अंबाला सिटी। जमीन-जायदाद के नाम पर धोखाधड़ी और चेक बाउंस के एक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ध्रुव सैनी की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी नरेंद्र कुमार को धारा 138 एनआई एक्ट के तहत दोषी करार दिया है। मामले में खास बात यह रही कि आरोपी ने न केवल घर बेचने का इकरारनामा किया, बल्कि सौदा रद्द होने पर दोगुनी रकम लौटाने का वादा कर जो चेक दिया, वह भी बैंक में धड़ाम हो गया। बिंजलपुर गांव के निवासी संत राम ने साल 2020 में यह शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक नवंबर 2014 में पड़ोसी नरेंद्र कुमार ने अपना घर बेचने का प्रस्ताव रखा।
4 लाख रुपये के कुल सौदे में से संत राम ने 2 लाख रुपये बयाने के तौर पर दिए। आरोपी बार-बार रजिस्ट्री की तारीख टालता रहा और अंत में मुकर गया। मार्च 2018 में नया समझौता हुआ, जिसमें नरेंद्र ने अपनी गलती मानी और बयाने की दोगुनी रकम (4 लाख रुपये) लौटाने का वादा किया। समझौते के तहत नरेंद्र ने संत राम को 4 लाख रुपये का एक पोस्ट-डेटेड चेक दिया। जब पीड़ित ने इसे बैंक में लगाया, तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी जब पैसे नहीं मिले, तो पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान आरोपी ने खुद को बचाने के लिए कई दलीलें दीं। न्यायाधीश ने पाया कि आरोपी के बयानों में विरोधाभास है। एक तरफ वह हस्ताक्षर चोरी होने की बात कह रहा था, तो दूसरी तरफ क्रॉस-एग्जामिनेशन में उसने समझौतों और चेक पर अपने हस्ताक्षर स्वीकार कर लिए। अदालत ने माना कि आरोपी यह साबित करने में विफल रहा कि चेक किसी कानूनी देनदारी के लिए नहीं दिया गया था। अदालत ने नरेंद्र कुमार को दोषी करार दिया।