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Delhi NCR News: सोशल मीडिया पर बढ़ती तुलना की प्रवृत्ति युवाओं में बढ़ा रही तनाव और चिंता
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। सोशल मीडिया का बढ़ता उपयोग युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। घंटों तक सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना और दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करना तनाव, चिंता और आत्मविश्वास में कमी का कारण बन सकता है। इसका प्रभाव न केवल मानसिक स्वास्थ्य बल्कि पढ़ाई, कामकाज और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर अक्सर लोगों की सफलता, जीवनशैली और उपलब्धियों की तस्वीरें सामने आती हैं। इन्हें देखकर कई युवा खुद को कमतर आंकने लगते हैं, जिससे मानसिक दबाव बढ़ सकता है। वहीं अत्यधिक स्क्रीन टाइम और देर रात तक मोबाइल के इस्तेमाल से नींद प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।
मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान की मनोचिकित्सक डॉ. अपर्णा गोयल ने कहा कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग तनाव, चिंता और आत्मविश्वास में कमी का कारण बन सकता है। लगातार ऑनलाइन रहने और दूसरों से तुलना करने की आदत मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्क्रीन टाइम सीमित रखने, पर्याप्त नींद लेने और खेलकूद व सामाजिक गतिविधियों में अधिक भागीदारी करने की जरूरत है।
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सोशल मीडिया का असर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा
लगातार सोशल मीडिया पर समय बिताने से तनाव और चिंता बढ़ सकती है।
-दूसरों की उपलब्धियों और जीवनशैली से तुलना करने पर आत्मविश्वास में कमी आ सकती है।
-अत्यधिक स्क्रीन टाइम नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
-देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने से चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी हो सकती है।
-संतुलित उपयोग, पर्याप्त नींद और ऑफलाइन गतिविधियां मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करती हैं।
नई दिल्ली। सोशल मीडिया का बढ़ता उपयोग युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। घंटों तक सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना और दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करना तनाव, चिंता और आत्मविश्वास में कमी का कारण बन सकता है। इसका प्रभाव न केवल मानसिक स्वास्थ्य बल्कि पढ़ाई, कामकाज और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर अक्सर लोगों की सफलता, जीवनशैली और उपलब्धियों की तस्वीरें सामने आती हैं। इन्हें देखकर कई युवा खुद को कमतर आंकने लगते हैं, जिससे मानसिक दबाव बढ़ सकता है। वहीं अत्यधिक स्क्रीन टाइम और देर रात तक मोबाइल के इस्तेमाल से नींद प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।
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मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान की मनोचिकित्सक डॉ. अपर्णा गोयल ने कहा कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग तनाव, चिंता और आत्मविश्वास में कमी का कारण बन सकता है। लगातार ऑनलाइन रहने और दूसरों से तुलना करने की आदत मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्क्रीन टाइम सीमित रखने, पर्याप्त नींद लेने और खेलकूद व सामाजिक गतिविधियों में अधिक भागीदारी करने की जरूरत है।
सोशल मीडिया का असर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा
लगातार सोशल मीडिया पर समय बिताने से तनाव और चिंता बढ़ सकती है।
-दूसरों की उपलब्धियों और जीवनशैली से तुलना करने पर आत्मविश्वास में कमी आ सकती है।
-अत्यधिक स्क्रीन टाइम नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
-देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने से चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी हो सकती है।
-संतुलित उपयोग, पर्याप्त नींद और ऑफलाइन गतिविधियां मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करती हैं।