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'बंदूक उठाना चाहता था'; नक्सली बनने वाले थे पवन कल्याण! बोले- 'भाई चिरंजीवी की प्रेरणा से बदला रास्ता'

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Thu, 11 Jun 2026 09:53 AM IST
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सार

Pawan Kalyan Wanted to Become Naxalite: आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं एक्टर पवन कल्याण ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका कहना है कि वे नक्सली बनना चाहते थे। मगर, भाई ने उन्हें राह बदलने के लिए प्रेरित किया।

Deputy CM and actor Pawan Kalyan wanted to pick up the gun and become a Naxalite In His late teens
पवन कल्याण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

साउथ सिनेमा जगत के चर्चित अभिनेता और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने हाल ही में बताया कि एक दौर था जब वे नक्सली बनने की राह पर निकलने वाले थे। वे बंदूक उठाना चाहते थे। यह वो वक्त था, जब वे अपनी किशोरावस्था में थे। हालांकि, बड़े भाई चिरंजीवी के दखल और प्रेरणा के बाद उन्होंने अपनी राह बदली।



बड़े भाई चिरंजीवी की प्रेरणा से बदला फैसला
पवन कल्याण ने हाल ही में समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में यह चौंकाने वाले खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वे एक अलग ही राह पर बढ़ने वाले थे। पवन कल्याण ने कहा कि वे करीब-करीब नक्सली बन ही गए। कुछ सार्वजनिक बैठकों में शामिल भी हुए थे। मगर, बाद में उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया। पवन कल्याण के मुताबिक, 'जब मैं अपनी किशोरावस्था के आखिरी दौर में था, तो मैं बंदूक उठाकर नक्सली बनना चाहता था। तभी मेरे भाई ने मुझे एक अधिक रचनात्मक रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया'।
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क्यों आया था पवन कल्याण को गुस्सा?
पवन कल्याण ने बताया कि दुनिया के हालात देखकर उन्हें काफी गुस्सा आया करता था। उन्होंने कहा कि वे 80 के दशक में किशोरावस्था में थे। तब उन पर साउथ अफ्रीका में रेसिज्म, श्रीलंका में लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) आंदोलन, कोल्ड वॉर का असर, एक हुए जर्मनी में अशांति, खालिस्तानी उग्रवाद जैसी चीजों का असर पड़ रहा था। पवन कल्याण के मुताबिक, 'मेरे मन में नक्सली बनने का विचार आया था। मैं बंदूक उठाना चाहता था। तभी मेरे भाई ने मुझे कुछ बेहतर और रचनात्मक करने को प्रेरित किया। 

17 से 21 की उम्र तक चला सिलसिला
पवन कल्याण ने बताया कि भाई ने मुझसे पूछा, 'यह पागलपन भरा गुस्सा कहां से आ रहा है?' मैंने कहा, 'मैं अन्याय के बारे में बात कर रहा हूं। मेरे विचार और फैसले को लेकर वे परेशान थे'। पवन कल्याण से जब पूछा कि यह चीजें कितने समय तक चलीं? इस पर उन्होंने बताया कि यह सिलसिला 17 से 21 साल की उम्र तक चला। यही वह उम्र होती है, जब आप ऐसे कामों में जा सकते हैं'।

बोले- 'एक प्रयोग था, इससे खुश भी नहीं थे'
पवन कल्याण ने यह भी कहा कि वे नक्सली बनने के फैसले को लेकर एकदम क्रेजी थे। उन्हें लगा कि यही इसका समाधान होगा। वे छात्रों के साथ जन-सभाओं में जाते थे, जहां उन्हें कोई नहीं जानता था। वह शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने और डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए मुंबई जाते थे। उन्होंने माना कि वह एक तरह से प्रयोग कर रहे थे, लेकिन इन सबसे खुश नहीं थे और फंसा हुआ और गुस्सा महसूस कर रहे थे।

समझाने के लिए चिरंजीवी ने क्या कहा था?
पवन ने आगे कहा, 'तभी मेरे भाई ने दखल दिया। उन्होंने बस एक बात कही। अगर तुम्हारा भाई चिरंजीवी नहीं होता, अगर परिवार के प्रति तुम्हारी जिम्मेदारियां होतीं, अगर कोई तुम्हारी सैलरी और कड़ी मेहनत पर निर्भर होता, तो क्या तुम वही करते? मैं जवाब नहीं दे सका। मेरे पास कोई जवाब नहीं था, मैं चुप रहा'। पवन कल्याण ने बताया कि इसके बाद एक्टिंग क्लास में जाने से पहले उन्होंने आध्यात्मिकता का रास्ता अपनाया।

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