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Ambala News: काम आया 10वीं पास गुरिंद्र सिंह का देसी जुगाड़
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धन्यौड़ा गांव में रेस्क्यू अभियान के दौरान टीम के संग खड़े गुरिंद्र सिंह: सोशल मीडिया
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- चार बार बोरवेल से निकाल चुके बच्चे, महज छह घंटे के भीतर जिला प्रशासन संग निकाला
अंशु शर्मा
अंबाला। जब-जब देश के किसी कोने में कोई मासूम खुले पड़े बोरवेल में गिरता है, तब-तब पंजाब के संगरूर जिले के मंगवाल गांव का एक शख्स उम्मीद की किरण बनकर सामने आता है। यह नाम है 45 वर्षीय गुरिंद्र सिंह का। महज 10वीं पास और 28 साल से बोरवेल का काम करने वाले गुरिंद्र सिंह ने एक बार फिर तकनीक और देसी जुगाड़ के दम पर जिला प्रशासन संग मिलकर 270 फीट गहरे बोरवेल में फंसे निरवैर को साढ़े छह घंटे में बाहर निकाला। हालांकि निरवैर की पहले ही मौत हो चुकी थी। निरवैर के ताया गुरप्रीत ने आंखों में आंसू लिए कहा कि अगर गुरिंद्र को पहले मौका मिलता तो शायद निरवैर बच सकता था। जिला प्रशासन को टीम में ऐसे लोग शामिल करने की जरूरत है।
रस्सी व लोहे से बनाए शिकंजे में फंसाए थे एक-एक कर दोनों हाथ
संगरूर के मंगवाल गांव निवासी गुरिंद्र सिंह (45) ने बताया कि वह धन्यौड़ा गांव निवासी हैप्पी के 4 बजकर 30 मिनट पर आए फोन के बाद भाई सोनी व भतीजा हरमन संग पहुंचे थे। 9 बजकर 30 मिनट पर जिला प्रशासन की एनडीआरएफ व एसडीआरएफ टीमों संग काम करने का मौका मिला। पहले बच्चे की पॉजीशन देखी गई थी कि वो कैसे गिरा। फिर जवानों की मदद से ही रस्सी व लोहे का सांचानुमा कुंडी तैयार की गई थी। आने के कुछ ही देर बाद बच्चे के एक हाथ में रस्सी डाली। दूसरे हाथ में रस्सी डालने लगे तो कम विजिबिलिटी और बार-बार कैमरा जाने के कारण मिट्टी पानी में गिर जाती थी। ऐसे में पानी मटमैला होने के कारण कुछ देर रुकना पड़ता था। 2 से ढाई घंटे में जाकर दूसरे हाथ में भी रस्सी बंध गई थी और खींचना शुरू कर दिया था।
बोरवेल में बच्चे की गर्दन टेढ़ी होना व कैमरा खराब होना बना चुनौती
गुरिंद्र ने बताया कि दोनों हाथ में रस्सी फंसने के बाद जैसे ही बच्चे को ऊपर खींचकर निकालने लगे तो गर्दन टेड़ी होकर बोरवेल में फंस गई थी जिससे बच्चे के सिर पर चोट आई थी। फिर चौथी कुंडी डालकर कड़ी मशक्कत के बाद गर्दन को सीधा कर खींचा गया। धीरे-धीरे काम कर रहे थे कि 170 फीट पर आने के बाद बोरवेल का कैमरा ही खराब हो गया। उसे ठीक करने में डेढ़ घंटा लगा। यह कैमरा पानी में ठीक रहता है लेकिन बाहर निकलने पर जल्दी गर्म हो जाता है। यहीं कारण रहा कि पानी से बाहर आने के बाद कैमरा ओवरहीट होकर बंद हो गया था। बाद में टीमों ने मिलकर बाहर निकाला। गुरिंद्र ने बताया कि उन्हें अंबाला आने के बाद चार घंटे तक अनुमति नहीं मिली थी, वरना वह पहले ही काम शुरू कर देते। आखिर में एसडीएम ने विश्वास दिखाया। सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर निरवैर को बाहर निकाला। इस पूरे रेस्क्यू अभियान में रस्सी की पकड़ मजबूत होना सबसे जरूरी था।
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गुरिंद्र चार रेस्क्यू अभियान का बन चुका हिस्सा
- 2019 में संगरूर में दो साल के बच्चे फतेहवीर को 129 फीट गहरे बोरवेल से 15 से 20 मिनट में निकाल लिया था, हालांकि छह दिन से बोरवेल में फंसे रहने के कारण बच्चे का देहांत हो चुका है। उस समय भी आखिर के 20 मिनट में गुरिंद्र को मौका मिला था।
- 2019 में तमिलनाडु तिराचुरापाली में 98 फीट गहरे बोरवेल में गिरे करीब तीन साल के बच्चे सुरजीत को ढाई घंटे में बाहर निकाला था। उस समय तमिलनाडु सरकार की तरफ से उन्हें हवाई जहाज के जरिये लाया व ले जाया गया था। सुरजीत की मौत हो चुकी थी।
- 2022 में होशियारपुर में 85 फीट के बोरवेल में गिरे चार साल के बच्चे सचिन को तीन घंटे में निकाला था। उसमें भी बच्चे का देहांत हो चुका था।
- 2026 में 15 मई को होशियारपुर के पेकोवाल में 25 फीट गहरे बोरवेल में से चार साल के बच्चे वंश को आठ घंटे में सुरक्षित बाहर निकाला था, इस हादसे के चार घंटे बाद ही मौका मिलने के बाद कारण बच्चे को सुरक्षित निकाला गया था।
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अंशु शर्मा
अंबाला। जब-जब देश के किसी कोने में कोई मासूम खुले पड़े बोरवेल में गिरता है, तब-तब पंजाब के संगरूर जिले के मंगवाल गांव का एक शख्स उम्मीद की किरण बनकर सामने आता है। यह नाम है 45 वर्षीय गुरिंद्र सिंह का। महज 10वीं पास और 28 साल से बोरवेल का काम करने वाले गुरिंद्र सिंह ने एक बार फिर तकनीक और देसी जुगाड़ के दम पर जिला प्रशासन संग मिलकर 270 फीट गहरे बोरवेल में फंसे निरवैर को साढ़े छह घंटे में बाहर निकाला। हालांकि निरवैर की पहले ही मौत हो चुकी थी। निरवैर के ताया गुरप्रीत ने आंखों में आंसू लिए कहा कि अगर गुरिंद्र को पहले मौका मिलता तो शायद निरवैर बच सकता था। जिला प्रशासन को टीम में ऐसे लोग शामिल करने की जरूरत है।
रस्सी व लोहे से बनाए शिकंजे में फंसाए थे एक-एक कर दोनों हाथ
संगरूर के मंगवाल गांव निवासी गुरिंद्र सिंह (45) ने बताया कि वह धन्यौड़ा गांव निवासी हैप्पी के 4 बजकर 30 मिनट पर आए फोन के बाद भाई सोनी व भतीजा हरमन संग पहुंचे थे। 9 बजकर 30 मिनट पर जिला प्रशासन की एनडीआरएफ व एसडीआरएफ टीमों संग काम करने का मौका मिला। पहले बच्चे की पॉजीशन देखी गई थी कि वो कैसे गिरा। फिर जवानों की मदद से ही रस्सी व लोहे का सांचानुमा कुंडी तैयार की गई थी। आने के कुछ ही देर बाद बच्चे के एक हाथ में रस्सी डाली। दूसरे हाथ में रस्सी डालने लगे तो कम विजिबिलिटी और बार-बार कैमरा जाने के कारण मिट्टी पानी में गिर जाती थी। ऐसे में पानी मटमैला होने के कारण कुछ देर रुकना पड़ता था। 2 से ढाई घंटे में जाकर दूसरे हाथ में भी रस्सी बंध गई थी और खींचना शुरू कर दिया था।
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बोरवेल में बच्चे की गर्दन टेढ़ी होना व कैमरा खराब होना बना चुनौती
गुरिंद्र ने बताया कि दोनों हाथ में रस्सी फंसने के बाद जैसे ही बच्चे को ऊपर खींचकर निकालने लगे तो गर्दन टेड़ी होकर बोरवेल में फंस गई थी जिससे बच्चे के सिर पर चोट आई थी। फिर चौथी कुंडी डालकर कड़ी मशक्कत के बाद गर्दन को सीधा कर खींचा गया। धीरे-धीरे काम कर रहे थे कि 170 फीट पर आने के बाद बोरवेल का कैमरा ही खराब हो गया। उसे ठीक करने में डेढ़ घंटा लगा। यह कैमरा पानी में ठीक रहता है लेकिन बाहर निकलने पर जल्दी गर्म हो जाता है। यहीं कारण रहा कि पानी से बाहर आने के बाद कैमरा ओवरहीट होकर बंद हो गया था। बाद में टीमों ने मिलकर बाहर निकाला। गुरिंद्र ने बताया कि उन्हें अंबाला आने के बाद चार घंटे तक अनुमति नहीं मिली थी, वरना वह पहले ही काम शुरू कर देते। आखिर में एसडीएम ने विश्वास दिखाया। सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर निरवैर को बाहर निकाला। इस पूरे रेस्क्यू अभियान में रस्सी की पकड़ मजबूत होना सबसे जरूरी था।
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गुरिंद्र चार रेस्क्यू अभियान का बन चुका हिस्सा
- 2019 में संगरूर में दो साल के बच्चे फतेहवीर को 129 फीट गहरे बोरवेल से 15 से 20 मिनट में निकाल लिया था, हालांकि छह दिन से बोरवेल में फंसे रहने के कारण बच्चे का देहांत हो चुका है। उस समय भी आखिर के 20 मिनट में गुरिंद्र को मौका मिला था।
- 2019 में तमिलनाडु तिराचुरापाली में 98 फीट गहरे बोरवेल में गिरे करीब तीन साल के बच्चे सुरजीत को ढाई घंटे में बाहर निकाला था। उस समय तमिलनाडु सरकार की तरफ से उन्हें हवाई जहाज के जरिये लाया व ले जाया गया था। सुरजीत की मौत हो चुकी थी।
- 2022 में होशियारपुर में 85 फीट के बोरवेल में गिरे चार साल के बच्चे सचिन को तीन घंटे में निकाला था। उसमें भी बच्चे का देहांत हो चुका था।
- 2026 में 15 मई को होशियारपुर के पेकोवाल में 25 फीट गहरे बोरवेल में से चार साल के बच्चे वंश को आठ घंटे में सुरक्षित बाहर निकाला था, इस हादसे के चार घंटे बाद ही मौका मिलने के बाद कारण बच्चे को सुरक्षित निकाला गया था।