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Ambala News: मालिकाना हक का दावा खारिज
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। जिला एवं सत्र न्यायालय ने नगर निगम और सन एंड सैंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच चल रहे जमीन के पुराने विवाद में फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भले ही जमीन राजस्व रिकॉर्ड में शामलात के रूप में दर्ज हो, लेकिन यदि मालिक की पहचान स्पष्ट है, तो वह मुआवजे का हकदार होगा। साथ ही कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोनों पक्षों की अपीलों को खारिज कर दिया।
विवाद अंबाला के पट्टी कलान स्थित करीब 43 कनाल 17 मरला जमीन से जुड़ा है। कंपनी का तर्क था कि यह उनकी निजी संपत्ति है। सन एंड सैंड डेवलपर्स ने दावा किया था कि उन्होंने यह जमीन साल 2013 में जसविंदर कौर नाम की महिला से 1.53 करोड़ रुपये में खरीदी थी। कंपनी का तर्क था कि यह उनकी निजी संपत्ति है। वहीं, नगर निगम का कहना था कि राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन तालाब और बंजर के रूप में दर्ज है, जो सार्वजनिक उपयोग के लिए है और नियमानुसार इस पर निगम का अधिकार है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार जमीन शामलात देह है लेकिन इसमें मूल मालिकों (हरि दास और बाद में निर्मल दास) के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। इसलिए कंपनी को इस जमीन का पूर्ण और एकमात्र मालिक नहीं माना जा सकता।
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विवाद अंबाला के पट्टी कलान स्थित करीब 43 कनाल 17 मरला जमीन से जुड़ा है। कंपनी का तर्क था कि यह उनकी निजी संपत्ति है। सन एंड सैंड डेवलपर्स ने दावा किया था कि उन्होंने यह जमीन साल 2013 में जसविंदर कौर नाम की महिला से 1.53 करोड़ रुपये में खरीदी थी। कंपनी का तर्क था कि यह उनकी निजी संपत्ति है। वहीं, नगर निगम का कहना था कि राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन तालाब और बंजर के रूप में दर्ज है, जो सार्वजनिक उपयोग के लिए है और नियमानुसार इस पर निगम का अधिकार है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार जमीन शामलात देह है लेकिन इसमें मूल मालिकों (हरि दास और बाद में निर्मल दास) के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। इसलिए कंपनी को इस जमीन का पूर्ण और एकमात्र मालिक नहीं माना जा सकता।
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