{"_id":"6a8394786af16bac360098f3","slug":"water-scarcity-will-be-a-major-challenge-in-2047-1-600-mgd-of-water-will-be-required-in-delhi-2026-08-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi: 2047 में पानी की कमी होगी बड़ी चुनौती, 1600 एमजीडी पानी की होगी जरूरत, पड़ोसी राज्यों पर रहेगी निर्भरता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi: 2047 में पानी की कमी होगी बड़ी चुनौती, 1600 एमजीडी पानी की होगी जरूरत, पड़ोसी राज्यों पर रहेगी निर्भरता
Tue, 18 Aug 2026 04:39 AM IST
Digvijay Singh
विनोद डबास, अमर उजाला, दिल्ली
विनोद डबास, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 18 Aug 2026 04:39 AM IST
सार
दिल्ली की बढ़ती आबादी के लिए भविष्य में पर्याप्त पानी जुटाना बड़ी चुनौती बनने जा रहा है। मास्टर प्लान के अनुमान के मुताबिक 2047 तक दिल्ली की आबादी करीब 3.2 करोड़ हो जाएगी।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली की बढ़ती आबादी के लिए भविष्य में पर्याप्त पानी जुटाना बड़ी चुनौती बनने जा रहा है। मास्टर प्लान के अनुमान के मुताबिक 2047 तक दिल्ली की आबादी करीब 3.2 करोड़ हो जाएगी। इतनी बड़ी आबादी के लिए रोजाना 1600 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) पानी की जरूरत होगी। मौजूदा और प्रस्तावित स्रोतों से करीब 1401 एमजीडी पानी ही उपलब्ध हो सकेगा। ऐसे में करीब 199 एमजीडी की कमी रहेगी। इसे पूरा करने के लिए दिल्ली की निर्भरता पड़ोसी राज्यों से मिलने वाले पानी पर बनी रहेगी।
विज्ञापन
मास्टर प्लान में अगले दो दशकों में 401 एमजीडी अतिरिक्त पानी जुटाने की योजना है। पहले चरण में पल्ला क्षेत्र में 200 नए नलकूपों से 22 एमजीडी, जलाशयों और झीलों से भूजल व शोधित पानी के जरिए 23 एमजीडी और हिमाचल प्रदेश के यमुना जल के अप्रयुक्त हिस्से से 65 एमजीडी पानी जुटाने का प्रस्ताव है। इससे 110 एमजीडी पानी मिलेगा।
विज्ञापन
दूसरे चरण में हथिनीकुंड-ताजेवाला से सिंचाई के लिए आवंटित यमुना जल के हिस्से से करीब 16 एमजीडी और रेणुकाजी, लखवार व किशाऊ बांध परियोजनाओं से करीब 275 एमजीडी पानी मिलने का अनुमान है। इस चरण में 291 एमजीडी पानी उपलब्ध होगा।
विज्ञापन
यमुना में नालों के गिरने से रोकने की तैयारी
दिल्ली में यमुना में सीधे गिरने वाले 22 बड़े नालों में से 11 को रोका जा चुका है। बाकी नालों को रोकने और जहां सीवर बिछाना संभव नहीं है, वहां इंटरसेप्टर सीवर के जरिए गंदे पानी को शोधन संयंत्रों तक पहुंचाने की योजना है। अनधिकृत कॉलोनियों में भी सीवर नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। फिलहाल दिल्ली में करीब 792 एमजीडी सीवेज पैदा होता है, जिसमें 745 एमजीडी का उपचार किया जा रहा है। उपचारित पानी में से 117 एमजीडी का इस्तेमाल बागवानी, निर्माण और अन्य गैर-पेय कार्यों में हो रहा है। मास्टर प्लान-2047 में नए जल स्रोत जुटाने के साथ पानी की खपत घटाने, सीवेज के पुन: उपयोग और यमुना में प्रदूषण रोकने पर जोर दिया गया है।
वार्ड 87 में सीवर ओवरफ्लो और जलभराव से लोग परेशान
नई दिल्ली। पश्चिमी पटेल नगर के रंजीत नगर वार्ड 87 में सीवर ओवरफ्लो, खुले गटर और जलभराव की समस्या को लेकर एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष व आप नेता अंकुश नारंग ने सोमवार को जलमंत्री और दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि गंदे पानी और दुर्गंध से लोग परेशान हैं और स्वास्थ्य संबंधी खतरा बना हुआ है। नारंग ने सीवर की तत्काल सफाई, ओवरफ्लो रोकने, खुले गटर बंद करने और जलभराव की निकासी की मांग की। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा समस्या का स्थायी समाधान कराने की भी मांग की। ब्यूरो
जल शोधन और सीवेज क्षमता बढ़ेगी
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 1560 एमजीडी पंपिंग क्षमता विकसित करने का प्रस्ताव है। इरादत, द्वारका फेज-2, नजफगढ़ और छतरपुर में कुल 285 एमजीडी क्षमता के चार नए जल शोधन संयंत्र बनाए जाने हैं। 2047 में करीब 1280 एमजीडी सीवेज उत्पन्न होने का अनुमान है। इसके उपचार के लिए मौजूदा 814.26 एमजीडी क्षमता में 231 एमजीडी की वृद्धि और लैंड पूलिंग क्षेत्रों में 240 एमजीडी क्षमता के विकेंद्रीकृत संयंत्र प्रस्तावित हैं। इससे कुल उपचार क्षमता करीब 1285 एमजीडी करने का लक्ष्य है।
प्रति व्यक्ति खपत घटाने पर जोर
2047 में आबादी बढ़ने के बावजूद पानी की कुल जरूरत 1600 एमजीडी तक सीमित रखने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रति व्यक्ति पानी की खपत का मानक 60 से घटाकर 50 गैलन प्रतिदिन किया गया है। नए नियोजित क्षेत्रों में यह मानक 40 गैलन यानी करीब 180 लीटर प्रतिदिन होगा। इसमें घरेलू उपयोग के लिए 135 लीटर, व्यावसायिक व संस्थागत जरूरत के लिए 20 लीटर, अग्निशमन के लिए 2 लीटर और पाइपलाइन नुकसान के लिए 23 लीटर शामिल हैं। शौचालयों में उपचारित पानी के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जाएगा।