सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The High Court has sought a response from the Centre on the lack of a law similar to the old Section 377 in the BNS.

Delhi NCR News: बीएनएस में पुरानी धारा 377 जैसे कानून की कमी पर हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Mar 2026 08:55 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
- अदालत ने केंद्र सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अपराध की व्याख्या करने वाले कानून में इस प्रकार की खामी नहीं होनी चाहिए
Trending Videos

- कानून लागू होने के डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी इस तरफ कोई काम नहीं किया गया

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में गैर-सहमति वाले अप्राकृतिक यौन संबंधों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में पुरानी धारा 377 जैसा प्रावधान शामिल करने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) को बहाल कर दिया। अदालत ने केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई फैसला न होने पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी निर्णय कहीं नजर नहीं आ रहा।


मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने वकील गंतव्य गुलाटी की याचिका को अगस्त 2024 में निस्तारित करने के बाद बहाल करते हुए कहा, 28 अगस्त 2024 को अदालत ने प्रतिनिधित्व पर विचार करने और फैसला लेने का निर्देश दिया था। डेढ़ साल बाद भी निर्णय नहीं हो सका है। इसलिए याचिका को मूल संख्या पर बहाल किया जाता है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि नई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुई और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह ले चुकी है, में आईपीसी की धारा 377 के समकक्ष कोई प्रावधान नहीं है। धारा 377 वयस्कों के बीच गैर-सहमति वाले अप्राकृतिक यौन संबंधों, नाबालिगों के साथ यौन कृत्यों और पशुता को दंडित करती थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद धारा 377 ने केवल सहमति वाले समलैंगिक संबंधों को अपराधमुक्त किया था, लेकिन गैर-सहमति वाले कृत्यों को अपराध बनाए रखा था। याचिका में कहा गया है कि बीएनएस में इस प्रावधान की अनुपस्थिति से कानूनी सुरक्षा में गंभीर खालीपन पैदा हो गया है, जो विशेष रूप से एलजीबीटीक्यू समुदाय को प्रभावित कर रहा है। ऐसे मामलों में पीड़ितों को आपराधिक उपचार नहीं मिल पा रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन



अदालत ने केंद्र सरकार से चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया, जिसमें 28 अगस्त 2024 के आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण हो। केंद्र की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह संवेदनशील मुद्दा है और विभिन्न हितधारकों से राय मांगी गई है। अदालत ने मामले को मई में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article