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Air Turbulence: हवाई हलचल के जख्म अब भी हैं ताजा, स्थिर हालत में बिना सर्जरी जारी है चार घायलों का इलाज

Thu, 06 Aug 2026 03:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 06 Aug 2026 03:26 AM IST
सार

हादसे में गंभीर रूप से घायल सात यात्रियों और केबिन क्रू सदस्यों में से चार का इलाज अब भी वसंतकुंज के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। सभी को रीढ़, गर्दन, पीठ, कंधों और हाथों में गंभीर चोटें आई हैं।

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Wounds from air turbulence still fresh; treatment continues for four affected individuals.
demo pic - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में मंगलवार को आए भीषण टर्बुलेंस के जख्म अभी भी ताजा हैं। हादसे में गंभीर रूप से घायल सात यात्रियों और केबिन क्रू सदस्यों में से चार का इलाज अब भी वसंतकुंज के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। सभी को रीढ़, गर्दन, पीठ, कंधों और हाथों में गंभीर चोटें आई हैं। राहत की बात यह है कि फिलहाल सभी की हालत स्थिर है और डॉक्टर बिना सर्जरी के उनका उपचार कर रहे हैं।

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अस्पताल प्रशासन के अनुसार चारों मरीज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में हैं। ऑर्थोपेडिक्स, न्यूरोसर्जरी, क्रिटिकल केयर और अन्य विभागों की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रख रही है। डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल किसी मरीज को ऑपरेशन की जरूरत नहीं है, लेकिन चोटों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें अस्पताल में निगरानी में रखा गया है। अस्पताल के मुताबिक 27 वर्षीय मानसी की गर्दन और पीठ के निचले हिस्से में गंभीर चोट लगी है। वह पूरी तरह होश में हैं और उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। एक अन्य स्वास्थ्य समस्या को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लिया गया है। यदि उनकी स्थिति सामान्य बनी रहती है तो उन्हें जल्द छुट्टी दी जा सकती है।
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22 वर्षीय खावला मोहम्मद सलीम की रीढ़ की हड्डी में चोट आई है। उन्हें स्पाइनल सपोर्ट और रिहैबिलिटेशन के साथ बिना सर्जरी के इलाज दिया जा रहा है। डॉक्टर लगातार उनकी रिकवरी की निगरानी कर रहे हैं। वहीं, 33 वर्षीय तान्या की गर्दन, पीठ, कंधों और हाथों में गंभीर चोटें हैं। उनकी न्यूरोलॉजिकल जांच जारी है और रीढ़ को स्थिर रखने के लिए विशेष उपचार दिया जा रहा है। 28 वर्षीय चिंकी सुरेंद्र सिंह की पीठ के निचले हिस्से में चोट लगी है। पेट संबंधी शिकायतों के कारण विशेषज्ञ टीम उनकी अतिरिक्त जांच भी कर रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार चारों मरीजों की हालत स्थिर है, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ होने तक लगातार निगरानी और उपचार जारी रहेगा।
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पूरे विमान में था दहशत का माहौल
यात्रियों ने इसे अपनी जिंदगी का सबसे भयावह अनुभव बताया। उनका कहना है कि अचानक विमान में इतने तेज झटके लगे कि कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। कई लोग अपनी सीटों से उछल गए। एक घायल यात्री की बेटी पलक रानीवाला ने बताया कि उनके पिता टर्बुलेंस के दौरान सीट से उछलकर विमान की छत से टकरा गए, जबकि उनकी मां की पसलियों में फ्रैक्चर हो गया। उन्होंने बताया कि पूरे विमान में दहशत का माहौल था। फ्लाइट अटेंडेंट लगातार यात्रियों से सीट बेल्ट बांधे रखने की अपील कर रहे थे और पायलट भी लगातार स्थिति की जानकारी दे रहे थे।

गंभीर हवाई झटके जानलेवा हो सकते हैं, डीजीसीए जांच करे : एविएशन विशेषज्ञ
एविएशन विशेषज्ञ कैप्टन प्रशांत ढल्ला बताते हैं कि यह बेहद गंभीर घटना है और इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार टर्बुलेंस चार प्रकार का होता है-हल्का, मध्यम, तेज और गंभीर। गंभीर टर्बुलेंस की स्थिति में विमान का ऑटोपायलट सिस्टम भी स्वत: बंद हो सकता है, जिससे विमान को नियंत्रित करना पायलट के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। यदि यात्री सीट बेल्ट नहीं लगाए हों तो गंभीर चोट या जान का खतरा भी हो सकता है। उन्होंने डीजीसीए से पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है

सोशल मीडिया पर भी टर्बुलेंस छाया रहा
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि क्लियर एयर टर्बुलेंस पूरी तरह अप्रत्याशित होती है और इसका विमान की तकनीकी खराबी से सीधा संबंध नहीं होता। खुद को केबिन क्रू सदस्य बताने वाले एक यूजर ने लिखा कि ऐसी स्थिति किसी भी एयरलाइन की किसी भी उड़ान में हो सकती है। कई लोगों ने यात्रियों को सलाह दी कि सीट बेल्ट का संकेत बंद होने के बाद भी सुरक्षा के लिए सीट बेल्ट लगाए रखें। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि टर्बुलेंस का सबसे बड़ा कारण मौसम और वायुमंडलीय परिस्थितियां होती हैं।


मानसून में बढ़ जाता है टर्बुलेंस का खतरा
फुकेट से दिल्ली आने वाली उड़ान अंडमान सागर, बंगाल की खाड़ी, ओडिशा तट और मध्य भारत के ऊपर से गुजरती है। अगस्त में मानसून चरम पर होने के कारण इस पूरे क्षेत्र में संवहनी गतिविधियां तेज रहती हैं। बंगाल की खाड़ी से उठने वाली गर्म और नम हवा विशाल तूफानी बादलों का निर्माण करती है। इन बादलों के आसपास हवा की दिशा और गति में अचानक बदलाव होता है, जिससे विमान को तेज हवाई झटके लग सकते हैं। यही वजह है कि मानसून के दौरान इस रूट पर टर्बुलेंस की आशंका सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है।

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