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UP: 'सरकार भूखा मरने से बचाए, NGO के काम से सिर्फ...', एसिड अटैक पीड़िता रुकैया का पति ने भी छोड़ दिया था साथ
Wed, 19 Aug 2026 03:21 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 19 Aug 2026 03:21 PM IST
सार
अलीगढ़ की एसिड अटैक पीड़िता रुकैया की दर्द छलका है। रुकैया दो बार जान देने की कोशिश कर चुकी हैं। उनका कहना है कि 14 साल के बेटे को पालना मुश्किल हो गया है। एनजीओ के काम से सिर्फ दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो पा रहा है।
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Acid attack survivor
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अलीगढ़ में चौबीस साल पहले वर्ष 2002 में महज 14 साल की उम्र में बहन के घर पर तेजाब के हमले का शिकार हुईं रुकैया बेगम के लिए इन दिनों दो वक्त की रोटी जुटना मुश्किल पड़ रहा है। उन्होंने कहा है कि सरकार पेंशन का इंतजाम करे ताकि भूख से मरने की नौबत न आए।
उन्होंने एसिड अटैक पीड़ित सभी महिलाओं के लिए हरियाणा की तर्ज पर प्रतिमाह न्यूनतम आठ हजार रुपये पेंशन दिए जाने की मांग भी की है। वह बताती हैं कि पैसों की किल्लत के कारण ही वर्ष 2013 और 2014 में दो बार बेटे के साथ जान देने का प्रयास कर चुकी हैं क्योंकि उनके सामने मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
घर में खाने के लिए कुछ नहीं था और कोई काम भी नहीं मिल रहा था। बेटे को पालना मुश्किल हो गया था। इसके बाद वह आगरा के एनजीओ शीरोज से जुड़ीं और उन्हें काम मिला। अब तक वे उसी संस्था के साथ काम कर रही हैं जिससे दो वक्त की रोटी का ही जुगाड़ हो पा रहा है। उन्हें अपने बेटे के भविष्य की चिंता है।
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उन्होंने एसिड अटैक पीड़ित सभी महिलाओं के लिए हरियाणा की तर्ज पर प्रतिमाह न्यूनतम आठ हजार रुपये पेंशन दिए जाने की मांग भी की है। वह बताती हैं कि पैसों की किल्लत के कारण ही वर्ष 2013 और 2014 में दो बार बेटे के साथ जान देने का प्रयास कर चुकी हैं क्योंकि उनके सामने मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
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घर में खाने के लिए कुछ नहीं था और कोई काम भी नहीं मिल रहा था। बेटे को पालना मुश्किल हो गया था। इसके बाद वह आगरा के एनजीओ शीरोज से जुड़ीं और उन्हें काम मिला। अब तक वे उसी संस्था के साथ काम कर रही हैं जिससे दो वक्त की रोटी का ही जुगाड़ हो पा रहा है। उन्हें अपने बेटे के भविष्य की चिंता है।
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बहन के देवर ने किया किया था हमला
रुकैया बेगम के मुताबिक, वर्ष 2002 में उनकी बहन का गर्भपात हुआ था। वह अपनी मां के साथ बहन के ससुराल गई थीं। बहन का देवर आरिफ दिल्ली में रहता था। तीन दिन बाद वह भी आ गया। एक शाम वह बाहर गया और तेजाब की बोतल ले आया।
रुकैया बेगम के मुताबिक, वर्ष 2002 में उनकी बहन का गर्भपात हुआ था। वह अपनी मां के साथ बहन के ससुराल गई थीं। बहन का देवर आरिफ दिल्ली में रहता था। तीन दिन बाद वह भी आ गया। एक शाम वह बाहर गया और तेजाब की बोतल ले आया।
वह चारपाई पर अकेली बैठी थीं। तभी आरिफ ने उन पर तेजाब फेंक दिया और भाग गया। घटना में शरीर का काफी हिस्सा झुलस गया। भाई ने एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की तो बहन के ससुराल वालों ने धमकाया कि यदि रिपोर्ट दर्ज कराई तो वह बहन को घर से निकाल देंगे।
पति ने भी छोड़ दिया साथ
रुकैया ने बताया कि वर्ष 2010 में उनकी शादी हुई। चार साल बाद वर्ष 2014 में उनका पति उन्हें और तीन साल बेटे को छोड़कर अलग हो गया। इसके बाद से वह अपने बेटे के साथ आगरा में शहादरा पीर खास में रह रहीं हैं। अलीगढ़ के आईटीआई रोड पर उनकी बहन की ससुराल है, जहां घटना हुई थी।
रुकैया ने बताया कि वर्ष 2010 में उनकी शादी हुई। चार साल बाद वर्ष 2014 में उनका पति उन्हें और तीन साल बेटे को छोड़कर अलग हो गया। इसके बाद से वह अपने बेटे के साथ आगरा में शहादरा पीर खास में रह रहीं हैं। अलीगढ़ के आईटीआई रोड पर उनकी बहन की ससुराल है, जहां घटना हुई थी।
अलीगढ़ में नहीं मिला मुआवजा
वर्ष 2025 में आगरा में उन्हें पांच लाख रुपये का मुआवजा मिला। अलीगढ़ में भी एक लाख रुपये मुआवजे की बात कही गई थी जो अब तक नहीं मिला। बताया कि आरोपी आरिफ अलीगढ़ जिला कारागार में तीन साल से बंद है। पीड़िता के अधिवक्ता नरेश पारस का कहना है कि वह आरोपी को सजा दिलाकर ही रहेंगे।
वर्ष 2025 में आगरा में उन्हें पांच लाख रुपये का मुआवजा मिला। अलीगढ़ में भी एक लाख रुपये मुआवजे की बात कही गई थी जो अब तक नहीं मिला। बताया कि आरोपी आरिफ अलीगढ़ जिला कारागार में तीन साल से बंद है। पीड़िता के अधिवक्ता नरेश पारस का कहना है कि वह आरोपी को सजा दिलाकर ही रहेंगे।