बॉलीवुड की पहली हास्य कलाकार टुनटुन ने 60 के दशक में दर्शकों को खूब हंसाया। उन्हे देखते ही दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में जन्मीं टुनटुन का असली नाम उमा देवी खत्री था। लेकिन मोटे होने की वजह से उन्हें लोग टुन टुन बुलाने लगे थे। बचपन मे ही टुनटुन के माता-पिता का निधन हो गया था। उनका पालन पोषण चाचा ने किया। 11 जुलाई को जन्मी टुनटुन ने कई बॉलीवुड फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा बिखेरा। वह एक गायिका बनाना चाहती थीं। आज उनके जन्मदिन के मौके पर बात करेंगे उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातों की। तो चलिए शुरू करते हैं...
Tun Tun: बचपन में उठ गया था मां-बाप का साया, भाई की भी हुई थी हत्या, ऐसे बनीं टुनटुन बॉलीवुड की पहली कॉमेडियन
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संगीत की कोई औपचारिक तालीम न होने पर भी उनकी आवाज में एक खास मिठास थी। उनके संगीत पर नूरजहां और शमशाद बेगम का प्रभाव साफ नजर आता था। टुनटुन को बचपन से ही गाना गाने का बहुत शौक था। वो अक्सर रेडियो से गाने सुनकर उसका रियाज किया करती थीं। टुनटुन की बचपन से ही तमन्ना थी कि मुंबई जाकर गायकी में अपना करियर बनाएं, लेकिन उस दौर में लड़कियों का पढ़ाई करना तक मुश्किल था। तो गायिका बनना तो दूर की बात थी। लेकिन उनकी किस्मत में तो बॉलीवुड के पर्दे पर चमकना लिखा
एक दिन उनकी एक सहेली उनके गांव गई थी, जो मुंबई में कई फिल्म वालों को जानती थी। उसके साथ टुनटुन मुंबई चली आईं। मुंबई आकर उन्होंने संगीतकार नौशाद से मिलीं। नौशाद के सामने वो जिद पर अड़ गईं कि अगर उन्हें गाने का मौका नहीं मिला, तो वो उनके बंगले से समुद्र में कूद जाएंगीं। जिसके बाद नौशाद साहब ने टुनटुन का छोटा सा ऑडिशन लिया और उनकी आवाज से प्रभावित होकर उन्हें तुरंत काम दे दिया। दिल्ली में किसी ने उन्हें निर्देशक नितिन बोस के असिस्टेंट जव्वाद हुसैन का पता दिया था। वो मुंबई आकर उनसे मिलीं और उन्होंने ही टुनटुन को पनाह दी। वर्ष 1947 में उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला। टुन टुन का पहला गीत फिल्म 'दर्द' में 'अफसाना लिख रही हूं' था। ये गाना सुपरहिट हुआ और टुनटुन की किस्मत चमक गई।
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टुन टुन का ये गाना एक पाकिस्तानी अख्तर अब्बास काजी को इतना पसंद आया कि वो अपना मुल्क छोड़कर भारत आ गए और टुन टुन से शादी कर ली। अख्तर टुन टुन के पुराने जानने वाले थे। इसके बाद तो टुन टुन ने लगातार करीब 45 गाने गाए। बच्चा होने के बाद टुन टुन का वजन लगातार बढ़ता जा रहा था। लेकिन नौशाद ने उनकी अभिनय प्रतिभा को पहचाना और फिल्म 'बाबुल' में काम करने का मौका दिया। टुन टुन का किरदार लोगों को बेहद पसंद आया और देखते ही देखते वो एक कॉमेडी एक्ट्रेस बन गईं।
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अपने पांच दशक के करियर में टुनटुन ने करीब 200 फिल्मों में काम किया। 90 के दशक में पति की मौत के बाद उन्होंने फिल्मों से खुद को अलग कर लिया। उनकी मशहूर फिल्मों में 'आरपार', 'प्यासा', 'मिस्टर ऐंड मिसेज फिफ्टी फाइव' और 'मोम की गुड़िया' शामिल हैं। टुनटुन के पेरेंट्स और भाई की हत्या जमीन विवाद में कर दी गई थी।
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