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Mahakumbh 2025: कुंभ में मची भगदड़ पर फिल्म बना रहे थे बिमल रॉय, आधी शूट हुई पर रिलीज नहीं हो पाई; जाने क्यों?

Sat, 25 Jan 2025 01:33 PM IST
सुवेश शुक्ला एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: सुवेश शुक्ला Updated Sat, 25 Jan 2025 01:33 PM IST
सार

Mahakumbh 2025: मशहूर फिल्ममेकर बिमल रॉय कुंभ पर एक फिल्म बनाना चाहते थे, जो एक उपन्यास पर आधारित थी। हालांकि, कुछ ऐसा हुआ कि फिल्म बनने से रही। आइए जानते हैं यह फिल्म क्यों नहीं बन पाई?
 

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Mahakumbh 2025 Film Director Bimal Roy Movie on first kumbh based on Novel Amrit Kumbh All Details in Hindi
बिमल रॉय की 'कुंभ' पर बनी फिल्म रह गई अधूरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

‘महाकुंभ 2025’ का आयोजन पूरे विश्व के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। भारत समेत दुनिया के कोने-कोने से लोग पवित्र संगम में स्नान करने के लिए आ रहे हैं। कुंभ हमेशा से भारतीय सिनेमा को भी अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। कई फिल्मों में कुंभ मेले की झलक दिखाई गई है। कुंभ के मेले में अपनो से बिछड़ जाने की कहानी हो या धार्मिक महत्व को उजागर करने की, बड़े पर्दे पर फिल्ममेकर्स ने इसे बखूबी उतारा है। हालांकि, कुछ एक ऐसी फिल्में भी हैं, जो कुंभ पर आधारित थीं पर बन नहीं पाईं। आज हम बिमल रॉय की उस अधूरी फिल्म की बात करेंगे, जो कुंभ के भगदड़ पर आधारित थी और रिलीज नहीं हो सकी। 

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इस उपन्यास पर आधारित थी फिल्म
‘प्रयागराज और कुंभ’ नाम की किताब में इस बात का जिक्र आता है कि मशहूर उपन्यासकार समरेश बसु ने 'अमृत कुंभ की खोज में' नाम से एक उपन्यास लिखा था। इस किताब में साल 1954 के कुंभ मेले में मची भगदड़ का जिक्र था। यह उपन्यास साल 1955 में कलकत्ता से प्रकाशित होने वाले बांग्ला अखबार 'आनंद बाजार' में सीरीज के तौर पर प्रकाशित हुआ था। इसकी शुरुआत मुसाफिरों से खचाखच भरी ट्रेन से होती है, जिसमें बलराम, जो डुबकी लगाने जा रहा था वो भीड़ के पैरों तल कुचलकर मारा जाता है।

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पूरी हो चुकी थी आउटडोर शूटिंग
इस किताब पर मशहूर फिल्मकार बिमल रॉय हिंदी फिल्म बनाना चाहते थे। गीतकार गुलजार इसकी पटकथा लिख रहे थे। फिल्म को छोटे-छोटे भागों में शूट किया जा रहा था। अन्य मेलों में जाकर इसकी आउटडोर शूटिंग भी कर ली गई थी। 


प्रयागराज में भी हुई फिल्म की शूटिंग
इस फिल्म को साल 1962 में रिलीज करने की तैयारी थी, लेकिन इस बीच बिमल रॉय बीमार पड़ गए। हालांकि, उन्होंने गुलजार और सीनियर कैमरामैन कमल बोस को मेले में जाकर शूट करने के लिए कहा। इलाहाबाद (प्रयागराज) जाने के पहले गुलजार को पता चल गया था कि बिमल रॉय को कैंसर हो गया है। वह दुखी मन से प्रयागराज जाकर शूटिंग करने लगे। हालांकि, बिमल रॉय की बीमारी के चलते टीम के बाकी लोग भी हताश हो गए और उन्हें फिल्म के अटक जाने का डर था। 


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और फिर रुक गई फिल्म की शूटिंग
टीम प्रयागराज में शूटिंग खत्म करने के बाद मुंबई लौट आई। तब तक बिमल रॉय की सेहत और भी खराब हो चुकी थी। एक दिन वह गुलजार से पूछ बैठे कि वह फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं या नहीं? गुलजार ने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर बिमल रॉय भड़क गए और गुलजार से कहा कि फिल्म की शूटिंग को जल्द खत्म करें। गुलजार ने जवाब दिया कि वह रोज शाम स्क्रिप्ट पर बात करेंगे और रोज इसे लेकर बात होती रही। हालांकि, टीम को जिस बात का डर था वही हुआ। 8 जनवरी 1965 को बिमल रॉय दुनिया को अलविदा कह गए और यह फिल्म डब्बा बंद हो गई और रिलीज नहीं हो पाई।

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