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Nitish Bharadwaj: नीतीश भाद्वाज ने 'ओपेनहाइमर' गीता विवाद पर दी प्रतिक्रिया, बोले- नोलन के मैसेज को समझें
डायरेक्टर क्रिस्टोफर नोलन की बनी फिल्म 'ओपेनहाइमर' शुक्रवार को 'बार्बी' के साथ दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। जिसे दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। इस फिल्म में हॉलीवुड के फेमस एक्टर सिलियन मर्फी, रॉबर्ट डाउन जूनियर के साथ कई बेहतरीन कलाकारों ने काम किया है। यह फिल्म दुनिया का पहला परमाणु बम बनाने वाले वैज्ञानिक जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर के जीवन पर आधारित है।
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नीतीश भारद्वाज
- फोटो : सोशल मीडिया
यह फिल्म एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस फिल्म में इंटिमेट सीन के दौरान संस्कृत के श्लोक को बोला गया, जिसे भगवद गीता का हिस्सा कहा जा रहा है। ऐसे में अब टीवी शो ‘महाभारत’ में कृष्ण का किरदार निभा चुके नितीश भारद्वाज ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। आइए आपको बताते है नितीश भारद्वाज ने क्या कहा है?
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नीतीश भारद्वाज
- फोटो : सोशल मीडिया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नीतीश भारद्वाज ने कहा, 'गीता मूल रूप से युद्ध के मैदान के बीच में कर्तव्य की भावना सिखाती है। हमारी लाइफ का स्ट्रग्ल भी मुख्य रूप से इमोशनल, युद्ध के मैदान हैं। श्लोक 11.32 में अर्जुन को एक योद्धा के रूप में अपना कर्तव्य निभाने के लिए भी कहा गया था, जो कि बुराई से लड़ना है। कृष्ण के पूरे श्लोक को ठीक से समझना चाहिए। वह कहते हैं कि मैं शाश्वत काल हूं जो हर चीज को मार डालूंगा; इसलिए हर कोई मर जाएगा भले ही आप उन्हें न मारें, इसलिए अपना कर्तव्य निभाएं'।
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नीतीश भारद्वाज
- फोटो : सोशल मीडिया
नीतीश भारद्वाज ने आगे कहा ‘जब ओपेनहाइमर ने परमाणु बम बनाया और इसका इस्तेमाल जापान की ज्यादातर आबादी को मारने के लिए किया गया तो वह खुद सवाल कर रहे थे कि क्या उन्होंने अपना कर्तव्य ठीक से निभाया! उनके फेमस इंटरव्यू में उन्हें रोते हुए दिखाया गया था, जिसका मतलब है कि उन्हें शायद अपने आविष्कार पर पछतावा हुआ था। उन्होंने शायद देखा था कि उनका आविष्कार भविष्य में मानव जाति को नष्ट कर देगा और उन्हें शायद पछतावा था। फिल्म में इस वर्स के इस्तेमाल को ओपेनहाइमर के इमोशनल स्टेट से भी समझा जाना चाहिए। एक साइंटिस्ट अपनी क्रिएशन के बारे में 24x 7×365 दिन सोचता है, चाहे वह कुछ भी कर रहा हो। उसका माइंड स्पेस पूरी तरह से उसकी क्रिएशन में समा जाता है और फिजिकल एक्ट सिर्फ एक नेचुरल मैकेनिकल एक्ट है'।
तो वहीं, नीतीश भारद्वाज भारत ने दर्शकों से अपील की कि वो नोलन के मैसेज को सही से समझें। 'मैं दर्शकों से कहना चाहता हूं कि वो ओपेनहाइमर की लाइफ के महत्वपूर्ण पलों के इमोशनल पहलू के बारे में विचार करें। क्या वह सही साबित नहीं हुआ है कि बिना किसी तुक के एक इंडीविजुअल या एक राष्ट्र या एक प्लैनेट होने के नाते, अब हम टेरिटोरियल और कमर्शियल सुपीरियॉरिटी के मानवीय लालच के लिए, सभी विस्फोटक तकनीकों को अपनी ही जाति को मारते हुए देख रहे हैं। आज स्थिति कुरूक्षेत्र जैसी ही है। यही वजह है कि ब्राह्मणों और क्षत्रियों ने जानबूझकर इसका प्रचार नहीं किया। युद्ध का वेद – धनुर्वेद. संयुक्त राष्ट्र को परमाणु निरस्त्रीकरण को गंभीरता से लागू करना चाहिए. नोलन का मैसेज जोरदार और क्लियर है।
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