के लिए किया जाता है और व्यावसायिक उपयोग नहीं होता, तो यह कॉपीराइट उल्लंघन नहीं माना जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की, “यह साहित्यिक और संगीत रचना है। आप गुरबानी का पाठ संगीत प्रदर्शन के रूप में करते हैं। गुरु ग्रंथ साहिब नामक साहित्यिक रचना को संगीत के रूप में गाया जाता है। यदि इसका उपयोग सद्भावनापूर्ण धार्मिक समारोह के लिए होता है, तो यह उल्लंघन नहीं है।