'गुजारिश' ही नहीं, इन फिल्मों में भी दिखाई गई इच्छा मृत्यु की कहानी; एक में काजोल की थी मुख्य भूमिका
Movies On Passive Euthanasia: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को करीब 13 साल से कोमा की स्थिति से जूझ रहे एक 31 वर्षीय शख्स के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी है। यह देश में पहला मामला है, जब सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय पहलू से जुड़े इच्छामृत्यु के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। इस संवेदनशील विषय पर कुछ फिल्में भी बन चुकी हैं। जानिए इनके बारे में...
विस्तार
जीवन अगर एक खूबसूरत उपहार है, तो मृत्यु एक अटल सत्य है। दोनों ही प्रक्रिया सहज और प्राकृतिक रूप से हो, लोग इसके लिए प्रार्थना करते हैं। मगर, कई बार हालात ऐसे होते हैं कि परिवार और शुभचिंतक एक दोराहे पर आ खड़े होते हैं। ऐसी ही स्थिति से 31 वर्षीय हरीश राणा का परिवार गुजर रहा है।
साल 2013 में एक हादसे के बाद हरीश कोमा में हैं। वर्षों तक उपचार करवाने के बाद भी जब हरीश की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ तो माता-पिता ने बेटे को इच्छामृत्यु के लिए अदालत से गुहार लगाई। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति देते हुए आदेश पारित किया।
भारतीय सिनेमा में भी इच्छामृत्यु जैसे संवेदनशील विषय पर कई फिल्में बन चुकी हैं पर ये उतनी कमर्शियल हिट नहीं हुई कि इनका नाम लोगों की जुबां पर चढ़ जाए। आज किसी से पूछो तो उसे इस विषय पर सिर्फ ऋतिक और ऐश्वर्या स्टारर 'गुजारिश' का ही नाम याद आता है। इस खबर में जानिए इच्छामृत्यु विषय पर बनी फिल्मों के बारे में...
शायद
फिल्म 'शायद' (1979) को भारतीय सिनेमा की ऐसी फिल्म के रूप में जाना जाता है, जिसने बहुत पहले ही 'इच्छामृत्यु' (Euthanasia) या 'दया-मृत्यु' (Mercy Killing) जैसे संवेदनशील विषय पर चर्चा छेड़ी। इसमें नसीरुद्दीन शाह और सिमी गरेवाल अहम भूमिका में नजर आए। फिल्म यह सवाल उठाती है कि क्या एक टर्मिनल मरीज (लाइलाज बीमारी से तड़प रहा हो) को जीने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए?
'गुजारिश'
संजय लीला भंसाली के निर्देशन में ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय अभिनीत यह फिल्म इसी संवेदनशील और मानवीय विषय पर आधारित है। फिल्म में एक लकवाग्रस्त जादूगर एथन मस्करेन्हा (ऋतिक रोशन) की कहानी दिखाई गई है। एक हादसे में आंशिक रूप से लकवाग्रस्त एथन अदालत से इच्छामृत्यु मांगता है। साल 2010 में रिलीज हुई भंसाली की यह फिल्म इच्छामृत्यु विषय चर्चा करने वाली पहली मुख्यधारा की बॉलीवुड फिल्मों में से एक मानी जाती है।
सलाम वेंकी
यह फिल्म साल 2022 में रिलीज हुई थी। रेवती के निर्देशन में बनी 'सलाम वेंकी' एक सच्ची कहानी पर आधारित फिल्म है। इसमें एक युवक की अपनी गरिमापूर्ण मृत्यु और अंगों को दान करने के लिए यूथनेशिया की कानूनी लड़ाई को दिखाया गया है। फिल्म में काजोल और विशाल जेठवा हैं।
पुपा
इंद्रशीष आचार्य द्वारा निर्देशित साल 2018 में आई बंगाली ड्रामा फिल्म 'पुपा' (Pupa)भी इच्छामृत्यु विषय पर आधारित है। इस फिल्म में पारिवारिक रिश्तों की जटिलताओं को दिखाया गया है। फिल्म की कहानी एक एनआरआई के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कोमा में गए अपने पिता की देखभाल के लिए भारत लौटता है। अचानक वह भावनात्मक व नैतिक दुविधा में फंस जाता है।
'पैसिव यूथेनेशिया-कहानी करुणा की'
यह साल 2014 में आई एक डॉक्यूमेंट्री है। इसका निर्देशन चेतन शाह ने किया है। यह फिल्म अरुणा शानबाग के ऐतिहासिक मामले पर केंद्रित है। यह भारत में पैसिव यूथनेशिया की अनुमति देने वाले 2011 के कानून और 'लिविंग विल' की जरूरत पर बात करती है।
क्या था अरुणा शानबाग का केस?
भारत में इच्छा मृत्यु पर सबसे बड़ी चर्चा साल 2011 में अरुणा शानबाग केस से शुरू हुई मानी जाती है। अरुणा शानबाग मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉस्पिटल में नर्स थीं। मुंबई के किंग एडवर्ड्स मेमोरियल अस्पताल में नर्स अरुणा शानबाग के साथ 1973 में उसी अस्पताल के एक वार्ड बॉय ने बलात्कार किया था।
इसके बाद कुत्तों को बांधने वाली जंजीर से गला घोंटकर उसकी जान लेने की भी कोशिश की। दिमाग में ऑक्सीजन की सप्लाई न पहुंचने के कारण वह कॉमा में चली गईं और 42 साल बाद 18 मई, 2015 को उसकी मौत हो गई।
ये फिल्में भी हैं इस मुद्दे पर
विदेशी सिनेमा में भी इस विषय पर फिल्में बन चुकी हैं। स्पेनिश फिल्म 'द सी इनसाइड' रेमन साम्पेड्रो की सच्ची कहानी है, जिन्होंने 28 वर्षों तक इच्छामृत्यु के अपने अधिकार के लिए संघर्ष किया। इसके अलावा 'मिलियन डॉलर बेबी' (2004) फिल्म में एक मुक्केबाज और उसके कोच के बीच के गहरे रिश्ते और अंततः जीवन के अंत से जुड़े कठिन निर्णय को दिखाया गया है।
साल 1981 में आई 'व्हूज लाइफ इज इट एनीवे'? फिल्म एक कलाकार की कहानी है, जो गर्दन के नीचे से लकवाग्रस्त हो जाता है और मृत्यु की अनुमति के लिए मुकदमा लड़ता है। इसके अलावा 2021 में आई 'डॉर्मेंट ब्यूटी' फिल्म भी है।
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