80 लेकर 90 के दशक तक बॉलीवुड को कई फिल्में देने वालीं उस समय की चर्चित महिला लेखक व निर्देशक सई परांजपे का आज 83वां जन्मदिन है। इस मौके पर अभिनेत्री कंगना रणौत ने उन्हें याद किया है। इसको लेकर कंगना ने ट्विटर पर उनकी तस्वीर के साथ एक पोस्ट साझा किया है, जिसमें उन्होंने जन्मदिन की बधाई भी दी है।
कंगना रणौत ने इस भारतीय महिला निर्देशक को बताया सिनेमा की ‘गुमनाम हीरो’, जन्मदिन पर लिखीं ये खास बातें
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अभिनेत्री कंगना रणौत ने लेखक-निर्देशक साई परांजपे के 83वें जन्मदिन पर उन्हें याद करते हुए सिनेमा के खोए हुए नायकों में से एक बताया। उन्होंने लिखा ‘सिनेमा के बहुत सारे ऐसे खोए हुए हीरो हैं जिन्हें मीडिया अक्सर ही भूल जाता है…आज उनमें से एक ऐसी ही महिला नायक, पहली महिला लेखक और निर्देशक साई परांजपे जी का जन्मदिन है, जिन्होंने स्पर्श और चश्मे बद्दूर जैसी असाधारण फिल्में बनाईं। आपको जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं मैम।’
There are many lost heroes of Cinema who media conveniently forgets...
Today is the birth anniversary of one such hero one of the first women writer and director Sai Paranjpye ji who made exceptional cinema like Sparsh and Chasme Buddoor. Wishing you a very happy birthday maam 🙏 pic.twitter.com/ofqNJoL0B8
बता दें कि सई परांजपे का जन्म 19 मार्च 1938 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने 8 साल की उम्र में ही एक किताब लिख डाली दी थी। सई के पिता जहां एक वॉटरकलर आर्टिस्ट थे, वहीं उनकी मां एक्ट्रेस थीं। सई के दादा आरपी परांजपे थे। सई के पिता रूसी थे और मां भारतीय। सई कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पहली भारतीय वरिष्ठ रैंगलर थीं।
फिल्म 'चश्मे बद्दूर' बनाने के साथ सई ने 'कथा', 'स्पर्श' और 'दिशा' जैसी फिल्में भी बनाई थीं। उनकी फिल्म का हर पात्र दर्शकों को खुद की जिंदगी का ही एक हिस्सा लगता था। हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर 'चश्मे बद्दूर' को छोड़कर कोई भी फिल्म बड़ी हिट नहीं हो पाई। सई परांजपे को उनकी फिल्मों के लिए कुल 4 राष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे। इसके अलावा दो बार फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया था। फिल्मों में योगदान के लिए 2006 में उन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था।
बीते दिनों सई ने अपनी एक किताब लिखी थी, जिसका शीर्षक था ‘ए पैचवर्क क्विल्ट’। हिंदी फिल्म उद्योग में सबसे यादगार फिल्में बनाने के लिए, पुस्तक ने ऑल इंडिया रेडियो से फिल्म और टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तक की यात्रा की।