Rajendra Nath: जब खून के आंसू रोए सभी को हंसाने वाले राजेंद्र नाथ, कभी कॉमेडी से सुपरस्टार पर पड़ जाते थे भारी
Rajendra Nath Death Anniversary: आज हिंदी सिनेमा के महान हास्य कलाकार राजेंद्र नाथ की 17वीं पुण्यतिथि है। चलिए इस मौके पर आपको बताते हैं दिवंगत अभिनेता की जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें...
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हिंदी सिनेमा का एक ऐसा कलाकार, जिसकी खामोशी भी दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर देती थी। वह हास्य कलाकार कभी अपने हाव-भाव तो कभी अपने खास अंदाज के साथ-साथ अपनी अदाओं से भी दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ले आते थे। हम बात कर रहे हैं अभिनेता राजेंद्र नाथ की। हिंदी फिल्मों में अब भले ही हीरो खुद कॉमेडी करने लगे हों, लेकिन एक वक्त पर ये जिम्मेदारी सिर्फ हास्य कलाकारों के पास ही होती थी। फिल्म जहां कहीं भी कमजोर पड़ती, ये कलाकार अपनी काबिलियत से दर्शकों को फिल्म से बांधे रखते। कई फिल्में तो सिर्फ इन्हीं कलाकारों की वजह से हिट हुईं। ऐसे ही एक कलाकार थे राजेंद्र नाथ। 60 और 70 के दशक में राजेंद्र ने कई फिल्मों में काम किया और अपनी कला से लोगों को खूब हंसाया। आज राजेंद्र नाथ की 17वीं पुण्यतिथि है। चलिए इस मौके पर आपको बताते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें...
राजेंद्र नाथ का जन्म 8 जून 1931 में हुआ था। राजेंद्र के पिता करतार नाथ रीवा शहर के आईजी ऑफ पुलिस थे। राजेंद्र के आठ भाई और चार बहनें थीं। राजेंद्र के सबसे बड़े भाई दिवंगत अभिनेता प्रेम नाथ थे। राजेंद्र डॉक्टर बनना चाहते थे। बड़े भाई का फिल्मों में रुझान देखते हुए उनकी भी फिल्मों में रूचि बढ़ने लगी थी। ऐसे में उन्होंने अपने बड़े भाई को देखकर ही फिल्मों में काम करने के लिए अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। रीवा में स्कूलिंग पूरी करने के बाद प्रेम नाथ के कहने पर राजेंद्र नाथ भी 1947 में बॉम्बे आ गए गए।
बड़े भाई प्रेम नाथ ने निकाला घर से बाहर
राजेंद्र नाथ की बहन कृष्णा की शादी पृथ्वीराज कपूर के बेटे राज कपूर से हुई थी। ऐसे में उन्हें बॉम्बे में मदद मिल गई। राजेंद्र नाथ पहले पृथ्वी थिएटर से जुड़े, जिसके बाद उन्होंने दीवार, आहुति, पठान और शकुंतला जैसे नाटकों में हिस्सा लिया। अपने बड़े भाई प्रेम नाथ के नक्शेकदम पर राजेंद्र बॉम्बे तो आए, लेकिन काम के लेकर उनकी लापरवाही बड़े भाई से बर्दाश्त नहीं हुई। बात इतनी बढ़ी कि प्रेम ने इन्हें घर से निकाल दिया। हालांकि, वह फिल्मों में काम करने की इच्छा लिए संघर्ष करते रहे।
ऐसे मिली पहली फिल्म
राजेंद्र नाथ अपने भाई अभिनेता प्रेम नाथ की देखा देखी अभिनेता तो बन गए, लेकिन फिल्मों में उन्हें पहला किरदार पाने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ी, तब जाकर उस समय के बड़े फिल्म निर्देशकों में से एक नासिर हुसैन ने उन्हें अपनी फिल्म दिल देके देखो (1959) में छुट-पुट मजाक करने वाले एक कॉमेडियन का किरदार निभाने के लिए दिया, जिसमें उन्होंने 'कैलाश' का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उनकी कॉमिक टाइमिंग की बहुत तारीफें हुई तो नासिर हुसैन ने राजेंद्र को लगातार अपनी फिल्मों में लेना शुरू कर दिया था।
यह किरदार बना अभिनेता की पहचान
राजेंद्र नाथ ने अब तक कॉमेडी के कुछ छोटे-मोटे किरदार ही किए थे, लेकिन फिल्म जब प्यार किसी से होता है (1961) में उन्हें एक कॉमेडियन के रूप में मजबूत किरदार मिला, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। नासिर हुसैन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राजेंद्र ने पोपट लाल का ऐसा किरदार निभाया, जो कहीं ना कहीं फिल्म के मुख्य नायक देव आनंद पर भी भारी पड़ा। इस फिल्म के किरदार पोपट लाल का नाम इतना पसंद किया गया कि आगे चलकर लोग उन्हें इसी नाम से पहचानने लगे।
इस फैसले ने बना दिया कंगाल
60 और 70 के दशक में राजेंद्र ने कई फिल्मों में काम किया और अपनी कला से लोगों को खूब हंसाया। कई बार तो वे फिल्मों के मुख्य किरदारों पर भी भारी पड़ जाते थे। राजेंद्रनाथ रेडियो के लिए भी नाटक किया करते थे। 1959 से लेकर 1998 तक राजेंद्र नाथ करीब 253 फिल्मों का हिस्सा रहे। कॉमेडी के अलावा इन्होंने फिल्म निर्माण में भी हाथ आजमाया, लेकिन पहली ही फिल्म ने उन्हें बड़े कर्जे में डूबा दिया। दरअसल, साल 1974 में राजेंद्र ने अपनी सारी जमा पूंजी लगाकर फिल्म 'द गेट क्रेशर' शुरू की थी, जिसमें नीतू सिंह और रणधीर कपूर को मुख्य भूमिकाओं में कास्ट किया गया था, लेकिन यह फिल्म केवल 10 दिन में भी ठंडे बस्ते में चली गई और राजेंद्र को भी कंगाल बना गई।
जब खून के आंसू रोए राजेंद्र
दरअसल, राजेंद्र को कॉमेडी में तो महारत हासिल थी, लेकिन फिल्म मेकिंग में उन्हें कोई अनुभव नहीं था। यही उनके कंगाल होने की वजह भी बनी। जब उन्होंने पहली फिल्म बनानी शुरू की, तब कास्ट, क्रू और निर्देशक ने जो फीस मांगी, उन्होंने तुरंत ही दे दी। नतीजा ये रहा कि ओवर बजट होने से 10 दिनों में ही फिल्म की शूटिंग रुक गई। राजेंद्र अब अपने और कर्ज लिए हुए सारे पैसे लगा चुके थे, लेकिन फिल्म बनने से पहले ही रुक गई। राजेंद्र ने जिनसे कर्ज लिया था, वे उनसे पैसे मांगने लगे। एक बार साक्षात्कार में राजेंद्र ने इस बारे में बात करते हुए कहा था कि यूपी और दिल्ली के डिस्ट्रीब्यूटरों ने मुझे खून के आंसू रुलाया। मेरी स्थिति पता होते हुए भी लोगों ने मुझसे ज्यादा ब्याज लिया और एक-एक पैसे निकलवाए।
जहां से हुई शुरुआत, वहीं खत्म हुआ सफर
हालांकि, इसके बावजूद वे बतौर हास्य कलाकार फिल्मों में काम करते रहे और दर्शकों को हंसाते रहे। फिल्मों में काम करने का सिलसिला यूं ही जारी रहा। हालांकि, 1991 में बड़े भाई प्रेम नाथ के निधन के बाद राजेंद्र टूट चुके थे। फिर 1998 में उनके छोटे भाई नरेंद्र नाथ का भी निधन हो गया, जिसके बाद से धीरे-धीरे राजेंद्र ने अभिनय से दूरी बना ली थी। हालांकि, राजेंद्र 1995 में आखिरी बार टेलीविजन शो 'हम पांच' में अपनी मशहूर किरदार 'पोपट लाल' के रूप में ही नजर आए थे। फिर वह पूरी तरह से इंडस्ट्री से गायब हो गए। 13 फरवरी, 2008 को दिल का दौरा पड़ने के कारण राजेंद्र नाथ का निधन हो गया।