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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Review ›   film review of John Abraham parmanu The Story of Pokhran

Film review: जॉन अब्राहम का परमाणु मिशन कामयाब रहा या नहीं, देखना काफी रोमांचक होगा

Fri, 25 May 2018 01:42 PM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Fri, 25 May 2018 01:42 PM IST
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film review of John Abraham parmanu The Story of Pokhran
-निर्माताः जॉन अब्राहम
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-निर्देशकः अभिषेक शर्मा
-सितारेः जॉन अब्राहम, डायना पैंटी, बोमन ईरानी
 रेटिंग ***1/2

    
परमाणुः द स्टोरी ऑफ पोखरन में देशप्रेम के गर्व से भरने वाला रोमांच है। यहां ऐसा इतिहास है, जो पता है लेकिन देखने में अच्छा लगता है। यह खबरों की भीड़ में एक खबरिया फिल्म है जो किसी न्यूज चैनल पर प्रसारित नहीं हुई। इसका थ्रिल बांधता है क्योंकि दुश्मनों की भी नजर मिशन पर लग चुकी है। वे लगातार आपकी पीठ दीवार से लगाए रखना चाहते हैं। ऐसे विपरीत माहौल में क्रिकेट के पिच पर बैकफुट से लगाए गए खूबसूरत स्ट्रेट ड्राइव की तरह है,

पोखरन में 1998 किए गए परमाणु परीक्षणों की यह कहानी। निर्देशक अभिषेक शर्मा और उनके राइटरों ने गहरे शोध के साथ 1990 की दुनिया में भारत की स्थिति को यहां दिखाया है। तब कैसे अमेरिका अपने जासूसी सैटेलाइटों से सब पर नजर रखता था और चीन-पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से निपटना एक चुनौती थी। इन हालात में जरूरी था कि भारत आंखें दिखाने वालों को बाहुबल का एहसास कराता। यह संभव था केवल परमाणु विस्फोट करके। जो उसने 1998 में कर दिखाए।
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film review of John Abraham parmanu The Story of Pokhran
परमाणु की कहानी सच्ची घटनाओं पर आधारित है लेकिन इसे थोड़ा फिल्मी टच दिया गया है। कहानी 1990 के दशक के मध्य में शुरू होती है। प्रधानमंत्री दफ्तर में ऑफिसर अश्वत रैना (जॉन अब्राहम) को देशभक्ति विरासत में मिली है। जब देश के नेता अमेरिकी धमकियों और चीनी-पाकिस्तानी घुड़कियों के कागजी विरोध की बात कर रहे होते हैं तो अश्वत प्रस्ताव रखता है कि परमाणु परीक्षण करके ही इन्हें ताकत दिखाई जा सकती है।

मगर जब 1995 में भारत की परमाणु परीक्षण की कोशिश अमेरिका की नजर में आ जाती है और परीक्षण रोकने पड़ते हैं तो गाज अश्वत पर गिरती है। वह नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाता है। 1998 आते-आते सरकार/हालात बदलते हैं। अश्वत को फिर मौका मिलता है। इस बार अश्वत और उसकी टीम अमेरिकी जासूसी सैटेलाइटों को कैसे चकमा देकर मिशन को अंजाम तक पहुंचाती है, वह थ्रिलर वाले अंदाज में यहां दिखाया गया है।

film review of John Abraham parmanu The Story of Pokhran
परमाणु का थ्रिल सधा हुआ है और कहानी निशाना साधने के लिए निकले रॉकेट की तरह बढ़ती है। आप जानते हैं कि लक्ष्य भेद दिया जाएगा। पोखरन के ये परीक्षण बहुत दूर का इतिहास नहीं है, केवल बीस साल पुरानी बात है। परंतु इसे पर्दे पर घटते देखना सुखद अनुभव है। पोरखन के परमाणु परीक्षण देश के लिए गर्व के क्षण थे, फिल्म हमें उनका साक्षी होने का एहसास देती है। जॉन अब्राहम, डायना पैंटी और बोमन ईरानी अपने किरदारों में फिट हैं।

बैकग्राउंड संगीत अच्छा है। इस कहानी में आम देशप्रेमी फिल्मों की तरह कहीं पाकिस्तान की भर्त्सना का राग नहीं है और न ही किसी देश को शत्रु बताने की कोशिश है। फिल्म अपनी ताकत को बढ़ाने के लक्ष्य और दुनिया में अपना लोहा मनवाने की जिद के साथ आगे बढ़ती है। यहां अमेरिका की जरूर पोल खुलती है कि कैसे वह दुनिया पर अपना दबदबा रखने के लिए विभिन्न देशों की सैटेलाइटों से जासूसी कराता है। फिल्म में ज्ञानवर्द्धन करने वाली कई रोचक जानकारियां हैं।
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