‘संदेसे आते हैं जावेद अख्तर का गाना’, रचनात्मक दिवालियापन वाले बयान पर मनोज मुंतशिर ने दी प्रतिक्रिया
Manoj Muntashir: ‘बॉर्डर 2’ के गीतों को लेकर छिड़ी बहस पर अब मनोज मुंतशिर ने प्रतिक्रिया दी है। जानिए गीतकार ने क्या कुछ कहा…
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वॉर-ड्रामा फिल्म ‘बॉर्डर 2’ बॉक्स ऑफिस पर छाई हुई है। फिल्म ने चार दिनों में ही 150 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है। फिल्म की क्रिटिक्स से लेकर दर्शक तक तारीफ कर रहे हैं। हालांकि, इस बीच फिल्म में 1997 में आई ‘बॉर्डर’ के गीत ‘संदेसे आते हैं’ और ‘जाते हुए लम्हों’ को री-क्रिएट करने पर एक बहस भी चल रही है। बहस की शुरुआत ‘बॉर्डर’ में इन गीतों को लिखने वाले गीतकार जावेद अख्तर के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने इसे क्रिएटिव दिवालियापन बताया था। अब ‘बॉर्डर 2’ में गीत लिखने वाले और ‘घर कब आओगे’ के गीतकार मनोज मुंतशिर ने जावेद अख्तर के कमेंट पर अपनी राय दी है।
जावेद साहब बिल्कुल सही हैं
इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान मनोज मुंतशिर ने जावेद अख्तर के रचनात्मक दिवालियापन वाले बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मनोज मुंतशिर ने कहा कि जावेद साहब बिलकुल सही हैं। इसीलिए तो हमने एक मौलिक गीत लिखा है। 'मिट्टी के बेटे' एक नया गीत है। मुझे पूरा विश्वास है कि जिस दिन जावेद साहब इसे सुनेंगे, वो मिथुन (बॉर्डर 2 के संगीतकार) और मुझे बुलाएंगे। वो हमेशा से ही नई प्रतिभाओं को बेहद प्रोत्साहित करते हैं और समर्थन देते रहे हैं। ‘संदेसे आते हैं’ हमेशा जावेद अख्तर साहब का गीत रहेगा। यह अनु मलिक का गीत है। यह सोनू निगम और रूप कुमार राठौड़ का गीत है। हम इस पर किसी भी तरह से अपना दावा नहीं कर रहे हैं। उनके न लिखने पर हमें इसे दोबारा लिखना पड़ा। हमने जो कुछ भी किया है, वह पूरी तरह से उनके द्वारा रची गई भावनाओं पर आधारित है। हमने इसमें केवल अपना योगदान दिया है। इस मायने में, हम महज एक सेतु थे।
मैं खुद ‘बॉर्डर’ के गीतों का प्रशंसक रहा हूं
गीतकार ने आगे कहा कि इस देश के लोगों को आज भी सोनू निगम और रूप कुमार राठौड़ को जश्न मनाते देखना बेहद खूबसूरत लगता है। हम उस प्रक्रिया का एक बहुत छोटा सा हिस्सा हैं। यह गीत उनका है और हमेशा उनका ही रहेगा। मैं खुद ‘बॉर्डर’ के गीतों का प्रशंसक रहा हूं। अनु मलिक और जावेद अख्तर साहब को उस संगीत के रचनाकार होने पर जो गर्व है, वही गर्व मिथुन और मुझे भी है। हम उस विरासत के रचनाकार नहीं हैं। हम वो लोग हैं जो उसे सुनते हुए बड़े हुए हैं। हमने उससे सीखा है। संगीत के प्रति हमारा सम्मान बॉर्डर जैसी फिल्मों और ऐसे ही गानों से आया है।
यह राष्ट्र के लिए प्रेम गीत है
मनोज मुंतशिर ने कहा कि अतीत को पीछे छोड़ने का कभी कोई प्रयास नहीं किया गया। यह फिल्म 27 साल बाद बन रही है, संगीत कई मायनों में बदल चुका है। दर्शक बदल चुके हैं, सिनेमा बदल चुका है। जो कहानी हम आज सुना रहे हैं, वह वही कहानी नहीं है। हमने इसे अपने तरीके से सुनाया है। हमने आज के समय को ध्यान में रखते हुए इसमें अपना थोड़ा सा योगदान दिया है। बस इतना ही। जब हम बॉर्डर 2 के लिए गाने बना रहे थे, तो हमने उन्हें किसी भी प्रेम गीत की तरह ही लिया। यह हमारा सबसे बड़ा प्रेम गीत है। फर्क सिर्फ इतना है कि यह राष्ट्र के लिए है।
जावेद अख्तर ने ‘बॉर्डर 2’ में गाने लिखने से मना कर दिया था
मनोज मुंतशिर ने ‘बॉर्डर 2’ में ‘घर कब आओगे’ और ‘जाते हुए लम्हों’ गीत लिखे हैं। जावेद अख्तर ने पिछले दिनों कहा था कि उन्होंने ‘बॉर्डर 2’ के गीत लिखने से मना कर दिया था। उनका मानना है कि पुराने क्लासिक गानों को फिर से री-क्रिएट करना रचनात्मक दिवालियापन है। इसके बाद ही इन गानों को लेकर एक बहस शुरू हो गई।