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Bhiwani News: सेम की मार से सूखी किसानों की उम्मीदें... 40 गांवों की 25 हजार एकड़ जमीन बंजर, खरीफ पर भी संकट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Feb 2026 01:28 AM IST
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Farmers' hopes dried up due to the bean attack... 25,000 acres of land in 40 villages are barren, Kharif is also in danger.
गांव बापोड़ा के खेतों में जमा बारिश का पानी।
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भिवानी। जिले के भिवानी, तोशाम और बवानीखेड़ा खंड के करीब 40 गांवों की लगभग 25 हजार एकड़ कृषि भूमि सेमग्रस्त हो चुकी है जिससे किसान त्रस्त हैं। रबी सीजन के बाद अब खरीफ फसल की बिजाई की भी उम्मीद नहीं बची है। कई खेतों में अब भी बरसाती पानी जमा है और जहां से पानी निकल चुका है, वहां भूमि दलदली बनी हुई है। ऐसी स्थिति में फसल की बिजाई तो दूर, एक तिनका तक उगना संभव नहीं दिख रहा। किसान सेमग्रस्त भूमि से पूरी तरह नाउम्मीद होते जा रहे हैं।
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किसानों का कहना है कि सेमग्रस्त भूमि अपनी उपजाऊ क्षमता खो चुकी है और इसके सुधार के लिए ठोस प्रयास नहीं हो रहे। हालांकि सिंचाई विभाग बारिश के पानी की निकासी के लिए ड्रेनों तक पाइपलाइन डालने पर करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
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जिले के जिन गांवों में समस्या अधिक गंभीर है वहां बरसाती जलभराव वर्षों से बना हुआ है। गांव जाटूलुहारी, तिगड़ाना, सागवान, दांग खुर्द सहित कई गांवों के निचले इलाकों में अब भी पानी भरा है। इन क्षेत्रों में भूमिगत जलस्तर चार से पांच फीट तक ऊपर आ गया है। किसान परंपरागत फसल बिजाई से वंचित हैं और उनके सामने रोजी-रोटी का संकट गहराता जा रहा है। चार माह बाद फिर मानसून दस्तक देगा जबकि पिछले मानसून के घाव अभी तक भरे नहीं हैं।

जिले के इन गांवों की भूमि सबसे अधिक सेमग्रस्त
जिले के गांव तिगड़ाना, प्रेमनगर, मंढाना, घुसकानी, गुजरानी, मिताथल, चांग, धनाना, जताई, तालू, मुंढाल, बडेसरा, पूर, बलियाली, सिवाड़ा, जाटूलुहारी, कुंगड़, भैणी, अलखपुरा, खेती दौलतपुर, बड़सी, सिकंदरपुर, दुर्जनपुर, जीताखेड़ी, पपोसा, रोहनात, सागवान, दांग खुर्द शामिल हैं। इसके अलावा भी कई गांवों की कृषि भूमि आंशिक रूप से सेमग्रस्त होती जा रही है।


दलदली भूमि में धंस रही व्यवस्था, किसानों के जख्मों पर नहीं मरहम
मानसून के दौरान जलभराव से खेतों में पानी जमा हो गया था, जिसकी निकासी में तीन से चार माह लग गए। अब खेत की भूमि दलदली हो चुकी है। पैर रखते ही जमीन धंस जाती है और ट्रैक्टर के टायर भी फंस रहे हैं। ऐसे में बिजाई संभव नहीं है। पहले बारिश ने खड़ी फसल नष्ट कर दी और अब अगली फसल की भी उम्मीद नहीं बची है। भूमिगत जलस्तर काफी ऊंचा पहुंच गया है। -दीवान सिंह, किसान।


खेतों में दिन-रात प्रशासन के साथ मिलकर पानी की निकासी कराई गई, लेकिन अब हालत यह है कि यहां खरीफ फसल की बिजाई कर पाना मुश्किल है। भूमिगत जलस्तर पांच फीट पर आ गया है। ऐसे में किसान यदि बिजाई पर खर्च करेगा तो उसका पैसा भी पानी में डूबेगा। फसल नष्ट होने पर सरकार की ओर से कोई भरपाई नहीं मिली। -ओम सिंह, किसान।


बरसाती पानी से किसानों के ट्यूबवेल भी खराब हो गए। सोलर पंप संचालन संभव नहीं रहा क्योंकि चार से पांच फीट तक पानी महीनों जमा रहा। किसान लंबे समय तक ड्रेनों तक पानी की निकासी का इंतजार करते रहे। जब खेतों से पानी उतरा तो सेम की समस्या ने घेर लिया। अब भूमि खेती योग्य नहीं बची है। -सतबीर, किसान।



भिवानी, बवानीखेड़ा और तोशाम खंड के करीब 40 से अधिक गांवों में सेमग्रस्त भूमि की समस्या बढ़ रही है। किसानों को वर्टिकल सोलर पंप सिस्टम लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है और इसके लिए सरकार से अनुदान भी दिया जा रहा है। किसान भूमिगत जलस्तर को स्वयं संतुलित कर सकते हैं, इसके प्रयास जारी हैं। सेमग्रस्त भूमि के कारण फसल उत्पादन नहीं हो पा रहा है। ड्रेनों तक बारिश के पानी की निकासी का प्रबंध भी किया जा रहा है। -डॉ. राजू मेहरा, कनिष्ठ विज्ञान सहायक, भूमि एवं पानी परीक्षण प्रयोगशाला, भिवानी।


सिंचाई विभाग द्वारा अधिकांश खेतों से बरसाती पानी की निकासी कराई जा चुकी है। कुछ निचले खेतों से पानी की निकासी नहीं हो पाई है, क्योंकि वहां निकासी की व्यवस्था नहीं है। विभाग द्वारा बरसाती पानी को सीधे ड्रेनों तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइन डाली जा चुकी है और कुछ स्थानों पर यह कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा। -ओमप्रकाश बिश्नोई, अधीक्षण अभियंता, यमुना जल सेवाएं परिमंडल, सिंचाई विभाग, भिवानी।
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