IIT Delhi: एआई आधारित मॉडल से जल प्रवाह का पूर्वानुमान अधिक भरोसेमंद, आईआईटी-डी अध्ययन में हुआ खुलासा
AI-Integrated Model: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के शोधकर्ताओं ने भारत की नदियों में जल प्रवाह की भविष्यवाणी के लिए AI-एकीकृत मॉडल का परीक्षण किया, जिसमें मॉडल ने पारंपरिक तरीकों की तुलना में बेहतर सटीकता दिखाई।
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IIT Delhi: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के शोधकर्ताओं ने भारत की नदियों में जल प्रवाह की भविष्यवाणी के पारंपरिक मॉडलों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के साथ मिलाकर परीक्षण किया। इसके परिणामस्वरूप 220 नदियों में से 208 नदियों में भविष्यवाणी की सटीकता में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया।
नदी के प्रवाह की सटीक जानकारी जल संसाधन प्रबंधन के लिए अत्यंत जरूरी है। इसका उपयोग सिंचाई की योजना बनाने, बाढ़ के जोखिम को कम करने और जलाशयों के संचालन में किया जाता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर और सुरक्षित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
एआई मदद से जल प्रवाह मॉडल की सटीकता बढ़ी
भानु मगोत्रा और मनबेंद्र सहारिया की टीम ने बताया कि बड़े स्तर पर बनाए गए जल प्रवाह (हाइड्रोलॉजिकल) मॉडल अक्सर छोटे क्षेत्रों में सही अनुमान नहीं दे पाते, जब तक कि उन्हें उस इलाके के अनुसार खास तरीके से एडजस्ट (अंशांकन) न किया जाए।
उन्होंने कहा कि ऐसा एडजस्ट करना बहुत समय और कंप्यूटर संसाधन मांगता है, और भारत जैसे जलवायु और भौगोलिक रूप से विविध देश में इसे करना काफी मुश्किल है।
कैलिब्रेशन का मतलब है मॉडल के परिणामों को वास्तविक दुनिया के मापे गए डेटा के साथ बेहतर तरीके से मिलाना या संतुलित करना।
वाटर रिसोर्सेज रिसर्च नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में दिखाया गया है कि एआई-एकीकृत तरीका पारंपरिक जल विज्ञान मॉडल के साथ मिलकर जल चक्र की भविष्यवाणी में लंबे समय से मौजूद समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है। शोधकर्ताओं ने यह जानकारी पीटीआई को दिए बयान में दी।
एआई और ILDAS के माध्यम से नदी प्रवाह का सुधार
शोधकर्ताओं ने इंडियन लैंड डेटा एसिमिलेशन सिस्टम (ILDAS) का इस्तेमाल करके नदी के प्रवाह को सही ढंग से मॉडल करने के लिए लॉन्ग शॉर्ट-टर्म मेमोरी (LSTM) न्यूरल नेटवर्क का उपयोग किया। LSTM एक प्रकार की कृत्रिम बुद्धिमत्ता है जो समय के साथ डेटा में पैटर्न पहचानने में बहुत प्रभावी है।
ILDAS का मुख्य उद्देश्य भारत में भूमि की सतह की स्थितियों जैसे वाष्पोत्सर्जन, मिट्टी की नमी, अपवाह और जल प्रवाह के लिए उच्च गुणवत्ता वाले और लंबे समय तक टिकने वाले अनुमान तैयार करना है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि एआई-एकीकृत मॉडल को जल शक्ति मंत्रालय के अधीन केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा भारत भर में बनाए गए 220 नदी गेज स्टेशनों से कम से कम दो दशकों के जल प्रवाह डेटा पर प्रशिक्षित किया गया था।