{"_id":"69cc37169cc73f58e70f47ef","slug":"lord-mahavirs-procession-took-place-on-a-golden-chariot-people-danced-to-the-music-of-the-band-ambala-news-c-36-1-amb1002-160756-2026-04-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: स्वर्ण रथ पर निकली भगवान महावीर की शोभायात्रा, बैंड बाजे पर झूमे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: स्वर्ण रथ पर निकली भगवान महावीर की शोभायात्रा, बैंड बाजे पर झूमे लोग
विज्ञापन
जैन समाज के लोगों को संबाेधित करते मुनि प्रतीक सागर महाराज। प्रवक्ता
विज्ञापन
- जीयो और जीने दो का जयघोष, रथयात्रा मार्ग को 108 तोरण द्वारों से सजाया
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर महाराज के पावन सानिध्य में महावीर जयंती का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कैंट में भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को स्वर्ण रथ पर विराजमान कर शोभायात्रा निकाली गई। संपूर्ण क्षेत्र जीयो और जीने दो के जयघोष से गुंजायमान रहा। पूरी रथयात्रा के मार्ग को 108 तोरण द्वारों से सजाया गया था।
शोभायात्रा में अनेक बैंड-बाजे और जीवंत झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने रथयात्रा का भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम के समापन पर पांडव शिला पर भगवान का अभिषेक शांति मंत्रों के उच्चारण के साथ संपन्न हुआ। वहीं क्रांतिवीर मुनि प्रतीक सागर महाराज के मंगल प्रवचन बुधवार प्रातः 8:15 बजे, गुड़ बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर में होंगे। समस्त जैन समाज और धर्मप्रेमी जनता को इस अवसर पर आमंत्रित किया गया है।
महावीर जयंती स्वयं से प्रश्न करने का दिन : मुनि
धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रतीक सागर ने कहा कि महावीर स्वामी ने चमत्कार को नमस्कार करना नहीं बल्कि श्रद्धा के बल पर अपने भीतर चमत्कार पैदा करना सिखाया है। उन्होंने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा कि मांगने से केवल भीख मिलती है लेकिन यदि सच्ची श्रद्धा के साथ नमन किया जाए तो बिना मांगे ही तीनों लोकों की दौलत भक्त के चरणों में आ जाती है। मुनि श्री ने सेठ सुदर्शन, सती सोम और चंदनबाला के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे सच्चे मन की पुकार ने इतिहास में चमत्कार किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि महावीर जयंती केवल एक जश्न नहीं, बल्कि स्वयं से प्रश्न करने का दिन है कि हम उनके सिद्धांतों पर कितना चलते हैं।
सिद्धांतों का बताया महत्व
मुनि श्री ने बताया कि अनेकांत और स्यादवाद भगवान महावीर की वे दो आंखें थीं, जिनसे उन्होंने पूरी सृष्टि को देखा और अहिंसा व सत्य का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने आह्वान किया कि तीर्थंकरों के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना हर अनुयायी का कर्तव्य है।
Trending Videos
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर महाराज के पावन सानिध्य में महावीर जयंती का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कैंट में भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को स्वर्ण रथ पर विराजमान कर शोभायात्रा निकाली गई। संपूर्ण क्षेत्र जीयो और जीने दो के जयघोष से गुंजायमान रहा। पूरी रथयात्रा के मार्ग को 108 तोरण द्वारों से सजाया गया था।
शोभायात्रा में अनेक बैंड-बाजे और जीवंत झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने रथयात्रा का भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम के समापन पर पांडव शिला पर भगवान का अभिषेक शांति मंत्रों के उच्चारण के साथ संपन्न हुआ। वहीं क्रांतिवीर मुनि प्रतीक सागर महाराज के मंगल प्रवचन बुधवार प्रातः 8:15 बजे, गुड़ बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर में होंगे। समस्त जैन समाज और धर्मप्रेमी जनता को इस अवसर पर आमंत्रित किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
महावीर जयंती स्वयं से प्रश्न करने का दिन : मुनि
धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रतीक सागर ने कहा कि महावीर स्वामी ने चमत्कार को नमस्कार करना नहीं बल्कि श्रद्धा के बल पर अपने भीतर चमत्कार पैदा करना सिखाया है। उन्होंने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा कि मांगने से केवल भीख मिलती है लेकिन यदि सच्ची श्रद्धा के साथ नमन किया जाए तो बिना मांगे ही तीनों लोकों की दौलत भक्त के चरणों में आ जाती है। मुनि श्री ने सेठ सुदर्शन, सती सोम और चंदनबाला के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे सच्चे मन की पुकार ने इतिहास में चमत्कार किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि महावीर जयंती केवल एक जश्न नहीं, बल्कि स्वयं से प्रश्न करने का दिन है कि हम उनके सिद्धांतों पर कितना चलते हैं।
सिद्धांतों का बताया महत्व
मुनि श्री ने बताया कि अनेकांत और स्यादवाद भगवान महावीर की वे दो आंखें थीं, जिनसे उन्होंने पूरी सृष्टि को देखा और अहिंसा व सत्य का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने आह्वान किया कि तीर्थंकरों के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना हर अनुयायी का कर्तव्य है।

जैन समाज के लोगों को संबाेधित करते मुनि प्रतीक सागर महाराज। प्रवक्ता