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Ambala News: पिंक बस का हाल... महिलाओं के साथ पुरुष भी कर रहे सफर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2026 12:49 AM IST
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The condition of the pink bus... men are also travelling along with women.
अंबाला में संचालन कर रही पिंक बस में खडे़ होकर सफर करती छात्राएं। - फोटो : 1
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- सीट न मिलने से छात्राएं खड़े होकर सफर करने के लिए मजबूर
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संदीप कुमार

अंबाला सिटी। महिलाओं और छात्राओं के सुरक्षित सफर के लिए शुरू की गई पिंक बस सेवा अब उद्देश्य से भटक गई है। जिन बसों में सिर्फ महिलाओं का अधिकार होना चाहिए था, वहां अब पुरुषों का बोलबाला है। हालात यह है कि सीटों पर पुरुष बैठे रहते हैं जिससे छात्राओं को परेशानी होती है।
यही नहीं छात्राएं व महिलाएं पुरुषों के साथ खड़े होकर सफर करने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा परेशानी रायपुररानी, नारायणगढ़, बराड़ा और अंबाला छावनी से अंबाला सिटी की ओर जाने वाली छात्राओं और महिलाओं को झेलनी पड़ती है। इस रूट पर छात्राएं दरवाजे पर लटककर जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
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वर्तमान में यह पिंक बसें पंजोखरा-कलरहेड़ी, नन्हेड़ा-घसीटपुर, शाहपुर-कोटकछुआ, करधान-ब्राह्मण माजरा, बोह-बब्याल, अंबाला सिटी से कैंट, बराड़ा, नारायणगढ़ और कालपी मार्ग पर चल रही हैं। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि नारायणगढ़, बराड़ा और कालपी रूट की तीन बसें सुबह-शाम केवल महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

कोरोना काल के बाद बदले नियम



अंबाला में वर्ष 2019 में नौ पिंक बसें बेड़े में शामिल की गई थीं। शुरुआत में यह सेवा केवल महिलाओं के लिए थी लेकिन कोरोना काल के बाद जब दोबारा संचालन शुरू हुआ। ऐसे में महिला सवारी कम होने का तर्क देकर रोडवेज ने पुरुषों को भी इसमें बैठने की अनुमति दे दी। यही फैसला अब महिलाओं के लिए मुसीबत बन गया है।
सुबह और शाम के समय जब कॉलेज और दफ्तरों का समय होता है, इन बसों में भारी भीड़ रहती है। पिंक बसें आकार में छोटी हैं, जिनमें केवल 30 सीटें हैं। सीट फुल होने के बाद इसमें खड़े होने की जगह भी बेहद कम है। रायपुररानी, नारायणगढ़, बराड़ा और अंबाला छावनी से आने वाली छात्राएं बताती हैं कि पुरुष सीटों पर कब्जा जमाए रखते हैं जिससे उन्हें पूरी राह खड़े होकर या बस के पायदान पर लटककर यात्रा करनी पड़ती है।



केस-1

कोमल ने बताया कि पिंक बसों का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित सफर देना था लेकिन अब इसमें पुरुष सवारियों की संख्या अधिक होती है। सुबह के समय बसें इतनी भरी होती हैं कि हमें दरवाजे पर लटककर आना पड़ता है। पुरुषों के बीच खड़े होकर सफर करने में हम खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।

केस-2
सिमरन ने बताया कि बराड़ा से सिटी का रूट हमारे लिए रिजर्व हैं लेकिन हकीकत में पुरुष सीटों पर बैठे रहते हैं। मजबूरी में हमें पूरी राह खड़े रहकर तय करनी पड़ती है जिससे कॉलेज पहुंचने तक हम बुरी तरह थक जाते हैं।






केस-3
अंजली ने बताया कि पिंक बसें आकार में छोटी हैं और इनमें पैर रखने की भी जगह नहीं होती। साहा से कैंट आते हुए पुरुष भी इनमें चढ़ जाते हैं तो छात्राओं के लिए चढ़ना नामुमकिन हो जाता है। हमें जान जोखिम में डालकर बस के पायदान पर खड़े होना पड़ता है।

अंबाला में संचालन कर रही पिंक बस में खडे़ होकर सफर करती छात्राएं।

अंबाला में संचालन कर रही पिंक बस में खडे़ होकर सफर करती छात्राएं।- फोटो : 1

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