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CJP Protest: प्रोटेस्ट आर्ट गैलरी बना जंतर-मंतर, एआई और मीम कल्चर के दौर में छात्रों ने ब्रश से लिखी बगावत
Thu, 23 Jul 2026 02:32 PM IST
Sharukh Khan
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 23 Jul 2026 02:32 PM IST
सार
CJP Protest: दिल्ली में जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ अजीबोगरीब विरोध भी देखने को मिला। छात्रों ने ओपन-एयर प्रोटेस्ट गैलरी बनाई। पेंटब्रश, मीम्स और कॉस्प्ले के जरिए सरकार पर व्यंग्य बरसे। ''यह पैड भी लीक नहीं होता'' ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा।
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एआई और मीम कल्चर के दौर में छात्रों ने लिखी बगावत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नारे, भाषण और धरने तो हर आंदोलन का हिस्सा होते हैं, लेकिन इस बार जंतर-मंतर पर विरोध की सबसे बुलंद आवाज रंगों, रेखाओं और रचनात्मकता से निकली। कथित परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने पेंटब्रश, पोस्टर, मीम्स, कॉस्प्ले और पॉप कल्चर के सहारे अपने आंदोलन को एक ओपन-एयर ''प्रोटेस्ट आर्ट गैलरी'' में बदल दिया। डिजिटल स्क्रीन से ज्यादा भरोसा हाथों से बनी कलाकृतियों पर जताया गया।
सबसे ज्यादा ध्यान एक सैनिटरी नैपकिन पर लिखे संदेश यह पैड भी लीक नहीं होता ने खींचा, जिसने कथित पेपर लीक पर तीखा व्यंग्य किया। वहीं, महात्मा गांधी के तीन बंदरों को नए अंदाज में पेश कर कटाक्ष किया गया। एक की आंखों पर पट्टी, दूसरे के मुंह पर ताला और तीसरे के कानों में तेल से संदेश दिया कि चोट पर पट्टी लगाओ, आंखों पर नहीं, ताला दरवाजे पर लगाओ, मुंह पर नहीं और तेल बालों में डालो, कानों में नहीं।
विरोध में इतिहास और समकालीन संस्कृति का अनोखा संगम भी दिखा। चे ग्वेरा और डॉ. भीमराव आंबेडकर की हस्तनिर्मित तस्वीरों के साथ कई प्रदर्शनकारी गांधी के वेश में पहुंचे। एक प्रस्तुति में गांधी की आंखों से खून जैसे आंसू बहते दिखाकर मौजूदा हालात पर प्रतीकात्मक टिप्पणी की गई।
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सबसे ज्यादा ध्यान एक सैनिटरी नैपकिन पर लिखे संदेश यह पैड भी लीक नहीं होता ने खींचा, जिसने कथित पेपर लीक पर तीखा व्यंग्य किया। वहीं, महात्मा गांधी के तीन बंदरों को नए अंदाज में पेश कर कटाक्ष किया गया। एक की आंखों पर पट्टी, दूसरे के मुंह पर ताला और तीसरे के कानों में तेल से संदेश दिया कि चोट पर पट्टी लगाओ, आंखों पर नहीं, ताला दरवाजे पर लगाओ, मुंह पर नहीं और तेल बालों में डालो, कानों में नहीं।
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विरोध में इतिहास और समकालीन संस्कृति का अनोखा संगम भी दिखा। चे ग्वेरा और डॉ. भीमराव आंबेडकर की हस्तनिर्मित तस्वीरों के साथ कई प्रदर्शनकारी गांधी के वेश में पहुंचे। एक प्रस्तुति में गांधी की आंखों से खून जैसे आंसू बहते दिखाकर मौजूदा हालात पर प्रतीकात्मक टिप्पणी की गई।
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बॉलीवुड और इंटरनेट संस्कृति भी आंदोलन की भाषा बनी
बॉलीवुड और इंटरनेट संस्कृति भी आंदोलन की भाषा बनी। गोलमाल 3 के लोकप्रिय संवाद को बदलकर जल्दी इस्तीफा दो, सुबह पनवेल जाना है लिखा गया, जबकि एक अन्य पोस्टर में फिल्म तू झूठी मैं मक्कार के शीर्षक के जरिए राजनीतिक व्यंग्य किया गया। एक पोस्टर में भारत के नक्शे को चाय में डुबोए जा रहे बिस्किट की तरह दर्शाया गया।
बॉलीवुड और इंटरनेट संस्कृति भी आंदोलन की भाषा बनी। गोलमाल 3 के लोकप्रिय संवाद को बदलकर जल्दी इस्तीफा दो, सुबह पनवेल जाना है लिखा गया, जबकि एक अन्य पोस्टर में फिल्म तू झूठी मैं मक्कार के शीर्षक के जरिए राजनीतिक व्यंग्य किया गया। एक पोस्टर में भारत के नक्शे को चाय में डुबोए जा रहे बिस्किट की तरह दर्शाया गया।
इसे बनाने वाले प्रदर्शनकारी हार्दिक ने कहा कि उनका उद्देश्य देश की मौजूदा स्थिति पर अपनी चिंता को कलात्मक रूप से व्यक्त करना था। दूसरी ओर, जापानी एनीमे वन पीस के स्ट्रॉहैट पाइरेट प्रतीक वाले स्कार्फ के साथ पहुंची शिवांगी ने इसे खतरे की चेतावनी बताते हुए कहा कि यह दिखाने का तरीका है कि कुछ गंभीर रूप से गलत हो रहा है।
रचनात्मक अभिव्यक्तियां कर रही लोगों का ध्यान आकर्षित
आंदोलन के बीच हास्य भी कम नहीं है। एक पोस्टर पर लिखा है कि हालात इतने बुरे हैं कि इंट्रोवर्ट भी यहां आ गए हैं, जबकि दूसरे में आंदोलन के समर्थन में कॉकरोच का कार्टून बनाया गया था। जंतर-मंतर तक सीमित न रहकर यह रचनात्मक विरोध सोशल मीडिया पर भी छा गया।
आंदोलन के बीच हास्य भी कम नहीं है। एक पोस्टर पर लिखा है कि हालात इतने बुरे हैं कि इंट्रोवर्ट भी यहां आ गए हैं, जबकि दूसरे में आंदोलन के समर्थन में कॉकरोच का कार्टून बनाया गया था। जंतर-मंतर तक सीमित न रहकर यह रचनात्मक विरोध सोशल मीडिया पर भी छा गया।
संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भाग-दौड़ के वीडियो को लोकप्रिय गेम सबवे सर्फर्स की शैली में एडिट कर व्यापक रूप से साझा किया गया, जिससे आंदोलन को डिजिटल दुनिया में भी नई पहचान मिली। जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना और उनकी रचनात्मक अभिव्यक्तियां लगातार लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।