बड़े परदे पर चुलबुल पांडे की कहानी जब भी आती है। हर बार इसमें एक आइटम सॉन्ग का तड़का जरूर लगता है। मुन्नी बदनाम हुई से चला ये सफर दबंग 3 में मुन्ना बदनाम तक पहुंचा। इन तीनों ही गानों को गायिका ममता शर्मा ने आवाज दी है। 'टिंकू जिया', 'अनारकली डिस्को चली', 'कट्टो गिलहरी', 'पिंकी' और 'प्रीतम प्यारे' जैसे गानों की गायिका ममता शर्मा से अमर उजाला की खास मुलाकात।
बचपन में पॉकेट मनी से सलमान के पोस्टर खरीदती थीं गायिका ममता शर्मा, इंटरव्यू में किया खुलासा
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अब तक के आपके सफर में दबंग फ्रेंचाइजी की अहमियत कितनी रही है?
मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि मुझे 'दबंग' फिल्म में गाना गाने का मौका मिलेगा। यही मेरा पहला मौका भी था किसी हिंदी फिल्म में गाने का। दरअसल मैंने बचपन में स्कूल से बचने के लिए गायन की शुरुआत की थी। इस वजह से मुझे घर से रियायत मिल जाती थी। अगर रात में शो की वजह से देर हो जाती थी मम्मी सुबह स्कूल ना भेजने के लिए मान जाती थी लेकिन धीरे-धीरे वह मेरा जुनून बन गया और गायन मेरी जिंदगी का एक अटूट हिस्सा बनता चला गया। मैं सलमान खान की फैन 'हम आपके हैं कौन' के समय से हूं लेकिन बचपन में कभी इसका अंदाजा नहीं था कि एक बार उन्हीं की फिल्म में गाने का मौका मिलेगा। बचपन में अपनी पॉकेट मनी से पैसे बचाकर सलमान सर के पोस्टर्स खरीदा करती थी।
मुंबई आने की आपकी पहली याद क्या है?
मुंबई आने की मेरी एक खास याद है जिसे मैं आज तक नहीं भूल सकी हूं। उस दिन मुझे एहसास हुआ था कि मुंबई में रहना बहुत ही मुश्किल है वह भी तब जब आप किसी को भी नहीं जानती हों। उस समय मैं वहां एक हॉस्टल में रह रही थी उस हॉस्टल का एक नियम था कि वहां दरवाजे 10 बजे बंद हो जाया करते थे। तो एक बार हम शो करके बहुत मजे से करीब 12 बजे वापसे आए लेकिन हमारे लिए गेट नहीं खुला। हमें वॉचमैन ने कहा, 'बहनजी अब यह नहीं खुलेगा, अब तो यह सुबह ही खुलेगा '। जिसके बाद बड़ी मुश्किल से हम अपनी एक दोस्त के घर पहुंचे और जहां एक कमरे में नौ लोगों को रुकना पड़ा था। वह मेरे लिए काफी अलग अनुभव था।
आपको आइटम नंबर क्वीन का दर्जा दिया गया है लेकिन आप निजी जिंदगी में कैसे गाने पसंद करती हैं?
निजी जिंदगी में तो मैं बहुत ही अलग हूं। मैं जिस तरह के गाने गाती हूं उस तरह के गाने सुनती नहीं हूं। मुझे सैड सॉन्ग काफी पसंद हैं। अगर कोई मेरे गानों की प्लेलिस्ट देखेगा तो मुझे दुखियारी लड़की कहेगा। दरअसल मुझे सैड सॉन्ग, गजल और सूफी गाने काफी प्रभावित करते हैं। रही डांस नंबर्स की बात तो मुझे लगता है कि वह मेरे अंदर जन्म से ही है और यह ग्वालियर का असर है। जब भी ऐसे गानों को गाने की बारी आती है तो मैं हमेशा सोचती हूं कि मैं ग्वालियर में ही परफॉर्म कर रही हूं।
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