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Bhiwani News: मिष्ठान भंडार से चार बाल श्रमिकों को कराया मुक्त
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रेस्क्यू किए बच्चों के साथ सीडब्ल्यूसी व क्राइम ब्रांच की टीम।
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भिवानी। बाल श्रम के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) भिवानी और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने हांसी गेट स्थित एक मिष्ठान भंडार पर कार्रवाई कर वहां काम कर रहे चार नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया है। रेस्क्यू किए गए बच्चों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराते हुए सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया गया जहां उनकी काउंसिलिंग की जा रही है।
जिला बाल कल्याण समिति भिवानी के सदस्य अधिवक्ता धीरज सैनी ने बताया कि बाल श्रम और बच्चों के शोषण पर रोक लगाने के लिए गठित विशेष टीम ने यह कार्रवाई की। टीम में सीडब्ल्यूसी सदस्य अधिवक्ता धीरज सैनी, दिनेश अत्री, नीलम रानी तथा क्राइम ब्रांच से एएसआई विनोद कुमार, एचसी संदीप और एचसी/ईएएसआई पवन शामिल रहे।
बच्चों को शिक्षा और पुनर्वास से जोड़ा जाएगा
सीडब्ल्यूसी चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर ने बताया कि बच्चों को सुरक्षित, भयमुक्त और शिक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समिति की प्राथमिकता है। रेस्क्यू किए गए चारों बच्चों की संवेदनशीलता के साथ काउंसिलिंग की जा रही है। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया जाए और यदि वे शिक्षा से वंचित हैं तो उन्हें स्कूलों में दाखिला दिलाकर मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
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उन्होंने कहा कि बच्चों के हाथों में कलम और किताबें होनी चाहिए न कि बाल श्रम का बोझ। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे। इस अभियान में सीडब्ल्यूसी स्टाफ रिंकू, हेमलता, दीपाली और तरुण का भी विशेष योगदान रहा।
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जिला बाल कल्याण समिति भिवानी के सदस्य अधिवक्ता धीरज सैनी ने बताया कि बाल श्रम और बच्चों के शोषण पर रोक लगाने के लिए गठित विशेष टीम ने यह कार्रवाई की। टीम में सीडब्ल्यूसी सदस्य अधिवक्ता धीरज सैनी, दिनेश अत्री, नीलम रानी तथा क्राइम ब्रांच से एएसआई विनोद कुमार, एचसी संदीप और एचसी/ईएएसआई पवन शामिल रहे।
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बच्चों को शिक्षा और पुनर्वास से जोड़ा जाएगा
सीडब्ल्यूसी चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर ने बताया कि बच्चों को सुरक्षित, भयमुक्त और शिक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समिति की प्राथमिकता है। रेस्क्यू किए गए चारों बच्चों की संवेदनशीलता के साथ काउंसिलिंग की जा रही है। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया जाए और यदि वे शिक्षा से वंचित हैं तो उन्हें स्कूलों में दाखिला दिलाकर मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
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उन्होंने कहा कि बच्चों के हाथों में कलम और किताबें होनी चाहिए न कि बाल श्रम का बोझ। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे। इस अभियान में सीडब्ल्यूसी स्टाफ रिंकू, हेमलता, दीपाली और तरुण का भी विशेष योगदान रहा।