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Bhiwani News: रेलवे स्टेशन पर मिली बच्ची को परिजनों से मिलवाया
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भिवानी। रेलवे स्टेशन पर मिली एक लावारिस बच्ची को बाल कल्याण समिति भिवानी, राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने उसके पिता को सौंप दिया है। यह बच्ची आठ जुलाई को भिवानी रेलवे स्टेशन पर जीआरपी को मिली थी। वह अत्यधिक डरी और सहमी हुई थी।
भय और मानसिक तनाव के कारण बच्ची अपना नाम या घर का पता ठीक से नहीं बता पा रही थी। जीआरपी भिवानी ने तुरंत बाल कल्याण समिति भिवानी से संपर्क किया। बच्ची को सुरक्षित संरक्षण में लिया गया। उसके परिजनों की तलाश के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया गया।
जीआरपी भिवानी ने तुरंत परिवार से संपर्क साधा। सूचना मिलते ही बच्ची के पिता और परिजन भिवानी पहुंचे। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। शुक्रवार को समिति और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में बच्ची को उसके पिता के हवाले कर दिया गया। इस अभियान में बाल कल्याण समिति के सदस्य धीरज सैनी, नीलम रानी, सतेंद्र तंवर, दिनेश अत्री, हेड कांस्टेबल सुदेश कुमारी, कांस्टेबल पूजा रानी, धर्मबीर सिंह, सपोर्ट पर्सन लक्ष्मी, हेमलता और दीपाली का योगदान रहा।
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बच्ची गहरे मानसिक तनाव में थी
बाल कल्याण समिति के चेयरमैन प्रदीप सिंह तंवर ने बताया कि बच्ची गहरे मानसिक तनाव में थी। ऐसे मामलों में बच्ची को मानसिक संबल देना प्राथमिकता होती है। विभिन्न राज्यों में लगातार प्रयास किए गए। पुलिस नेटवर्क के बेहतरीन समन्वय से मध्य प्रदेश के भिंड जिले में बच्ची के परिवार का सुराग मिला।
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भय और मानसिक तनाव के कारण बच्ची अपना नाम या घर का पता ठीक से नहीं बता पा रही थी। जीआरपी भिवानी ने तुरंत बाल कल्याण समिति भिवानी से संपर्क किया। बच्ची को सुरक्षित संरक्षण में लिया गया। उसके परिजनों की तलाश के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया गया।
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जीआरपी भिवानी ने तुरंत परिवार से संपर्क साधा। सूचना मिलते ही बच्ची के पिता और परिजन भिवानी पहुंचे। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। शुक्रवार को समिति और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में बच्ची को उसके पिता के हवाले कर दिया गया। इस अभियान में बाल कल्याण समिति के सदस्य धीरज सैनी, नीलम रानी, सतेंद्र तंवर, दिनेश अत्री, हेड कांस्टेबल सुदेश कुमारी, कांस्टेबल पूजा रानी, धर्मबीर सिंह, सपोर्ट पर्सन लक्ष्मी, हेमलता और दीपाली का योगदान रहा।
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बच्ची गहरे मानसिक तनाव में थी
बाल कल्याण समिति के चेयरमैन प्रदीप सिंह तंवर ने बताया कि बच्ची गहरे मानसिक तनाव में थी। ऐसे मामलों में बच्ची को मानसिक संबल देना प्राथमिकता होती है। विभिन्न राज्यों में लगातार प्रयास किए गए। पुलिस नेटवर्क के बेहतरीन समन्वय से मध्य प्रदेश के भिंड जिले में बच्ची के परिवार का सुराग मिला।