Exclusive: अमर उजाला से खास बातचीत में दुर्गा जसराज ने लता मंगेशकर को किया याद, सुनाए बचपन से जुड़े कई किस्से
हाल ही में दुनिया से विदा ले चुकीं लता मंगेशकर के निधन से हर कोई दुखी है। लता मंगेशकर के निधन की खबर सुनते ही हर कोई स्तब्ध रह गया। लता मंगेशकर का जाना संगीत की दुनिया के लिए एक ऐसा नुकसान है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हाल ही में दुनिया से विदा ले चुकीं लता मंगेशकर के निधन से हर कोई दुखी है। लता मंगेशकर के निधन की खबर सुनते ही हर कोई स्तब्ध रह गया। लता मंगेशकर का जाना संगीत की दुनिया के लिए एक ऐसा नुकसान है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। लता मंगेशकर के निधन पर आम से लेकर खास सभी लोग श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी क्रम में संगीत मार्तंड पंडित जसराज की बेटी और मशहूर फिल्मकार वी शांताराम की नातिन दुर्गा जसराज ने अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने ना सिर्फ लता मंगेशकर को याद किया बल्कि उनसे जुड़े कई किस्से भी साझा किए।
सवाल: दुर्गा जी आप उस घराने से आती हैं जहां संगीत परंपरा का हिस्सा रहा है। आपकी लता जी के साथ कई मुलाकातें रही, कई यादें रही। आप लता जी को किस तरह याद करना चाहेंगी?
जवाब: लता मंगेशकर के निधन से 1 दिन पहले यानी बसंत पंचमी के दिन मैं उनके साथ आईसीयू वार्ड में मौजूद थी। इस दौरान मैंन कई सारे पल उनके साथ बिताए। अस्पताल से वापस लौटते समय मेरे मन में बस यही ख्याल था कि लता जी इस मुश्किल दौर से जल्द ही निकल जाएंगी। अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए दुर्गा ने बताया कि पंडित जसराज और मधुरा जसराज दोनों की ही तरफ से बचपन से ही लता जी का एक करीबी रिश्ता रहा। मेरी नानी का घर लता जी के घर के सामने ही था, इसलिए मेरी बहुत सारी गर्मियों की छुट्टियां लता जी के घर में ही गुजरी है। मैं ज्यादातर समय उन्हीं के घर में रहा करती थी। लता जी भी हमें कई फिल्में दिखाया करती थीं। यहां तक कि जब पहली बार दूरदर्शन आया तो हम लता जी के घर में ही टीवी देखा करते थे, क्योंकि उस समय लता जी के घर में टीवी था। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं कि मेरा बचपन लता जी के सामने गुजरा।
सवाल: पंडित जसराज जी और लता जी के बहुत गहरे संबंध थे। एक बार उन्होंने कहा था कि अच्छा है लता जी फिल्मी संगीत में हैं, शास्त्रीय संगीत में नहीं। इस वाक्य में प्यार और अतिरंजना भी देखने को मिल रही है। लेकिन इससे यह भी पता चलता है कि वह लताजी को किस मुकाम पर देखते थे। आप इस बारे में क्या कहना चाहेंगी?
जवाब: पंडित जसराज और लता जी के बीच एक भाई- बहन जैसा रिश्ता था और दोनों ने ही इस रिश्ते को बखूबी निभाया। बापूजी कई बार अपने काम से अलग-अलग जगह जाया करते थे, लेकिन उनके जीवन में थोड़ा बहुत समय हमेशा लता जी के लिए समर्पित रहता था। उन्होंने साक्षात्कार में हमेशा यह बात बोली है कि अगर इस दुनिया में किसी ने यह बताया है कि सुर क्या है तो इसका श्रेय सिर्फ एक ही व्यक्ति को जाता है और वह हैं आदरणीय लता मंगेशकर। बापूजी की इस बात से कई लोग नाराज भी हुए थे, क्योंकि उस दौर में शास्त्रीय संगीत और फिल्मी संगीत के बीच गहरी खाई थी, लेकिन पंडित जी ने हमेशा लता जी के लिए इस बात को स्वीकारा और आज पूरी दुनिया इस बात को मानती है।
सवाल: आपका शास्त्रीय संगीत और फिल्मी संगीत के साथ गहरा रिश्ता रहा है। ऐसे में जब इन दोनों संगीत के बीच दायरा या खाई की बात आती है, तो उस पर आपका क्या कहना है?
जवाब: बापू जी अपने शब्दों में हमेशा यही कहा है कि संगीत, संगीत होता है। कोई दायरा नहीं है कि यह संगीत मनोरंजन के लिए है या यह संगीत आत्मा के लिए है। जब आप अच्छा संगीत सुनते है तो यह आपके दिल में घर करता है और आपकी आंख से आंसू आना अनिवार्य है। मैं यह मानती हूं कि संगीत गिव एंड टेक की एक प्रक्रिया है। संगीत का आप पर असर तभी होगा जब आप उसे खुले दिल से सुनेंगे।इस दौरान उन्होंने एक किस्सा भी सुनाया। मैं अपने पिता के साथ टोरंटो गई हुई थी। यहां बापूजी ने एक लड़के को टेबल टेनिस खेलते हुए देखा और वह भी उस लड़के के साथ टेबल टेनिस खेलने लगे। इस पर वह लड़का काफी खुश हो गया। उस लड़के ने बापूजी से कहा कि मैंने नहीं सोचा था कि पंडित जसराज टेबल टेनिस भी खेल सकते हैं। इस पर बापूजी ने लड़के से सवाल किया कि उसने ऐसा क्यों सोचा तो उस लड़के ने बताया कि आप धोती पहनते हैं तो आप टेनिस कैसे खेल सकते हैं। इसके बाद बापूजी ने उस लड़के से पूछा कि क्या वह उनके कॉन्सर्ट में आने वाला है। इस पर उस लड़के ने आने से साफ मना कर दिया। इसके बाद पंडित जी ने लड़के से कहा कि तुम कॉन्सर्ट में आना और अगर तुम बोर हो गए तो मैं तुम्हें 100 डॉलर दूंगा, लेकिन अगर तुम आखिर तक रुके रहे तो तुम्हें टोरंटो में होने वाले सभी कॉन्सर्ट में जाना होगा। शाम को जब वह लड़का कॉन्सर्ट में आया तो सब खत्म होने के बाद हमने देखा कि वह लड़का रो रहा था और उसने बापूजी को गले लगा कर कहा कि अब पता चला कि आप दिग्गज कलाकार क्यों कहलाते हैं।
सवाल: लता जी से जुड़ी आपके पास कई सारी यादें हैं। कई पर्सनल है तो कोई प्रोफेशनल है। लेकिन लता जी से जुड़ी कोई ऐसी बात जो बहुत दुर्लभ है, जो आपके दिल में घर कर गई हो और आप हमें बताना चाहें?
जवाब: मुझे अभी याद ही नहीं कि मैंने लता जी से जुड़ी कौन सी बात बताई है और कौन सी नहीं। वह जब हमें पिक्चर दिखाती थीं, हम लोग प्राइवेट स्क्रीनिंग देखते थे। पहले मुझे लगता था कि सभी लोग प्राइवेट स्क्रीनिंग ही देखते हैं। क्योंकि मेरे नाना जी के पास कई बड़े-बड़े निर्देशक अपनी फिल्म देखने के लिए भेजा करते थे। हमें भी फिल्म देखने की अनुमति थी, अगर वह एडल्ट फिल्म ना हो तो। ऐसी कई प्राइवेट स्क्रीनिंग पर मैंने दीदी के साथ भी फिल्में देखी हैं। मैंने उनके साथ महमूद की फिल्म सबसे बड़ा रुपैया देखी। इस दौरान उन्होंने मुझे अपने पास ही बिठाया और लगातार कुछ ना कुछ खाने को देती रहीं। इससे यह पता चलता है कि वह काफी ध्यान रखने वाली थीं। लता जी को जोक्स भी काफी पसंद थे। वह मुझसे और अन्य बच्चों से हमेशा पूछती थीं कि क्या तुमने कोई नया चुटकुला सुना है और जब हम उन्हें चुटकुला सुनाते थे तो वह कहती थी कि यह तो पुराना है, लो मैं नया सुनाती हूं।
सवाल: जैसा कि हम हमेशा से ही सुनते आए हैं कि लता जी आपने रियाज और रिकॉर्डिंग को लेकर काफी अनुशासित और गंभीर थीं। कोई किस्सा जो आपको इस बात की याद दिलाता हो?
जवाब: मैंने कई सारी फिल्मों की रिकॉर्डिंग सुनी है। दाग की रिकॉर्डिंग सुनी है और मेरे नानाजी की कई फिल्मों की भी रिकॉर्डिंग सुनी है। एक चीज जो मैं हमेशा देखती थी अगर मुकेश जी या किशोर जी लता दीदी के साथ डूएट गा रहे हों तो जब उनकी बारी नहीं रहती तो वह जाकर अपनी कुर्सी पर बैठ जाती थीं। वह हमेशा अपने पैरों में सोने की पायल पहनती थीं। कुर्सी पर बैठ कर अपना काम करती थीं और अपनी लाइन से ठीक पहले चलकर माइक तक पहुंच जाती थीं। लेकिन मजाल है कि कभी रिकॉर्डिंग स्टूडियो में उनकी पायल की छन भी सुनाई दी हो उन्होंने कभी अपनी पायल नहीं उतारी। लेकिन उनका अपने पैरों पर इतना नियंत्रण था और वह इतने हल्के कदम से चलती थीं कि पायल की छन तक किसी को सुनाई नहीं देती थी। वह समय से पहले पहुंचकर माइक के सामने खड़ी होकर गाना शुरू कर देती थीं। उनकी टाइमिंग बिल्कुल परफेक्ट होती थी।
जवाब: दो गानों का मेरी जिंदगी में एक अहम हिस्सा है। हालांकि लता जी के गानों की सूची काफी लंबी है। उन्होंने हर गाने को जिस तरह से गाया है, उसकी बात ही अलग है। उनकी आवाज और संगीत अमर है। मुझे लगता है उनकी आवाज में अमर और उजाला दोनों ही है। मेरे दिल के करीब गानों में पहला है, मेरे नाना वी शांताराम की फिल्म दो आंखें बारह हाथ का ए मालिक तेरे बंदे हम। यह गाना आज भी तिहाड़ जेल में सुबह- शाम प्रार्थना के रूप में गाया जाता है। इसके अलावा दीवाली के दिन हमारे यहां घर में हमेशा से एक प्रथा रही है,दीवाली की सुबह 4- 4:30 बजे पिताजी उठ जाते थे और उनके पास ज्ञानेश्वरी एक रिकॉर्ड थी, जिसमें मोगरा फुलला हुआ करते थे। उसे वह सुबह लगाते थे और इसके बाद चार-पांच बम को एक साथ जोड़ कर जलाते थे, जिससे शिवाजी पार्क जहां हम पहले रहा करते थे, के आसपास का पूरा इलाका जाग जाता था। आज तक किसी को भी नहीं पता कि दीवाली की सुबह वह बम लगाने वाले पंडित जसराज जी थे। यह हमारे बाबूजी का दीदी के साथ वेकअप कॉल हुआ करता था।