सीट का समीकरण: 2022 में महज 203 वोट की जीत से भाजपा ने बरकरार रखी धामपुर सीट, ऐसा है यहां का चुनावी इतिहास
बिजनौर की धामपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास कई राजनीतिक बदलावों का गवाह रहा है। कांग्रेस, जनता पार्टी, भाजपा, सपा और बसपा यहां जीत दर्ज कर चुके हैं। 2022 में भाजपा ने महज 203 वोटों से जीत हासिल की थी। जानिए सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास...
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। जैसे-जैसे चुनाव के दिन नजदीक आ रहे हैं, राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो रही है। राज्य का इतिहास गवाह है कि यहां सत्ता की कुंजी केवल बड़े मुद्दों से ही नहीं, बल्कि हर सीट के छोटे, स्थानीय और सामाजिक समीकरणों को साधने से मिलती है। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको हमारी खास सीरीज 'सीट का समीकरण' में उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने और उसके राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात बिजनौर जिले की धामपुर (Dhampur) विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है?
पहले जानते हैं धामपुर सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला बिजनौर है। जिले में कुल आठ विधानसभा सीटें हैं। इनमें- नजीबाबाद, नगीना, बढ़ापुर, धामपुर, नहटौर, बिजनौर, चांदपुर और नूरपुर। 'सीट का समीकरण' की आज की कड़ी में हम धामपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। बिजनौर जिले की धामपुर विधानसभा सीट पर 1957 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार गिरधारी लाल ने जीत हासिल की थी। उस समय यह सीट द्वि-सदस्यीय (डबल मेंबर) विधानसभा क्षेत्र थी, जहां से दो विधायक चुने जाते थे। इससे पहले 1952 के विधानसभा चुनाव में गिरधारी लाल धामपुर नॉर्थ ईस्ट कम नगीना ईस्ट विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
पिछले विधानसभा चुनाव में कैसा रहा नतीजा?
2022 के चुनावों की बात करें तो, धामपुर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को कड़े मुकाबले में जीत मिली थी। इस चुनाव में धामपुर विधानसभा सीट से भाजपा के अशोक कुमार राणा ने जीत हासिल की। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के नईम उल हसन को महज 203 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में भाजपा के अशोक राणा को 81,791 वोट मिले, जबकि सपा के नईम उल हसन को 81,588 वोट मिले। चुनाव में बसपा के ठाकुर मूल चंद चौहान तीसरे नंबर पर रहे, जिन्हें 38,993 वोट मिले।
धामपुर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, चौहान और अनुसूचित जाति (SC) आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 35% हैं। इसके बाद चौहान मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 15% और अनुसूचित जाति की करीब 13% है, जबकि सिख व जाट लगभग 4% और वैश्य मतदाता करीब 3% हैं। वहीं, बाकी अन्य जातियों के मतदाता हैं।
धामपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास कैसा रहा है?
1957 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय धामपुर विधानसभा सीट एक द्वि-सदस्यीय सीट थी, जहां से दो विधायक चुने गए थे। इसमें सामान्य सीट पर कांग्रेस के गिरधारी लाल विजयी हुए थे, जिन्हें 41,106 वोट मिले थे। उन्होंने भारतीय जनसंघ के अपने प्रतिद्वंद्वी संतराम को हराया, जिन्हें 24,873 वोट मिले थे। वहीं दूसरी (अनुसूचित जाति आरक्षित) सीट पर कांग्रेस के ही खूब सिंह ने जीत हासिल की। उन्होंने भारतीय जनसंघ के हरिपाल सिंह को हराया। चुनाव में खूब सिंह को 40,123 वोट मिले, जबकि हरिपाल सिंह को 22,842 वोट मिले थे।
1962 का चुनाव रहा कांग्रेस के नाम
1962 के चुनाव में धामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के खूब सिंह विजयी हुए। उन्हें 18,824 वोट मिले। उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार अमीरी सिंह को पराजित किया, जिन्हें 11,230 वोट मिले। खूब सिंह ने यह चुनाव 7,594 मतों के अंतर से जीता।
1967 के विधानसभा चुनाव में धामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के जी. सहाय विजयी हुए। उन्हें 23,351 वोट मिले। उन्होंने भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार बी. एस. गहलोत को पराजित किया, जिन्हें 20,140 वोट मिले। जी. सहाय ने यह चुनाव 3,211 मतों के अंतर से जीता।
1969 में बीकेडी ने तोड़ा कांग्रेस की जीत का सिलसिला
1969 के चुनाव में धामपुर विधानसभा सीट से भारतीय क्रांति दल (BKD) के सत्तार अहमद विजयी हुए। उन्हें 28,976 वोट मिले। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार क्रांति कुमार को पराजित किया, जिन्हें 22,040 वोट मिले। सत्तार अहमद ने यह चुनाव 6,936 मतों के अंतर से जीता।
1974 के विधानसभा चुनाव में धामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के सत्तार अहमद विजयी हुए। उन्हें 29,020 वोट मिले। उन्होंने भारतीय क्रांति दल (BKD) के उम्मीदवार चंद्रवीर सिंह को पराजित किया, जिन्हें 21,802 वोट मिले। सत्तार अहमद ने यह चुनाव 7,218 मतों के अंतर से जीता।
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजीं देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
1977 में धामपुर में भी चली जनता लहर
1977 के चुनाव में धामपुर सीट पर जनता पार्टी (जेएनपी) ने जीत हासिल की और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इन चुनावों में जनता पार्टी के हरपाल सिंह शास्त्री ने सत्तार अहमद को 694 वोटों से हराया। चुनाव में हरपाल सिंह शास्त्री को 23,242 वोट मिले, तो वहीं सत्तार अहमद को 22,548 वोट मिले।
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1980 कांग्रेस ने लहर में भी जीती जनता पार्टी
1980 के यूपी विधानसभा चुनाव में धामपुर विधानसभा सीट से जनता पार्टी के श्याम सिंह विजयी हुए। उन्हें 20,932 वोट मिले। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई) के उम्मीदवार हरिपाल सिंह शास्त्री को पराजित किया, जिन्हें 14,658 वोट मिले। श्याम सिंह ने यह चुनाव 6,274 मतों के अंतर से जीता।
1980 के बाद राज्य में 1985 में चुनाव हुए। इस चुनाव में धामपुर विधानसभा सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बसंत सिंह विजयी हुए। उन्हें 19,541 वोट मिले। उन्होंने लोकदल के उम्मीदवार श्याम सिंह को पराजित किया, जिन्हें 16,138 वोट मिले। बसंत सिंह ने यह चुनाव 3,403 मतों के अंतर से जीता।
1989: भाजपा को मिली पहली जीत
राज्य में 1989 में फिर से चुनाव हुए। इस चुनाव में धामपुर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सुरेंद्र सिंह विजयी हुए। उन्हें 39,183 वोट मिले। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार बुनियाद अली को पराजित किया, जिन्हें 31,411 वोट मिले। सुरेंद्र सिंह ने यह चुनाव 7,772 मतों के अंतर से जीता।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में धामपुर विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
1991: भाजपा की लगातार दूसरी जीत
1991 के चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की। इस चुनाव में भाजपा के राजेंद्र सिंह ने जनता दल के बुनियाद अली को 26,651 वोटों के भारी अंतर से हराया। उस चुनाव में भाजपा के राजेंद्र सिंह को 62,048 वोट मिले, जबकि बुनियाद अली को 35,397 वोट मिले।
1993: भाजपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
1993 के चुनाव में धामपुर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजेंद्र सिंह विजयी हुए। उन्हें 63,069 वोट मिले। उन्होंने जनता दल के उम्मीदवार मूलचंद को पराजित किया, जिन्हें 60,819 वोट मिले। राजेंद्र सिंह ने यह चुनाव 2,250 वोटों के अंतर से जीता।
1996: सपा ने धामपुर में खोला खाता
1996 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में धामपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के मूलचंद चौहान विजयी हुए। उन्हें 61,218 वोट मिले। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार अजय बाला को पराजित किया, जिन्हें 56,948 वोट मिले। मूलचंद चौहान ने यह चुनाव 4,270 वोटों के अंतर से जीता।
इसके बाद राज्य में 2002 में चुनाव हुए। इन चुनावों में धामपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के मूलचंद विजयी हुए। उन्हें 56,597 वोट मिले। उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के उम्मीदवार अशोक कुमार राणा को पराजित किया, जिन्हें 46,044 वोट मिले। मूलचंद ने यह चुनाव 10,553 वोटों के अंतर से जीता।
2007 में बसपा तो 2012 में सपा को मिली जीत
2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों की बात करें तो, धामपुर सीट पर 2007 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में बसपा के अशोक कुमार राणा विजयी हुए। उन्होंने सपा के ठाकुर मूल चंद चौहान को 20,526 वोटों के भारी अंतर से हराया। उस चुनाव में बसपा के अशोक कुमार राणा को 65,717 वोट मिले, जबकि सपा के मूलचंद को 45,191 वोटों से ही संतोष करना पड़ा।
2012 के विधानसभा चुनाव में धामपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के ठाकुर मूलचंद चौहान विजयी हुए। उन्हें 53,365 वोट मिले। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अशोक कुमार राणा को पराजित किया, जिन्हें 52,801 वोट मिले। मूलचंद चौहान ने यह चुनाव महज 564 मतों के बेहद करीबी अंतर से जीता। धामपुर सीट पर मूलचंद की ये तीसरी जीत थी।
2017: 21 साल बाद भाजपा की वापसी
2017 के धामपुर विधानसभा चुनाव की बात करें तो इस सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अशोक कुमार राणा विजयी हुए। उन्हें 82,169 वोट मिले। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवार ठाकुर मूलचंद चौहान को पराजित किया, जिन्हें 64,305 वोट मिले। अशोक कुमार राणा ने यह चुनाव 17,864 मतों के अंतर से जीता। इस चुनाव में बसपा के मोहम्मद गाजी 42,706 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। 21 साल बाद इस सीट पर भाजपा को जीत मिली थी।