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विश्वविद्यालय नहीं रोक सकते शांतिपूर्ण प्रदर्शन और भाषण : हाईकोर्ट
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- जो विश्वविद्यालय केवल आज्ञाकारिता स्वीकारेंगे शैक्षणिक भूमिका में रहेंगे विफल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (एयूडी) के एक छात्र का निलंबन रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि प्रबंधन की विचारधारा से मेल न खाने वाले विचारों या शांतिपूर्ण प्रदर्शन के कारण भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक नहीं लगाई जा सकती। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने अपने आदेश में जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय को ऐसे माहौल का निर्माण करना चाहिए जहां छात्र अकादमिक या सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा में स्वतंत्र रूप से भाग ले सकें। शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अहिंसक असहमति ऐसे वातावरण का स्वाभाविक हिस्सा हैं। न्यायमूर्ति सिंह ने टिप्पणी की, जो विश्वविद्यालय केवल आज्ञाकारिता स्वीकार करता है, वह अपनी व्यापक शैक्षणिक भूमिका में विफल रहता है। विश्वविद्यालय केवल कक्षाओं में जाने और पाठ्यक्रम पूरा करने का स्थान नहीं है, बल्कि वह जगह है जहां छात्र स्वतंत्र चिंतन, प्रश्न पूछने की क्षमता और आलोचनात्मक सोच विकसित करें। मामले में छात्र ने विश्वविद्यालय के निलंबन आदेश को चुनौती दी थी, जिसे अदालत ने असंगत और असंवैधानिक करार दिया। अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए और केवल अनुपालन की मांग नहीं करनी चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (एयूडी) के एक छात्र का निलंबन रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि प्रबंधन की विचारधारा से मेल न खाने वाले विचारों या शांतिपूर्ण प्रदर्शन के कारण भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक नहीं लगाई जा सकती। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने अपने आदेश में जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय को ऐसे माहौल का निर्माण करना चाहिए जहां छात्र अकादमिक या सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा में स्वतंत्र रूप से भाग ले सकें। शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अहिंसक असहमति ऐसे वातावरण का स्वाभाविक हिस्सा हैं। न्यायमूर्ति सिंह ने टिप्पणी की, जो विश्वविद्यालय केवल आज्ञाकारिता स्वीकार करता है, वह अपनी व्यापक शैक्षणिक भूमिका में विफल रहता है। विश्वविद्यालय केवल कक्षाओं में जाने और पाठ्यक्रम पूरा करने का स्थान नहीं है, बल्कि वह जगह है जहां छात्र स्वतंत्र चिंतन, प्रश्न पूछने की क्षमता और आलोचनात्मक सोच विकसित करें। मामले में छात्र ने विश्वविद्यालय के निलंबन आदेश को चुनौती दी थी, जिसे अदालत ने असंगत और असंवैधानिक करार दिया। अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए और केवल अनुपालन की मांग नहीं करनी चाहिए।