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IIT: आईआईटी एमटेक करिकुलम में बड़ा बदलाव, स्पेशलाइजेशन पर रहेगा फोकस; इंडस्ट्री और रिसर्च को देंगे प्राथमिकता

सीमा शर्मा Published by: शाहीन परवीन Updated Thu, 08 Jan 2026 02:08 PM IST
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सार

IIT Curriculum Revision: आईआईटी एमटेक पाठ्यक्रम को अब इंडस्ट्री की जरूरतों और रिसर्च को ध्यान में रखकर बदला जाएगा। IIT काउंसिल ने डुअल एमटेक और स्पेशलाइजेशन पर काम करने का प्रस्ताव पारित किया है।

IIT to Revamp M.Tech Curriculum to Align with Industry and Research Needs
IIT Delhi - फोटो : IIT Official
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विस्तार
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IIT Curriculum: सभी आईआईटी के एमटेक करिकुलम में बदलाव होगा। इसमें एमटेक में  स्पेशलाइजेशन विषय शामिल होंगे। जिसमें डुअल एमटेक (रिसर्च व इंडस्ट्री), मल्टीडिसिप्लिनरी एमटेक और ब्लेंडेड मोड एमटेक प्रोग्राम शामिल हैं। रोजगार को प्राथमिकता के आधार पर रखा जाएगा। सभी आईआईटी एमटेक में बदलाव के लिए साथ में काम करेंगे और एक साल में उसकी रिपोर्ट देंगे। इसमें इंडस्ट्री विशेषज्ञ भी शामिल होंगे, ताकि वे अपनी जरूरतों के आधार पर बदलाव करते हुए नए विषय शामिल कर सकें। खास बात यह है बदलाव मे एमटेक में इंडस्ट्री इंटर्नशिप को भी शामिल करना है।

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आईआईटी काउंसिल की अगस्त 2025 की बैठक में विभिन्न मुददों पर चर्चा हुई थी। उसके प्रस्तावों के मिनिटस पास हो गए हैं। इसके मुताबिक, आईआईटी नीति निर्धारण बैठक में सामने आया है, आईआईटी में बीटेक के बाद उम्मीदवार एमटेक में दाखिला नहीं लेना चाहते हैं। इसका सबसे प्रमुख कारण रोजगार की कमी और एमटेक में इंडस्ट्री इंटर्नशिप की अभाव है। इसके अलावा बीटेक के बाद एमटेक में उन्हें स्पेशलाइजेशन प्रोग्राम में उन्हें बेहतर विकल्प नहीं दिखता है।
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आईआईटी ग्रेजुएटस को एमटेक पाठयक्रमों से जोड़ने के लिए एमटेक पाठयक्रमों में बदलाव की जरूरत है। इसमें एमटेक पाठयक्रमों की वर्तमान स्थिति, उद्योग की उभरती आवश्यकताओं, प्रस्तावित सुधारों और आगे की रणनीतियों की रूपरेखा दी गई। इसके आधार पर, फैसला हुआ है कि सभी आईआईटी मिलकर एमटेक पाठयक्रम को रिडिजाइन पर काम करेंगे। इसके अलावा, बहुविषयक और मिश्रित-मोड एमटेक कार्यक्रमों के साथ-साथ उत्पाद-आधारित पाठ्यक्रमों शुरू करने की सिफारिश भी है, जिनमें शोध प्रकाशन अनिवार्य नहीं होते हैं।

एमटेक की सीट लगातार खाली:

एमटेक की सीट लगातार खाली रह रही हैं। वर्ष 2020-21 में एमटेक में 3,229 सीट, तो वर्ष 2021=22 में 3,083 सीट खाली रह गई हैं। इसका असर, सीधा पीएचडी पाठयक्रमों पर भी पड़ा है। वर्ष 2020 में पीएचडी में 1,779 तो वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 1,852 था। इसका प्रमुख कारण आईआईटी में उन्नत और अनुसंधान कार्यक्रमों में रिक्तियां हैं।

डयूल एमटेक में इंडस्ट्री और रिसर्च का विकल्प:

आईआईटी सिफारिश में डयूल एमटेक पर काम होगा। इसमें इंडस्ट्री और रिसर्च के आधार पर नए स्पेशलाइजेशन कोर्स होंगे। इंडस्ट्री में आधुनिक इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों, प्रस्तावित सुधार और रिसर्च में राष्ट्रीय रिसर्च लक्ष्यों और प्राइवेट सेक्टर की मांगों के साथ बेहतर ढंग से जोड़ना शामिल है। मल्टीडिसिप्लिनरी एमटेक और ब्लेंडेड मोड एमटेक के अलावा प्रोडक्ट आधारित एमटेक प्रोग्राम शुरू करने का विचार है, जिसमें पेपर पब्लिश करने की ज़रूरत न हो।

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