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Bhiwani News: पर्ची की कतार ने रोक दी इलाज की रफ्तार
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मेडिकल कॉलेज में पंजीकरण करवाने के लिए लाइनों में लगे मरीज।
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भिवानी। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को पंजीकरण काउंटरों पर लगी लंबी कतारों ने इलाज की पूरी व्यवस्था की रफ्तार थाम दी। स्थानीय खेल प्रतियोगिताओं और मेडिकल फिटनेस के लिए बड़ी संख्या में खिलाड़ियों के एक साथ पहुंचने से पंजीकरण काउंटरों पर दबाव कई गुना बढ़ गया।
इसका असर ओपीडी से लेकर एक्स-रे विभाग तक पर दिखाई दिया और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। सुबह अस्पताल खुलते ही पंजीकरण काउंटरों पर मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतारें लग गईं। खिलाड़ियों के एक साथ पहुंचने से पंजीकरण प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव बना और आम मरीजों को एक से दो घंटे तक लाइन में खड़े रहने के बाद भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज कराने पहुंचे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को उमस और गर्मी के बीच भारी परेशानी झेलनी पड़ी। पंजीकरण में हुई देरी का असर अस्पताल के अन्य विभागों पर भी साफ दिखाई दिया। चिकित्सकों की ओपीडी और डिजिटल एक्स-रे विभाग के बाहर मरीजों की भीड़ जमा रही।
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हड्डी रोग, जनरल मेडिसिन और महिला रोग विभाग के बाहर सबसे अधिक भीड़ रही। खिलाड़ियों की फिटनेस जांच और नियमित मरीजों के एक्स-रे के कारण तकनीशियनों पर कार्यभार बढ़ गया। इसके चलते लोगों को एक्स-रे जांच के लिए भी डेढ़ से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
सामान्य मरीजों की जांच और इलाज हुआ प्रभावित
पंजीकरण और जांच प्रक्रिया में हुई देरी के कारण बुखार, पेट दर्द और जोड़ों के दर्द जैसी सामान्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों का समय पर उपचार नहीं हो सका। कतार में खड़ी कई बुजुर्ग महिलाओं को फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते देखा गया। कई मरीजों ने बताया कि सुबह आठ बजे लाइन में लगने के बाद भी दोपहर 12 बजे तक डॉक्टर से परामर्श नहीं मिल पाया। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की कि जब भी खिलाड़ियों, पुलिस भर्ती अभ्यर्थियों या फिटनेस प्रमाणपत्र बनवाने वालों का पंजीकरण किया जाए तो उनके लिए अलग काउंटर खोला जाए ताकि सामान्य और गंभीर मरीजों को घंटों लाइन में न लगना पड़े।
समय पर नहीं मिली एक्स-रे रिपोर्ट
अस्पताल पहुंचे खिलाड़ी गौरव, खुशी और अमित ने बताया कि वे दो दिन से एक्स-रे करवाने के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना था कि खिलाड़ियों का एक्स-रे तो किया जा रहा है लेकिन रिपोर्ट अगले दिन लेने के लिए कहा जाता है। इससे रिपोर्ट लेने के लिए दोबारा अस्पताल आना पड़ता है। समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने से उनका बाकी मेडिकल बीच में ही अटक जाता है क्योंकि एक्स-रे रिपोर्ट मिलने के बाद ही अन्य चिकित्सक मेडिकल प्रक्रिया आगे बढ़ाते हैं।
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इसका असर ओपीडी से लेकर एक्स-रे विभाग तक पर दिखाई दिया और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। सुबह अस्पताल खुलते ही पंजीकरण काउंटरों पर मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतारें लग गईं। खिलाड़ियों के एक साथ पहुंचने से पंजीकरण प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव बना और आम मरीजों को एक से दो घंटे तक लाइन में खड़े रहने के बाद भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
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दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज कराने पहुंचे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को उमस और गर्मी के बीच भारी परेशानी झेलनी पड़ी। पंजीकरण में हुई देरी का असर अस्पताल के अन्य विभागों पर भी साफ दिखाई दिया। चिकित्सकों की ओपीडी और डिजिटल एक्स-रे विभाग के बाहर मरीजों की भीड़ जमा रही।
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हड्डी रोग, जनरल मेडिसिन और महिला रोग विभाग के बाहर सबसे अधिक भीड़ रही। खिलाड़ियों की फिटनेस जांच और नियमित मरीजों के एक्स-रे के कारण तकनीशियनों पर कार्यभार बढ़ गया। इसके चलते लोगों को एक्स-रे जांच के लिए भी डेढ़ से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
सामान्य मरीजों की जांच और इलाज हुआ प्रभावित
पंजीकरण और जांच प्रक्रिया में हुई देरी के कारण बुखार, पेट दर्द और जोड़ों के दर्द जैसी सामान्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों का समय पर उपचार नहीं हो सका। कतार में खड़ी कई बुजुर्ग महिलाओं को फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते देखा गया। कई मरीजों ने बताया कि सुबह आठ बजे लाइन में लगने के बाद भी दोपहर 12 बजे तक डॉक्टर से परामर्श नहीं मिल पाया। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की कि जब भी खिलाड़ियों, पुलिस भर्ती अभ्यर्थियों या फिटनेस प्रमाणपत्र बनवाने वालों का पंजीकरण किया जाए तो उनके लिए अलग काउंटर खोला जाए ताकि सामान्य और गंभीर मरीजों को घंटों लाइन में न लगना पड़े।
समय पर नहीं मिली एक्स-रे रिपोर्ट
अस्पताल पहुंचे खिलाड़ी गौरव, खुशी और अमित ने बताया कि वे दो दिन से एक्स-रे करवाने के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना था कि खिलाड़ियों का एक्स-रे तो किया जा रहा है लेकिन रिपोर्ट अगले दिन लेने के लिए कहा जाता है। इससे रिपोर्ट लेने के लिए दोबारा अस्पताल आना पड़ता है। समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने से उनका बाकी मेडिकल बीच में ही अटक जाता है क्योंकि एक्स-रे रिपोर्ट मिलने के बाद ही अन्य चिकित्सक मेडिकल प्रक्रिया आगे बढ़ाते हैं।