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Ambala News: टांगरी बांध के इस पार के क्षेत्र को भी खतरा, कई जगह धारा ने पकड़ी नई राह
Sat, 11 Jul 2026 03:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 11 Jul 2026 03:49 AM IST
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टांगरी बांध के पास बह रही टांगरी नदी की धारा। संवाद
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वैभव शर्मा
अंबाला। मानसून की शुरुआत के साथ ही टांगरी नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों की सांसें अटक गई हैं। हाल ही में प्रशासन की ओर से नदी की खोदाई करवाकर दावा किया गया था कि इस बार बाढ़ जैसे हालात नहीं बनेंगे और क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। मगर पहाड़ों से टांगरी नदी में आए महज 25 हजार क्यूसेक पानी ने ही इन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। खोदाई में बरती गई लापरवाही के चलते चौड़ी नदी कई जगहों से संकरी हो गई है, जिससे पानी की धारा ने नया रास्ता पकड़ लिया है। अब बांध के दूसरी तरफ बसे महेश नगर सहित अन्य रिहायशी क्षेत्रों पर डूबने का खतरा मंडराने लगा है।
खोदाई में छोड़े पेच, नदी ने पकड़ी नई राह
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रामपुर सरसेहड़ी पुल के पास प्रशासन ने आनन-फानन में नदी के एक तरफ तो अस्थाई बांध बना दिया, लेकिन दूसरी तरफ सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए। इसके अलावा, नदी के बीच में कई जगहों पर खोदाई ठीक से न होने के कारण मिट्टी के ऊंचे टापू (पेच) छूट गए। नतीजा यह हुआ कि पानी सुचारू रूप से आगे बढ़ने के बजाय टकराकर दूसरी दिशाओं में मुड़ गया।
पिछली बार 40 हजार, इस बार 25 हजार में ही फूले हाथ-पांव
सरकारी दावों की हकीकत बयां करने के लिए आंकड़े ही काफी हैं। पिछले साल जब नदी में 40 हजार क्यूसेक पानी आया था, तब जाकर पानी बांध के करीब पहुंचा था। मगर इस बार अधूरी खोदाई के कारण नदी की क्षमता इतनी घट गई कि महज 25 हजार क्यूसेक पानी आने पर ही जलस्तर बांध के ऊपर तक छूने लगा।
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डरे सहमे हैं कॉलोनियों के लोग
नदी के बांध के इस पार स्थित कॉलोनियों में रहने वाले लोग अब रात-रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि अगर अभी शुरुआती बारिश में यह हाल है, तो आने वाले दिनों में यदि पानी की मात्रा बढ़ी, तो भारी नुकसान हो सकता है।
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अंबाला। मानसून की शुरुआत के साथ ही टांगरी नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों की सांसें अटक गई हैं। हाल ही में प्रशासन की ओर से नदी की खोदाई करवाकर दावा किया गया था कि इस बार बाढ़ जैसे हालात नहीं बनेंगे और क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। मगर पहाड़ों से टांगरी नदी में आए महज 25 हजार क्यूसेक पानी ने ही इन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। खोदाई में बरती गई लापरवाही के चलते चौड़ी नदी कई जगहों से संकरी हो गई है, जिससे पानी की धारा ने नया रास्ता पकड़ लिया है। अब बांध के दूसरी तरफ बसे महेश नगर सहित अन्य रिहायशी क्षेत्रों पर डूबने का खतरा मंडराने लगा है।
खोदाई में छोड़े पेच, नदी ने पकड़ी नई राह
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रामपुर सरसेहड़ी पुल के पास प्रशासन ने आनन-फानन में नदी के एक तरफ तो अस्थाई बांध बना दिया, लेकिन दूसरी तरफ सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए। इसके अलावा, नदी के बीच में कई जगहों पर खोदाई ठीक से न होने के कारण मिट्टी के ऊंचे टापू (पेच) छूट गए। नतीजा यह हुआ कि पानी सुचारू रूप से आगे बढ़ने के बजाय टकराकर दूसरी दिशाओं में मुड़ गया।
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पिछली बार 40 हजार, इस बार 25 हजार में ही फूले हाथ-पांव
सरकारी दावों की हकीकत बयां करने के लिए आंकड़े ही काफी हैं। पिछले साल जब नदी में 40 हजार क्यूसेक पानी आया था, तब जाकर पानी बांध के करीब पहुंचा था। मगर इस बार अधूरी खोदाई के कारण नदी की क्षमता इतनी घट गई कि महज 25 हजार क्यूसेक पानी आने पर ही जलस्तर बांध के ऊपर तक छूने लगा।
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डरे सहमे हैं कॉलोनियों के लोग
नदी के बांध के इस पार स्थित कॉलोनियों में रहने वाले लोग अब रात-रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि अगर अभी शुरुआती बारिश में यह हाल है, तो आने वाले दिनों में यदि पानी की मात्रा बढ़ी, तो भारी नुकसान हो सकता है।