Modi 3.0: यूं ही नहीं मिला जेपी नड्डा को दोबारा स्वास्थ्य मंत्रालय, ऐसे बदला था देश के हेल्थ सेक्टर का माहौल
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Modi 3.0: मोदी सरकार की तमाम उपलब्धियों के तौर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में खुल रहे एम्स जैसे कई महत्वपूर्ण संस्थान की शुरुआत जेपी नड्डा के स्वास्थ्य मंत्री रहते ही हुई थी। जानिए उन्होंने और कौन कौन से काम किए थे।
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विस्तार
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को देश का स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है। यह दूसरा मौका है जब जेपी नड्डा देश के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनाए गए हैं। दरअसल उनको यह मंत्रालय दोबारा यूं ही नहीं दिया गया है। बल्कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए उनके कार्यों के आधार पर ही उन्हें इस अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मोदी सरकार की तमाम उपलब्धियों के तौर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में खुल रहे एम्स जैसे कई महत्वपूर्ण संस्थान की शुरुआत जेपी नड्डा के स्वास्थ्य मंत्री रहते ही हुई थी। मेडिकल कॉलेजों में सीटों के बढ़ने से लेकर आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी जेपी नड्डा के कार्यकाल में ही बने और बढ़े। अब एक बार फिर से उनको दोबारा इस मंत्रालय की कमान दिए जाने से देश के भीतर बेहतर मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और चिकित्सा की सुविधाओं को और आगे ले जाने की रफ्तार तेज होने की उम्मीद की जाने लगी है।
नड्डा के पास केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
देश के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में गिना जाने वाला केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय एक बार फिर से जेपी नड्डा के पास आ गया है। जेपी नड्डा को यह मंत्रालय दिए जाने के पीछे यही तर्क है कि जिस तरीके से उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप न सिर्फ ज्यादा से ज्यादा एम्स जैसे बड़े मेडिकल एंड हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट शुरू करने की नींव डाली। बल्कि उनकी देश में संख्या बढ़ाकर ऐसे राज्यों में पहुंचाया, जहां पर सरकारी अस्पताल न के बराबर थे। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक बीते 10 वर्ष के भीतर एम्स की संख्या 7 से बढ़कर 23 हो गई है। जबकि मेडिकल कॉलेज की संख्या 387 से बढ़कर 706 हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर मेडिकल कॉलेज और एम्स की संख्या को बढ़ाने का काम जेपी नड्डा के कार्यकाल में हुआ।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के दिशा में सकारात्मक काम
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर एपी पांडा कहते हैं कि पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के कार्यकाल में ही एमबीबीएस से लेकर एमडी और डीएम समेत एमसीएच जैसे सुपर स्पेशलिटी के प्रोग्राम में सीटें बढ़वाई गईं। डॉक्टर पांडा कहते हैं कि 2014 से पहले एमबीबीएस की पूरे देश भर में 51348 सीटें हुआ करती थीं। जबकि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में इन सीटों को बढ़ाने का काम हुआ। वह कहते हैं कि 2023 तक देश में एमबीबीएस की 108940 सीटें बढ़ी हैं। जबकि पीजी की 2014 तक 31185 सीटें ही हुआ करती थीं। जो 2023 तक 70674 तक पहुंच गईं। ऑल इंडिया रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव डॉ अभिषेक के. चंदेल कहते हैं कि इसमें कहीं पर से कोई दो राय नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के दिशा में बहुत सकारात्मक काम किया है। उनके ही नेतृत्व में जेपी नड्डा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए न सिर्फ इन सीटों को शुरुआत में बढ़ाने का काम किया, बल्कि देश में डॉक्टरों की संख्या भी इसी के माध्यम से ज्यादा हुई।
नड्डा ने इन योजनाओं पर किया था काम
जेपी नड्डा को दोबारा केंद्र में स्वास्थ्य मंत्री बनाए जाने के पीछे तर्क देते हुए इंडियन सोसाइटी ऑफ़ गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी के डॉक्टर अनूप चंद्र कहते हैं की नॉन कम्युनिकेबल डिसीज की रोकथाम के लिए शुरू किए गए कई प्रोजेक्ट जेपी नड्डा के समय ही शुरू हुए। आज हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों को रोकने के लिए शुरू किए गए उन प्रोजेक्ट के माध्यम से लोगों को समय रहते बीमारी की जानकारी मिल रही है। इसके अलावा मोदी के नेतृत्व में दिव्यांग हेल्थ केयर को लागू कर एक साथ कई बीमारियों को कम लागत में ठीक करने की योजना से करोड़ों लोगों को फायदा हो रहा है। इसको भी जेपी नड्डा के पहले कार्यकाल में आगे बढ़ाया गया।
सिर्फ मेडिकल कॉलेज, एम्स और एमबीबीएस से लेकर पीजी की सीटों को बढ़ाने के अलावा देश के लाखों हेल्थ सेंटर को वेलनेस सेंटर में भी तब्दील करने का काम जेपी नड्डा के कार्यकाल में शुरू हुआ। मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंस के डॉक्टर अक्षय बत्रा कहते हैं कि लाखों हेल्थ सेंटरों को वेलनेस सेंटरों में तब्दील कर एक छत के नीचे कई रोगों की स्क्रीनिंग की सुविधा देकर देश के लोगों को रोगमुक्त करने का अभियान शुरू किया गया है। इसके अलावा आयुष्मान बीमा योजना को आगे बढ़ाने और शुरुआत करने के लिए भी जेपी नड्डा का पहला कार्यकाल याद किया जाता है। वह कहते हैं कि अगर जेपी नड्डा को एक बार फिर से देश का नया केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है तो निश्चित तौर पर उनके पिछले कार्यकाल की उपलब्धियां के तौर पर ही उनको यह जिम्मेदारी मिली है।