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इतिहास के पन्नों से: 38 साल पहले अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे थे राकेश शर्मा, तब पीएम ने पूछा था- वहां से कैसा दिखता है भारत?

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Sat, 02 Apr 2022 02:40 PM IST
सार

First Indian Cosmonaut IAF Pilot Rakesh Sharma: 38 वर्ष पूर्व का एक ऐसा ही प्रसंग है जो आज भी हर भारतवासी को गौरवान्वित महसूस कराता है। वह दिन है- दो अप्रैल, 1984 का जब वायुसेना के पायलट विंग कमांडर राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष की दुनिया में अपना कदम रखा था।

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When PM Indira Gandhi asked to Cosmonaut Rakesh Sharma that Upar se Bharat kaisa dikhta hai?
भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री विंग कमांडर राकेश शर्मा - फोटो : सोशल मीडिया

कभी-कभी इतिहास के पन्ने पलटना अच्छा माना जाता है। खासकर जब हम अपने गौरवशाली अतीत का स्मरण करते हैं और उससे जुड़ी जानकारियां और गाथाओं को हमारी नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करते हैं। ताकि वे भी अतीत के उन संस्मरण को याद रख सकें और ताउम्र उनसे प्रेरणा ले सकें। 38 वर्ष पूर्व का एक ऐसा ही प्रसंग है जो आज भी हर भारतवासी को गौरवान्वित महसूस कराता है।


वह दिन है- दो अप्रैल, 1984 का जब वायुसेना के पायलट विंग कमांडर (तत्कालीन स्क्वाड्रन लीडर) राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष की दुनिया में अपना कदम रखा था। शर्मा भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बने थे। तब हम अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में अनाड़ी समझे जाते थे, लेकिन इन 38 सालों में हम खिलाड़ी बन चुके हैं। पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से लेकर पहला मंगलयान भेजने तक का सफर और अब गगनयान की तैयारी इसकी गवाह है। 
 

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Rakesh Sharma - फोटो : facebook/Tabasco Tongue

रोचक किस्सा : जब मैडम प्राइम मिनिस्टर ने पूछा ये सवाल

38 साल पहले जब तत्कालीन स्क्वाड्रन लीडर (अब विंग कमांडर) राकेश शर्मा बतौर भारतीय अंतरिक्ष यात्री, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में थे तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनसे बातचीत की थी। उस दौरान पीएम इंदिरा ने शर्मा से कई सवाल पूछे थे। उनमें से एक रोचक सवाल था कि ऊपर यानी अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है? तो इस पर शर्मा ने भी शानदार जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मैं बेहिचक यह कह सकता हूं कि सारे जहां से अच्छा ...। यह शब्द आज भी प्रत्येक देशवासी को गौरवान्वित महसूस कराते हैं। राकेश शर्मा, जब अंतिरक्ष यात्रा पर गए थे, तब भारत आज के मुकाबले सक्षम नहीं था, लेकिन देश का इरादा मजबूत था।
 

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राकेश शर्मा - फोटो : Twitte

दो रूसी एस्ट्रोनॉट भी थे साथ, कई रिसर्च किए

विंग कमांडर शर्मा, सोवियत संघ (अब रूस) के सोयुज टी-11 मिशन यान से अंतरिक्ष में गए थे। यह अभियान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और सोवियत इंटर कॉस्मॉस का संयुक्त स्पेस कार्यक्रम था। शर्मा ने दो रूसी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतरिक्ष में सात दिन, 21 घंटे और 40 मिनट बिताए। इस दौरान न केवल उन्होंने वहां पर रिसर्च पूरा किया बल्कि देश की अंतरिक्ष कार्यक्रमों को एक नया आयाम देने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने मिशन के दौरान बायोमेडिसिन और रिमोट-सेंसिंग को लेकर वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन का काम सौंपा गया था। इसके लिए उन्होंने 43 प्रैक्टिकल सेशन किए। 

 

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चंद्रयान-2, भारत का मिशन चांद - फोटो : Amar Ujala Graphics

अंतरिक्ष की दुनिया में आगे बढ़ निकला भारत

बीते चार दशक में भारत की अंतरिक्ष यात्रा काफी आगे निकल चुकी है। 2014 में भारत ने अपने पहले ही प्रयास मंगलयान को मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचाने में सफलता हासिल की थी। वह भी सबसे कम खर्च के साथ और तकनीकी तौर पर गुणवत्ता ऐसी की मंगलयान अपनी अवधि पूरी होने जाने के बावजूद लगातार काम कर रहा है। चंद्रयान मिशन के मुकाबले मिशन मंगल की सफलता बहुत बड़ी उपलब्धि है। अब इसरो अपने सबसे महत्वाकांक्षी मिशन गगनयान की तैयारी में जुटा है। हालांकि, कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन जैसे हालातों ने इसरो की योजनाओं पर अड़ंगा भी लगाया। फिर भी इसरो अपने बुलंद इरादों से डिगा नहीं। 

 

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गगनयान अंतरिक्ष यात्री - फोटो : Social media

2022 के लिए गगनयान समेत ये बड़े चार मिशन रेडी

हाल ही में इसरो ने इस साल का अपना पहला मिशन-पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV-C52) 14 फरवरी, 2022 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। इसके अलावा अंतरिक्ष संगठन के पास इस साल चार बड़े महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन हैं। इनमें गगनयान मिशन प्रमुख है जिसका मकसद स्वदेशी अंतरिक्ष यान के जरिये भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के पहले जत्थे को अंतरिक्ष में भेजना है। इसके अलावा अन्य तीन प्रोजेक्ट में सूर्य का अध्ययन करने के लिए भारत का पहला मिशन आदित्य एल-1, चंद्रयान-3 की तैयारी और एसएसएलवी का विकास आदि शामिल हैं।

 

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