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Delhi NCR News: पेट्रोल पंप के खाते से कालेधन को करते थे सफेद, दो गिरफ्तार
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। व्हाट्सऐप इन्वेस्टमेंट स्कैम की ठगी का खुलासा हुआ है। गिरोह ठगी के पैसे को सफेद बनाने के लिए पेट्रोल पंप के मर्चेंट अकाउंट का इस्तेमाल कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, पेट्रोल पंप कर्मी प्रदीप कुमार दुबे इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी था। ठगी से हासिल रकम पहले अलग-अलग म्यूल अकाउंट्स में डाली जाती थी। इसके बाद यह पैसा पेट्रोल पंप के मर्चेंट अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता था। इस तरीके से डिजिटल ट्रांजैक्शन को कैश में बदलकर मनी ट्रेल को तोड़ देता था, इससे जांच एजेंसियों के लिए असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। पूर्वी दिल्ली की साइबर पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही इसका लिंक देशभर में फैले करीब 68 लाख के साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े होने का खुलासा भी किया है।
कैसे हुआ फ्रॉड : पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार ने बताया, कि मंडावली निवासी सुमित कुमार को व्हाट्सऐप पर ईशिता प्रज्ञा नाम की महिला ने संपर्क किया, जिसने खुद को एलारा कैपिटल इन्वेस्टमेंट कंपनी की प्रतिनिधि बताया। उसने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर मोटा मुनाफा देने का लालच दिया। झांसे में आकर पीड़ित ने अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए करीब एक लाख 60 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दी। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम का एक हिस्सा चंडीगढ़ के एक खाते में ट्रांसफर किया गया, जहां से एटीएम के जरिये निकासी हुई। लगातार तकनीकी निगरानी और फील्ड वेरिफिकेशन के बाद पुलिस ने आरोपियों तक पहुंच बनाई। इस दौरान पुलिस टीम ने 25 वर्षीय गुरिंदर शर्मा और 31 वर्षीय प्रदीप कुमार दुबे को गिरफ्तार किया है, जो कि चंडीगढ़ के रहने वाले हैं।
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देशभर में फैला कनेक्शन : जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में सक्रिय था। टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी ठगों से भी इनके संपर्क होने के संकेत मिले हैं। वहीं, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन और तीन बैंक पासबुक बरामद किए हैं, जिनसे कई अहम सुराग मिले हैं। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
