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Bhiwani News: बिना लाइसेंस के नर्सरियों का नहीं होगा संचालन, एक्ट 2025 लागू
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भिवानी। हरियाणा सरकार ने बागवानी को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा बागवानी नर्सरी एक्ट-2025 लागू किया है। इसका उद्देश्य किसानों और उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराना है। नर्सरी संचालकों को अब पंजीकरण के साथ लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
सरकार ने हरियाणा हॉर्टिकल्चर नर्सरी अधिनियम 2025 और हरियाणा हॉर्टिकल्चर नर्सरी नियम 2026 को प्रदेश में लागू किया है। अधिनियम 8 जुलाई 2025 से प्रभावी होगा। इसके नियम 30 जून 2026 को हरियाणा राजपत्र में अधिसूचित किए गए हैं। इन प्रावधानों का लक्ष्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण, रोगमुक्त और प्रमाणित पौध सामग्री देना है।
इसका उद्देश्य नर्सरी व्यवसाय को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना भी है। नए अधिनियम और नियमों के अनुसार, प्रदेश में सभी फल, फूल और सजावटी पौधों की नर्सरियों का पंजीकरण और लाइसेंस अनिवार्य होगा। बिना लाइसेंस के किसी भी नर्सरी का संचालन नहीं किया जा सकेगा।
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पौध सामग्री स्वस्थ, गुणवत्तायुक्त और रोगमुक्त होनी चाहिए : नर्सरियों में तैयार की जाने वाली पौध सामग्री स्वस्थ, गुणवत्तायुक्त और रोगमुक्त होनी चाहिए। किसी भी प्रकार के संक्रमित पौधों या पौध सामग्री का विक्रय प्रतिबंधित रहेगा। इन नियमों से किसानों को बेहतर गुणवत्ता के पौधे मिलेंगे। इससे बागवानी क्षेत्र में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। रोगों के प्रसार पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। डीएचओ भिवानी देवीलाल ने सभी नर्सरी संचालकों से नियमानुसार पंजीकरण कराने की अपील की है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
इस पहल से किसानों को बेहतर गुणवत्ता के पौधे प्राप्त होंगे, जिससे बागवानी क्षेत्र में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। यह कदम न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी उच्च गुणवत्ता वाली बागवानी उत्पाद उपलब्ध कराएगा। डीएचओ देवीलाल ने सभी नर्सरी संचालकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर नियमानुसार अपना पंजीकरण करा लें।
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सरकार ने हरियाणा हॉर्टिकल्चर नर्सरी अधिनियम 2025 और हरियाणा हॉर्टिकल्चर नर्सरी नियम 2026 को प्रदेश में लागू किया है। अधिनियम 8 जुलाई 2025 से प्रभावी होगा। इसके नियम 30 जून 2026 को हरियाणा राजपत्र में अधिसूचित किए गए हैं। इन प्रावधानों का लक्ष्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण, रोगमुक्त और प्रमाणित पौध सामग्री देना है।
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इसका उद्देश्य नर्सरी व्यवसाय को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना भी है। नए अधिनियम और नियमों के अनुसार, प्रदेश में सभी फल, फूल और सजावटी पौधों की नर्सरियों का पंजीकरण और लाइसेंस अनिवार्य होगा। बिना लाइसेंस के किसी भी नर्सरी का संचालन नहीं किया जा सकेगा।
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पौध सामग्री स्वस्थ, गुणवत्तायुक्त और रोगमुक्त होनी चाहिए : नर्सरियों में तैयार की जाने वाली पौध सामग्री स्वस्थ, गुणवत्तायुक्त और रोगमुक्त होनी चाहिए। किसी भी प्रकार के संक्रमित पौधों या पौध सामग्री का विक्रय प्रतिबंधित रहेगा। इन नियमों से किसानों को बेहतर गुणवत्ता के पौधे मिलेंगे। इससे बागवानी क्षेत्र में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। रोगों के प्रसार पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। डीएचओ भिवानी देवीलाल ने सभी नर्सरी संचालकों से नियमानुसार पंजीकरण कराने की अपील की है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
इस पहल से किसानों को बेहतर गुणवत्ता के पौधे प्राप्त होंगे, जिससे बागवानी क्षेत्र में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। यह कदम न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी उच्च गुणवत्ता वाली बागवानी उत्पाद उपलब्ध कराएगा। डीएचओ देवीलाल ने सभी नर्सरी संचालकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर नियमानुसार अपना पंजीकरण करा लें।