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यारी है ईमान मेरा...मन्ना डे ने पूरे माहौल को बनाया पठानी, जानिए कैसे?

Sun, 22 Oct 2017 03:46 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
टीम डिजिटल/ अमर उजाला Updated Sun, 22 Oct 2017 03:46 PM IST
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Memory of manna dey

जंजीर फिल्म ने एक अध्याय खोला था। यहीं से अमिताभ को उंचाई मिली थी। लेकिन बात यहां जंजीर के उस गीत की हो रही है, जो अमिताभ पर तो नहीं फिल्माया गया था, लेकिन जंजीर के उस गीत ने खासी शोहरत बटोरी थी।

Memory of manna dey

यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी... मन्नाडे के स्वरों में यह गीत हर जगह गूंज रहा था। कल्याणजी आनंदजी इस धारा के साथ खड़े हो गए। पर्दे पर प्राण पठान बन कर गा रहे थे और पार्श्व में मन्ना डे के स्वर थे।

Memory of manna dey

गीत संगीत की तैयारी ऐसी कि सचमुच पठानी माहौल सा बन गया।  तब जाना कि रबाब बजाने वाले को भी काबुल से बुलाया गया था। मन्ना डे ने उससे कई तरह की जानकारी लेते रहे। वहां के मिजाज को समझते रहे। 

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Memory of manna dey

उन्होंने गीत का एक एक शब्द का सही उच्चारण समझने की कोशिश की थी। रबाब ढोल और तीन वायलेन के साथ सजा था यह गीत। मन्नाडे ने पूरे रंग में गाया।

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Memory of manna dey

कौन कह सकता था कि शास्त्रीय और उदासी के स्वरों के लिए जाने गए मन्ना दा इस तरह के गीत को भी इतनी बखूबी गवा सकते हैं। एक बार उन्होंने कहा कि हम एसडी बर्मन के संगीत के कायल थे।

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