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Delhi NCR News: नाटक ‘झड़पें’ ने परिवार के अनकहे दर्द को मंच पर किया जीवंत
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नई दिल्ली। परिवार में होने वाली छोटी-छोटी नोकझोंक कई बार वर्षों से दबे दर्द और अनकहे रिश्तों की परतें खोल देती हैं। इन्हीं भावनात्मक उलझनों को संवेदनशीलता के साथ मंच पर जीवंत किया नाटक ‘झड़पें’ ने, जिसका मंचन सोमवार शाम इंडिया हैबिटेट सेंटर के द थिएटर में किया गया। कैथरीन हेज के चर्चित नाटक पर आधारित इस हिंदी प्रस्तुति का निर्देशन केवल अरोड़ा ने किया, जबकि निर्माण गंधर्व देवान ने किया।
करीब 100 मिनट का यह नाटक दो बहनों के इर्द-गिर्द घूमता है, जो वृद्ध माता-पिता की देखभाल करते हुए जिम्मेदारियों, रिश्तों और वर्षों से जमा भावनाओं से जूझती हैं। सामान्य बहसें धीरे-धीरे पुराने मतभेदों और अधूरी शिकायतों की जटिल परतें उजागर करती हैं। नाटक ने दिखाया कि किसी प्रियजन की देखभाल सेवा के साथ भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण अनुभव भी हो सकता है।
शालिनी बक्सी, श्वेता पासरीचा, हर्षिणी मिश्रा और चिशा कपूर ने सशक्त अभिनय से पात्रों की मनः स्थितियों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया। एक घर की पृष्ठभूमि पर आधारित यह प्रस्तुति भव्य मंच सज्जा के बजाय अभिनय और संवादों की ताकत पर टिकी रही। अंत में दर्शकों ने कलाकारों को तालियों से सराहा। संवाद
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करीब 100 मिनट का यह नाटक दो बहनों के इर्द-गिर्द घूमता है, जो वृद्ध माता-पिता की देखभाल करते हुए जिम्मेदारियों, रिश्तों और वर्षों से जमा भावनाओं से जूझती हैं। सामान्य बहसें धीरे-धीरे पुराने मतभेदों और अधूरी शिकायतों की जटिल परतें उजागर करती हैं। नाटक ने दिखाया कि किसी प्रियजन की देखभाल सेवा के साथ भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण अनुभव भी हो सकता है।
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शालिनी बक्सी, श्वेता पासरीचा, हर्षिणी मिश्रा और चिशा कपूर ने सशक्त अभिनय से पात्रों की मनः स्थितियों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया। एक घर की पृष्ठभूमि पर आधारित यह प्रस्तुति भव्य मंच सज्जा के बजाय अभिनय और संवादों की ताकत पर टिकी रही। अंत में दर्शकों ने कलाकारों को तालियों से सराहा। संवाद
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