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Hindi News ›   Entertainment ›   Khushbu Sundar questioned National Awards selection process amid criticism of Raayan win Dhanush film

खुशबू सुंदर ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार चयन की प्रक्रिया पर उठाए सवाल; बोलीं- 'दूसरों की तरह मुझे भी संदेह है'

Wed, 05 Aug 2026 02:46 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Wed, 05 Aug 2026 02:46 PM IST
सार

Khushbu On National Awards Selection: धनुष की फिल्म 'रायन' को  सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है। इसे लेकर आलोचना हो रही हैं। इस बीच अभिनेत्री-पॉलिटिशियन खुशबू सुंदर ने भी नेशनल अवॉर्ड की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

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Khushbu Sundar questioned National Awards selection process amid criticism of Raayan win Dhanush film
खुशबू सुंदर- 'रायन' - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

फिल्म 'रायन' के  बेस्ट तमिल फिल्म का अवॉर्ड जीतने पर विवाद छिड़ा है। तमाम लोग आलोचना कर रहे हैं। इस बीच अभिनेत्री-राजनेता खुशबू सुंदर ने सवाल उठाया है कि नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की जूरी कैसे बनती है? और फिल्मों को कैसे परखा जाता है? उनके इस बयान ने इस बड़ी बहस को और हवा दे दी है कि क्या अलग-अलग भाषाओं की क्षेत्रीय फिल्मों को बराबर अहमियत मिलती है?

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खुशबू सुंदर ने क्या कहा?
खुशबू ने बिहाइंडवुड्स के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि अवॉर्ड्स को लेकर जो शक हैं, वे सिर्फ उनके नहीं हैं। उन्होंने पूछा, 'दूसरों की तरह मुझे भी शक है। नेशनल अवॉर्ड्स किस आधार पर दिए जा रहे हैं? सिलेक्शन कमिटी या जूरी किस आधार पर बनाई जाती है'? अभिनेत्री ने साफ किया कि उनकी चिंता अवॉर्ड देने की प्रक्रिया को लेकर थी, न कि किसी खास फिल्ममेकर या फिल्म के बारे में। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या छोटी क्षेत्रीय इंडस्ट्रीज की बेहतरीन फिल्मों को भी बड़ी इंडस्ट्री की फिल्मों जितना ही महत्व दिया जाता है?

अभिनेत्री ने पूछा- 'हमेशा हिंदी फिल्मों को ही क्यों'?
उन्होंने कहा, 'अगर वे एक फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार दे रहे हैं, तो हो सकता है कि एक उड़िया फिल्म भी उससे बेहतर हो। इसके बजाय उड़िया फिल्म क्यों नहीं जीती? जब एक गुजराती फिल्म शानदार है, तो उसे संपूर्ण मनोरंजन पुरस्कार क्यों नहीं दिया जाता है? यह हमेशा हिंदी फिल्मों को ही क्यों दिया जाता है, क्षेत्रीय फिल्मों को क्यों नहीं'?

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जूरी के विषय में क्या बोलीं खुशबू?
खुशबू ने यह भी माना कि उन्हें इस पर भी हैरानी है कि क्या जूरी कुछ फिल्मों की लोकप्रियता या उनके बारे में लोगों की आम राय से प्रभावित हो सकती है। हालांकि, उन्होंने जूरी सदस्यों पर किसी भी तरह की गड़बड़ी का आरोप नहीं लगाया। उन्होंने कहा, 'कभी-कभी मुझे लगता है कि जूरी सदस्य किसी वेव या आम सोच में बह जाते हैं कि साल की सबसे बड़ी फिल्म कौन सी थी? लेकिन मुझे नहीं लगता कि सलेक्शन कमिटी के मामले में कोई अस्पष्टता या संदेह की गुंजाइश है'।

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'रायन' की जीत पर अलग-अलग राय
खुशबू की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब 'रायन' के राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने पर लोगों की अलग-अलग राय है। धनुष निर्देशित फिल्म को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म अनाउंस किया गया था। दर्शकों के एक वर्ग का तर्क था कि 'मियाझागन', 'अमरन' और 'महाराजा' जैसी फिल्में इस सम्मान के लिए अधिक मजबूत दावेदार थीं। वहीं, कुछ लोगों ने फैसले का स्वागत किया। तमिल फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का भी समर्थन मिला। म्यूजिक कंपोजर डी. इम्मान ने इस सम्मान का समर्थन करते हुए इसे तमिल लोगों की जीत बताया और दर्शकों से इसकी कामयाबी का जश्न मनाने की अपील की।

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