कबीर खान द्वारा निर्देशित फिल्म 'चंदू चैंपियन' को रिलीज हुए दो साल हो गए हैं। इस फिल्म में अभिनेता कार्तिक आर्यन ने भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाया था। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से काफी तारीफ मिली। इस फिल्म ने मुरलीकांत पेटकर के जीवन पर बहुत गहरा और सकारात्मक प्रभाव डाला है।
'चंदू चैंपियन के पूरे हुए 2 साल', मुरलीकांत पेटकर के जीवन में आए बदलाव; कार्तिक आर्यन के बारे में लिखी यह बात
2 Years Of Chandu Champion: कार्तिक आर्यन की फिल्म 'चंदू चैंपियन' की रिलीज के आज 14 जून को पूरे दो साल हो गए हैं। इस खुशी में पैरा-एथलीट मुरलीकांत पेटकर ने सोशल मीडिया पर एक खास पोस्ट शेयर किया है। 'चंदू चैंपियन' मुरलीकांत पेटकर पर बनी बायोपिक है।
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मुरलीकांत पेटकर के जीवन में आए बदलाव
मुरलीकांत पेटकर ने इंस्टाग्राम पर फिल्म 'चंदू चैंपियन' की कई तस्वीरें शेयर की हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि फिल्म रिलीज होने के बाद लोग उनके और भारत के पैरालंपिक इतिहास के बारे में जानने लगे हैं। अब लोग उनसे मिलकर बताते हैं कि उनकी कहानी ने उन्हें कितना प्रेरित किया।
पुराने दिनों को किया याद
मुरलीकांत पेटकर ने लिखा कि पर्दे पर अपनी जिंदगी को दोबारा देखना पेटकर के लिए भावुक करने वाला था। इससे उन्हें अपने संघर्षों के साथ-साथ अपनी ताकत और जीवन के उद्देश्य का भी अहसास हुआ। मुरलीकांत का मानना है कि इस फिल्म ने समाज की सोच को बदला है। पहले पैरा-एथलीटों को लोग सहानुभूति की नजर से देखते थे, लेकिन अब उन्हें सम्मान मिलने लगा है। लोग अब उन्हें बेहतरीन खिलाड़ियों के रूप में पहचान रहे हैं।
मुरलीकांत पेटकर ने लिखा, 'सोच अब सही दिशा में बदल रही है। हालांकि, खेल सुविधाओं और अवसरों के मामले में अभी लंबा रास्ता तय करना है, लेकिन इस बदलाव में फिल्म का योगदान बहुत बड़ा है।'
मुरलीकांत ने की कार्तिक आर्यन की तारीफ
मुरलीकांत पेटकर ने कार्तिक आर्यन की तारीफ करते हुए लिखा, 'कार्तिक ने पेटकर की कहानी को न सिर्फ सुना, बल्कि उसके पीछे के दर्द और जज्बे को भी समझा। मुरलीकांत का मानना है कि कार्तिक ने इस रोल के लिए कड़ी मेहनत की है।' मुरलीकांत ने बताया कि कार्तिक ने केवल उनकी सफलताओं को नहीं दिखाया, बल्कि उनके जीवन के संघर्ष, गुस्से, निराशा और खुद को साबित करने की जिद को भी बहुत ईमानदारी से पर्दे पर उतारा।
'हार नहीं माननी चाहिए'
अर्जुन पुरस्कार विजेता मुरलीकांत पेटकर का कहना है कि अपनी जिंदगी को पर्दे पर देखना आसान नहीं था, क्योंकि इसने कई पुरानी मुश्किल यादों को ताजा कर दिया। लेकिन इस फिल्म ने उन्हें यह भरोसा दिलाया कि जिंदगी चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, अगर आप हार नहीं मानते, तो जीत पक्की है।
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