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यमुना का पानी अभी भी प्रदूषित: फीकल कोलीफॉर्म तय मानक से ज्यादा, बड़ी मात्रा में मिल रहा बिना ट्रीट किया सीवेज

संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 10 Mar 2026 04:46 AM IST
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सार

दिल्ली में बहने वाली यमुना नदी का पानी अब भी गंभीर रूप से प्रदूषित बना हुआ है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की हाल ही में जारी जनवरी और फरवरी की रिपोर्ट में नदी में फीकल कोलीफॉर्म और बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर काफी ज्यादा पाया गया है।

Yamuna water remains polluted Fecal coliform levels exceed established standards large quantities of untreated
यमुना - फोटो : X @ANI
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विस्तार

दिल्ली में बहने वाली यमुना नदी का पानी अब भी गंभीर रूप से प्रदूषित बना हुआ है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की हाल ही में जारी जनवरी और फरवरी की रिपोर्ट में नदी में फीकल कोलीफॉर्म और बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर काफी ज्यादा पाया गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि नदी में बड़ी मात्रा में बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज मिल रहा है।

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डीपीसीसी हर माह दिल्ली से होकर गुजरने वाली यमुना नदी के आठ अलग-अलग स्थानों से पानी के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता की जांच करता है। इन स्थानों में पल्ला, वजीराबाद, आईएसबीटी ब्रिज, आईटीओ ब्रिज, निजामुद्दीन ब्रिज, हिंडन कट, ओखला बैराज और असगरपुर (हरियाणा) शामिल हैं। जांच के दौरान पानी में बीओडी, घुली हुई ऑक्सीजन, केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी), पीएच और फीकल कोलीफॉर्म जैसे कई पैरामीटर मापे जाते हैं।
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जनवरी की रिपोर्ट के अनुसार, असगरपुर में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर 3,50,000 मोस्ट प्रोबेबल नंबर (एमपीएन) प्रति 100 मिलीलीटर तक पहुंच गया, जबकि इसकी अनुमानित सीमा 2,500 और वांछित स्तर 500 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर है। अलग-अलग स्थानों पर यह स्तर 3,300 से लेकर 2,20,000 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर तक दर्ज किया गया। केवल पल्ला ऐसा स्थान रहा जहां यह स्तर 2,700 एमपीएन के साथ निर्धारित सीमा के करीब पाया गया। जनवरी में बीओडी का स्तर भी 2.5 से 52 मिलीग्राम प्रति लीटर तक दर्ज किया गया, जबकि मानक के अनुसार यह अधिकतम 3 मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। इससे साफ है कि नदी में जैविक प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा है।

फरवरी की रिपोर्ट में कुछ सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन प्रदूषण अभी भी तय मानकों से कहीं ज्यादा है। फरवरी में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर 1,200 से 1,10,000 यूनिट प्रति 100 मिलीलीटर के बीच दर्ज किया गया, जबकि आईएसबीटी ब्रिज पर बीओडी 36 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जांच किए गए 35 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में से जनवरी में 13 प्लांट तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। फरवरी में भी कम से कम 12 एसटीपी फीकल कोलीफॉर्म के मानकों को पूरा नहीं कर सके। पर्यावरणविदों ने रिपोर्ट जारी होने में हुई देरी पर भी चिंता जताई है।

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