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Bhiwani News: 30 अप्रैल तक जमा राशि लौटाने का अल्टीमेटम, नहीं तो संसद का घेराव करेंगे निवेशक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Feb 2026 01:32 AM IST
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Investors are given an ultimatum to return their deposits by April 30, failing which they will surround Parliament.
चिटफंड कंपनियों व सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन करते निवेशक।
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भिवानी। पीएसीएल सहित अन्य चिटफंड कंपनियों के पीड़ित निवेशकों ने 30 अप्रैल तक अपनी जमा राशि वापस करने का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा तक भुगतान नहीं हुआ तो एक मई को देशभर के पीड़ित दिल्ली में संसद का घेराव करेंगे। तपजप संगठन के बैनर तले एकजुट निवेशकों ने चौधरी सुरेंद्र सिंह पार्क के बाहर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और उपायुक्त के माध्यम से हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा।
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प्रदर्शनकारियों ने चिटफंड कंपनियों और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। ज्ञापन में मांग की गई कि प्रत्येक जिले के डीसी या एसपी कार्यालय के अधीन विशेष बड्स एक्ट भुगतान काउंटर खोले जाएं ताकि निवेशकों के दावे आसानी से जमा हो सकें। थानों में लंबित आवेदनों को तुरंत प्रत्येक जिले में नियुक्त डेजिग्नेटेड कोर्ट में भेजा जाए। कानून की धारा 15(6) का पालन करते हुए संपत्तियां कुर्क कर 180 दिनों के भीतर मूल राशि लौटाई जाए। ठगी करने वाली कंपनियों पर धारा 21(3) के तहत कठोर जुर्माना लगाया जाए और निवेशकों को दो से तीन गुना तक भुगतान सुनिश्चित किया जाए। भविष्य में ऐसी ठगी रोकने के लिए पूरे प्रदेश में कानून को सख्ती से लागू करने की भी मांग की गई।
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तपजप संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दयानंद ने कहा कि लोगों ने बच्चों की शादी और बुढ़ापे के लिए पाई-पाई जोड़कर इन कंपनियों में निवेश किया था, लेकिन अब अपनी मेहनत की कमाई वापस लेने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जमा राशि वापस न मिलने के गम में देश के लाखों नागरिक और सैनिक अब तक आत्महत्या कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालतों द्वारा संपत्तियां कुर्क करने के आदेश के बावजूद सरकार भुगतान प्रक्रिया में ढिलाई बरत रही है।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रामजस ने कहा कि सरकार ने बड्स एक्ट-2019 लागू तो कर दिया, जिसके तहत 180 दिनों में भुगतान का प्रावधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। जिला स्तर पर कार्यालय खुलने के बावजूद निवेशकों को उनकी राशि नहीं मिल रही है। निवेशकों ने मांग की कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाए और जांच-पड़ताल के बिना कंपनियों को लाइसेंस देना बंद करे। इस अवसर पर संगठन के अन्य पदाधिकारी, सदस्य और पीड़ित निवेशक मौजूद रहे।
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