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Gorakhpur News: परमानंद की आलोचना में साहित्य के साथ गहरी सामाजिकता भी थी

Mon, 21 Sep 2026 02:33 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2026 02:33 AM IST
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Parmanand's criticism was characterized by a deep sense of social consciousness alongside its literary focus.
गोरखपुर। राजकीय बौद्ध संग्रहालय में शनिवार से शुरू हुई प्रख्यात आलोचक प्रो. परमानंद श्रीवास्तव पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘परमानंद श्रीवास्तव : अवदान और महत्व’ के अंतिम दिन पांच सत्र आयोजित हुए। पहले तकनीकी सत्र में छह शोधार्थियों कंचन पटेल, आकाश यादव, अखिलेश पांडेय, शिवांगी गुप्ता, नीलकमल और मृत्युंजय कुमार ने शोधपत्रों का वाचन किया।
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सत्र की अध्यक्षता कर रहे नालंदा से आए प्रो. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव परिचय दास ने कहा कि परमानंद श्रीवास्तव की आलोचना गहन लालित्य से परिपूर्ण रचना है। उनकी आलोचना केवल साहित्यिक नहीं थी, बल्कि उसमें गहरी सामाजिकता अनुस्यूत थी। विषय विशेषज्ञ के रूप में राकेश रंजन और किरन तिवारी की उपस्थिति रही।
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