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Ambala News: शिक्षा की लौ जगाकर संवार रही जरूरतमंद बच्चों का भविष्य
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अंबाला छावनी के गरीब बस्ती के बच्चों को शिक्षा देते इंद्रीश संस्था के सदस्य। संवाद
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इद्रीश संस्था बनी बेसहारा बेसहारा और गरीब बच्चों का सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। लगभग पांच वर्ष पहले शुरू की गई इद्रीश संस्था अब बेसहारा व गरीब बच्चों का सहारा बन गई है। किसी भी आपदा की स्थिति में संस्था के सदस्य आर्थिक तंगी के बावजूद लोगों के सहयोग से जरूरतमंदों की सेवा में दिन-रात जुटे रहते हैं। एक कमरे से शुरू हुआ फाउंडेशन का सफर अब अंबाला तक ही सीमित नहीं रह गया, जबकि नजदीकी जिलों के गणमान्य लोग भी इस संस्था को आर्थिक सहयोग दे रहे हैं और इससे इंद्रीश संस्था शिक्षा की लौ जागृत करते हुए गरीब बच्चों का भविष्य संवार रही है।
पांच सदस्यों से शुरू हुआ था सफर
रेलवे चाइल्ड लाइन में समन्वयक के पद पर रहते हुए नेहा ने बच्चों की बेबसी को करीब से देखा और फिर अपनी सुरक्षित नौकरी छोड़कर समाज सेवा की कठिन राह चुनी। उन्होंने इस कार्य के लिए अपने स्कूल व कॉलेज के पांच सहपाठियों को चुना ताकि फाउंडेशन बनाकर बच्चों की सहायता की जा सके और बच्चों के अंधेरे जीवन में शिक्षा के माध्यम से उजाला फैलाया जा सके।
अब हैं 100 सदस्य
नेहा प्रवीण बताती हैं कि उन्होंने बचपन से ही स्लम क्षेत्रों में अशिक्षा का अंधेरा देखा था। इसी टीस ने उन्हें कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित किया। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने इद्रीश फाउंडेशन की नींव रखी। आज इस संस्था में 35 से 40 स्थायी और करीब 50 से 60 अस्थायी सदस्य निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में जुटे हैं जोकि कहीं भी कुछ घटित होता है वो निष्काम सेवा के तहत मदद में जुट जाते हैं।
300 बच्चों को किया शिक्षित, 40 को लिया गोद
शिक्षा के प्रसार के तहत फाउंडेशन अब तक करीब 300 बच्चों को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ चुका है, वहीं संस्था ने 40 गरीब बच्चों को गोद लिया है, जिनकी शिक्षा और अन्य जरूरतों का खर्च जनसहयोग से उठाया जा रहा है। इसके अलावा सड़क सुरक्षा, साक्षरता, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण (पौधरोपण) जैसे कार्यों में भी संस्था अग्रणी भूमिका निभा रही है। संस्था से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि समाज में अशिक्षा का अंधेरा दूर करना ही मेरा एकमात्र लक्ष्य है। जब समाज शिक्षित होगा, तभी मुख्यधारा से जुड़ पाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। लगभग पांच वर्ष पहले शुरू की गई इद्रीश संस्था अब बेसहारा व गरीब बच्चों का सहारा बन गई है। किसी भी आपदा की स्थिति में संस्था के सदस्य आर्थिक तंगी के बावजूद लोगों के सहयोग से जरूरतमंदों की सेवा में दिन-रात जुटे रहते हैं। एक कमरे से शुरू हुआ फाउंडेशन का सफर अब अंबाला तक ही सीमित नहीं रह गया, जबकि नजदीकी जिलों के गणमान्य लोग भी इस संस्था को आर्थिक सहयोग दे रहे हैं और इससे इंद्रीश संस्था शिक्षा की लौ जागृत करते हुए गरीब बच्चों का भविष्य संवार रही है।
पांच सदस्यों से शुरू हुआ था सफर
रेलवे चाइल्ड लाइन में समन्वयक के पद पर रहते हुए नेहा ने बच्चों की बेबसी को करीब से देखा और फिर अपनी सुरक्षित नौकरी छोड़कर समाज सेवा की कठिन राह चुनी। उन्होंने इस कार्य के लिए अपने स्कूल व कॉलेज के पांच सहपाठियों को चुना ताकि फाउंडेशन बनाकर बच्चों की सहायता की जा सके और बच्चों के अंधेरे जीवन में शिक्षा के माध्यम से उजाला फैलाया जा सके।
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अब हैं 100 सदस्य
नेहा प्रवीण बताती हैं कि उन्होंने बचपन से ही स्लम क्षेत्रों में अशिक्षा का अंधेरा देखा था। इसी टीस ने उन्हें कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित किया। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने इद्रीश फाउंडेशन की नींव रखी। आज इस संस्था में 35 से 40 स्थायी और करीब 50 से 60 अस्थायी सदस्य निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में जुटे हैं जोकि कहीं भी कुछ घटित होता है वो निष्काम सेवा के तहत मदद में जुट जाते हैं।
300 बच्चों को किया शिक्षित, 40 को लिया गोद
शिक्षा के प्रसार के तहत फाउंडेशन अब तक करीब 300 बच्चों को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ चुका है, वहीं संस्था ने 40 गरीब बच्चों को गोद लिया है, जिनकी शिक्षा और अन्य जरूरतों का खर्च जनसहयोग से उठाया जा रहा है। इसके अलावा सड़क सुरक्षा, साक्षरता, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण (पौधरोपण) जैसे कार्यों में भी संस्था अग्रणी भूमिका निभा रही है। संस्था से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि समाज में अशिक्षा का अंधेरा दूर करना ही मेरा एकमात्र लक्ष्य है। जब समाज शिक्षित होगा, तभी मुख्यधारा से जुड़ पाएगा।